Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

सीखा है ज़िन्दगी से- जयश्री बिरमी

 सीखा हैं जिंदगी से पैदा होते ही तूने सिखाया हैं रोना ए जिंदगीजब देखा कुछ सिखाया हैं ए जिंदगी कुछ …


 सीखा हैं जिंदगी से

Seekha hai zindagi se by jay shree birmi

पैदा होते ही तूने सिखाया हैं रोना ए जिंदगी
जब देखा कुछ सिखाया हैं ए जिंदगी

कुछ अच्छा तो कुछ सिखाया हैं जिंदगी
घर में हो या बाहर सब से करना सिखाया समझौता ए जिंदगी

फिर नसीब में क्या हैं तू भी जाने हैं ए जिंदगी
मुझे तो मिली बेचारगी

और मायूसी ही ए जिंदगी
कल का तो पता नहीं किंतु

आज की ही बात हैं
न दिखाई समझदारी तो

वह नादानी ही तो हैं ए जिंदगी
छोड़ स्वाभिमान रुकी रही

मजबूरियों में
न ही लब्ज़ थे कुछ बोलने के लिए

अगर बोलती भी तो तोल तोल कर
सभी का मान रखने के लिए

बलि चढ़ा दिया स्वमान ए जिंदगी
सोचा था एकदिन लगेंगे पंख मुझे

कुतरे गए मेरी ही इजाजत से ए जिंदगी
न जुल्म हुआ न ही हुई शिकायत

मुद्दते निकल गई बिना लिए इजाजत ए जिंदगी
न ही किसी ने सहारा दिया और न ही थामा हाथ

रेत सा फिसला समा और फिसले जज्बात ए जिंदगी
गुजरते गए लम्हे बिना इजाजत ए जिंदगी

कोई छोड़ी ही नहीं मीठी सी परछाई ए जिंदगी
डराते रहे साए पुराने और

नए भी हो गए तैयार ए जिंदगी
जिक्र न करते अभी अगर किया होता सामना

कुछ तो देना था कटु आयुध मुझे भी ए जिंदगी
वार न सही प्रतिकार तो हो जाता ही

नहीं छूटते गहरे निशान आंसुओं के ए जिंदगी
लकीरें न होती गहरी जेहन पर
नहीं डरता भविष्य पुराने जख्मों को देख कर ए जिंदगी

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

कविता-हार और जीत जितेन्द्र कबीर

June 1, 2021

हार और जीत ‘हार’ भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए ‘निराश’लेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने अंतर्मन

kavita barkha shweta tiwari Mp.

June 1, 2021

बरखा बरखा रानी आओ ना  बूंद बूंद बरसाओ ना तपती धरती का व्याकुल अंतर्मन  क्षुब्ध दुखी सबका जीवन  शीतल स्पर्श

kavita vaqt by anita sharma jhasi

June 1, 2021

वक्त जुबां से आह निकली थी,लबों पे उदासी थी।क्या सोचा था,क्या पाया है,मन में उदासी थी। कभी ईश्वर से नाराजगी

kavita Bebasi by Namita Joshi

May 31, 2021

  बेबसी हर सूं पसरा है सन्नाटा, हर निगाह परेशान क्यूँ है। गुलजा़र था जो मैदान कभी कहकहों से, आज

kavita purane panne by Anita sharma

May 31, 2021

पुराने पन्ने चलो पुराने पन्नों को पलटाये,फिर उन पन्नों को सी लेते हैं।उसमें दबे अरमानो में से ही,कुछ अरमान जीवन्त

kavita shahar by Ajay jha

May 31, 2021

शहर. मैं शहर हूँ बस्तियों की परिधि में बसा मजबूर मजलूम पलायित नि:सरित श्रम स्वेद निर्मित अभिलाषा लिए अतीत का

Leave a Comment