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Narayan-Lal, poem

सुंदरता-कविता। Sundarta par kavita

सुंदरता सुंदरता की रूप है नारी.इसीलिए तो सबकी प्यारी.बोली इनकी मीठी न्यारी.पर जाती है सब पर भारी.कठिनाईयों से कभी न …


सुंदरता

सुंदरता-कविता। Sundarta par kavita

सुंदरता की रूप है नारी.
इसीलिए तो सबकी प्यारी.
बोली इनकी मीठी न्यारी.
पर जाती है सब पर भारी.
कठिनाईयों से कभी न हारी.
मन में है संकल्प जो भारी.
गुण की खान सहेजे सारी.
पर खुशियों पर हो जो वारी.
नहीं दिखाए अपनी लाचारी.
रिश्तों की भी समझ है भारी.
जिसे निभाती बारी बारी.
चाहे बनना पडे़ बेचारी.
सबकी करती है तैयारी.
नारी की परिधान है साड़ी.
दिखती इसमें बेहद प्यारी.
कर्तव्यों से बंधी है नारी.
संस्कारों से युक्त है नारी.
इसीलिए वो सबको प्यारी.
रस और गंध की खान है नारी.
इसीलिए पुरूषों पर भारी.

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नारायण लाल
स्वरचित@ सर्वाधिकार सुरक्षित


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