Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

lekh, Uncategorized

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और …


साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और मनुष्य का आमना-सामना होता रहेगा। उनमें से एक मोर्चा साहित्य का भी है। साहित्य की रचनात्मकता को अनन्य मानव अभिव्यक्ति कहा जाता है। पर क्या एआई के आने से रचनात्मकता की यह अनन्यता मानव सहज रह पाएगी। इस समय ऐसे तमाम रोबोट हैं, जो जैसी आप चाहते हैं, वैसी कहानियां और कविताएं दिख देते हैं। विशाल डेटाबेस, मशीन लर्निंग और लार्ज लैंग्वेज माॅडल द्वारा एआई आप जैसी चाहते हैं, वैसी कहानियां या कविताएं लिख कर दे सकता है। कोई रचनाकार अपने लेखन का पूरी तरह से एआईकरण न करना चाहे तो वह एआई के अमुक सवाल दे कर नया रचनात्मक प्लाॅट या विषयवस्तु या कथाबीज एआई द्वारा प्राप्त कर सकता है और फिर खुद लिख सकता है। इस तरह हाइब्रिड लेखन का भी प्रारंभ हुआ है।

एआई यानी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन के बाद विश्व एक आकर्षक उत्क्रांति का साक्षी बना है। साहित्यिक दुनिया में इसका प्रवेश नवीनता, प्रयोशीलता और विवाद को बढ़ावा देने वाला है। एआई जेनेरेटेड टेक्स्ट यानी कि लिखने के लिए भविष्य में प्रूफरीडर की जरूरत नहीं पड़ेगी। बहुत तेजी से मुक्त लर्निंग की अपेक्षा एआई को हमारी भाषा के सभी सिद्धांत और अपवाद पहले ही पढ़ा दिए जाएंगे यानी वह भाषा की गलतियां नहीं करेगा। गजल में छंद, रदीफ और काफिया के नियम भी उसे ठीक से पढ़ा दिए जाएंगे यानी एआई रचित गजल में छंद दोष नहीं होगा। विशेषांकों में सीजनल लिखने वाले लेखकों को 1200 या 1500 शब्दों की मर्यादा में लिखने के लिए बारबार काटछांट या परिमार्जन नहीं करना होगा। एआई ठीक 1199 शब्दों में कहानी लिख देगा। वही कहानी 800 शब्दों में कहा जाए तो छोटी कर के मात्र 30 सेकेंड में लिख कर दे देगा। इतना ही नहीं, हिंदी साहित्य में प्रबंध काव्य या महाउपन्यास लिख कर महान बनने की इच्छा रखने वाले साहित्यकारों के आड़े भी यह एआई आएगा। अमुक निश्चित इनपुट दे कर वह टेक लेखक घड़ी के छठें भाग में दीर्घ उपन्यास लिखने की शुरुआत कर देगा। जो लेखक अमुक माहौल में लिखने के आदी हों और एक निश्चित वातावरण में ही मूड बनता हो, ऐसे मुडी लेखकों के लिए प्लास्टर उघड़ गया हो, इस तरह के ड्राइंगरूम में, चूंचूं करने वाली कुर्सी पर बैठे हों, वहां भी वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से कश्मीर की बर्फीली वादियों की अनुभूति कर सकेंगे। अमुक लेखक बैठक में बैठे-बैठे महाभारत के युद्ध के मैदान में उतरे हों, ऐसी अनुभूति कर सकेंगे। दुर्योधन की भूमिका में वर्चुअल कायाप्रवेश कर के बैठक में ही बैठे-बैठे खंडकाव्य लिख कर दुर्योधन को सुयोधन कह कर, उसकी महानता का वर्णन कर के खुद रातोरात महान हो सकेंगे। समीक्षकों