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kishan bhavnani, poem

सुख दुख दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव

भावनानी के भाव सुख दुख दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव जिंदगी में उतार-चढ़ाव बस एक ख़ूबसूरत खेल है …


भावनानी के भाव

सुख दुख दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव

सुख दुख दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव|The village where there is life in both happiness and sorrow

जिंदगी में उतार-चढ़ाव
बस एक ख़ूबसूरत खेल है
जिंदगी सुखों और दुखों का
बहुत ही ख़ूबसूरत मेल है

दुख भी शरमा जाएगें
यह कैसा माहौल है
जियो अगर दुखों को खुशी से
जिंदगी में यह सबसे यह अनमोल है

कभी ढेरों खुशियां आती है
कभी गम आते बेमिसाल है
घबरा जाए तो चुनौतियां से
वह भी क्या इंसान है

जीना सिखा दे बुरे वक्त में
वही असल इम्तिहान है
इम्तिहानो से भरी जिंदगी यही
खूबसूरत मिसाल है

सिर्फ सुख या सिर्फ दुख ही
जीवन में यह सरासर बेमेल है
जिंदगी में उतार-चढ़ाव होते रहें
बस यही तो खूबसूरत खेल है

जिस प्रकार दो पहियों से
पटरी पर दौड़ती रेल है
बस उतार-चढ़ाव जिंदगी के
खूबसूरत खेल है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र

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