Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

साहित्य राष्ट्र की महानता

भावनानी के भाव साहित्य राष्ट्र की महानता साहित्य राष्ट्र की महानता और वैभव का दर्पण होता है साहित्य को आकार …


भावनानी के भाव

साहित्य राष्ट्र की महानता

साहित्य राष्ट्र की महानता

साहित्य राष्ट्र की महानता
और वैभव का दर्पण होता है
साहित्य को आकार देने में संस्कृति
और परंपराओं का महत्वपूर्ण रोल होता है

साहित्य का ख़जाना भारत में अनमोल है
साहित्य को जीवंतमय बनाने में
प्रिंट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का महत्वपूर्ण रोल है
कायम रखने में हमारे पूर्वजों का विशेष रोल है

सच्चाई को लेखनी से सलाम करते हैं
उनकी लेखनी अस्त्र महत्वपूर्ण कलम है
बुराई का धागा तीव्र कलम अस्त्र से काटते हैं
लेखक कवि बुद्धिजीवी पत्रकार को सलाम है

जो साहित्य और कविताएं सामाजिक कल्याण
पर केंद्रित है वह कालजई होती है
यही कारण है रामायण और महाभारत
जैसे महाकाव्य आज भी हमें प्रेरणा देते हैं

हमारे भारत के ज्ञान भण्डार में इतनी जबरदस्त
एवं चमत्कारिक बातें छिपी हुई हैं,
हम यह सोचने पर विवश हो जाते हैं कि
विराट ज्ञान हमारे पास कहां से सवालिया निशान है

आयाजब उस प्राचीनकाल में यह जबरदस्त
ज्ञानभंडार हमारे पास था, तो अब क्यों नहीं है
यह ज्ञान कहां चला गया
सबसे बड़ा सवालिया निशान है

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र 


Related Posts

सफर ए इश्क़- R.S.meena Indian

January 6, 2022

कविता – सफर ए इश्क़ जिस दिन होगी अपने प्यार की शुरुआत । उस दिन तुमसे,हम अपनी वफ़ा जता देंगे

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

Leave a Comment