और संपादकों के लिए एआई बहुत बड़ा वरदान है। संपादक तो चुटकी बजा कर अमुक कवि की प्रसिद्ध रचनाएं एआई से पसंद करा कर उन रचनाओं की वैशिष्ट्य के बारे में एक दीर्घ लेख लिखा लेंगे। संपादित किताब का बैक टाइटल पर छापने के लिए संपादन जैसा पहले किसी ने कुछ किया नहीं। यह युगकार्य है… यह संपादन अनन्य है… वगैरह वगैरह जैसा स्वनामधन्य होने का लेखन भी एआई ही लिख देगा। जो समीक्षक पूरी किताब पढ़े बगैर प्रस्तावना पढ़वकर बड़ी जहमत से समीक्षा करते हैं, उनका काम और आसान हो जाएगा। एआई आपको बढ़िया समीक्षा कर के दे देगा। इसमें अलग-अलग वर्ग के लिए अलग-अलग समीक्षाएं हो सकती हैं। किसी भी कृति की प्रशंसा या आलोचना विवेचक करते हैं। यह काम भी एआई करेगा। आप जैसा चाहते हैं वैसा पर्सपेक्टीव वाली विवेचना आप को मिलेगी। इसलिए किसी की भी आलोचना के लिए खराब होने वाला समय अब बचेगा। अनुवाद की पूरी दुनिया बदल जाएगी। किसी भी भाषा का उपन्यास या कोई अन्य किताब किसी भी भाषा वाला पढ़ सकेगा। नोबेल प्राइज विजेता की स्पीच टू टेक्स्ट में कन्वर्ट कर के उसका हिंदी में अनुवाद कर के पढ़ा या सुना जा सकेगा। यह सब पढ़ कर आप को ऐसा लगेगा कि जब सब कुछ एआई ही कर देगा, तब तो सब लेखक बेकार हो जाएंगे? अरे नहीं भाई नहीं। यहां मात्र एआई के उपयोग के बारे में चर्चा की गई है। बाकी एआई जो लेखन करेगा, उसमें अनेक मर्यादाएं भी हैं। सब कुछ जो डेटावेज फीड किया गया है, उस पर ही आधारित होगा। एआई को जो सिखाया गया है, वैसा ही होगा। इसलिए कि एआई द्वारा रचित रचनाएं होमोजीनियस होंगी। इसलिए कि उसमें समानता का पहलू अधिक देखने को मिलेगा। एआई खुद आयास से लिखता है, इसलिए आयास वाले लेखन के लिए यह चुनौती है। पर अनायास ने बिजली की चमक में रची गई अनन्य रचनाएं एआई कभी नहीं लिख सकता। क्योंकि एआई कभी किसी के आंसू पोंछने नहीं जा सकता। किसी लाचार मनुष्य के दिल की की गहराई और उसमें बसी वेदना को नहीं समझ सकता और न पा सकता है। अंत में एआई एक पावर्ड आर्ट है और मनुष्य के पास आर्ट पावर है। यह छोटा सा फर्क हमारी अनन्यता को बनाए रखे है क्योंकि वह दिखाई देता है।

वीरेंद्र बहादुर सिंह

जेड-436ए, सेक्टर-12,

नोएडा-201301 (उ.प्र.)


Related Posts

कोरोना पीक़ – ईसीआई की बंदिशें बिल्कुल ठीक

January 16, 2022

 कोरोना पीक़ – ईसीआई की बंदिशें बिल्कुल ठीक  आदर्श आचार संहिता, कोविड के समग्र दिशानिर्देशों के पालन में सभी राजनीतिक

उठाओ सुदर्शन मत बनो कृष्ण-जयश्री बिरमी

January 16, 2022

 उठाओ सुदर्शन मत बनो कृष्ण क्यों देखनी हैं सो गलतियों की राह अब?   हद हो गई हैं अपने आत्मसम्मान

पढ़े भारत अभियान

January 16, 2022

पढ़े भारत अभियान बच्चों को वास्तविक जीवन से जोड़ने, शिक्षा में रचनात्मकता, चिंतन, अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना ज़रूरी पढ़े

आखिर क्यों पढ़े-लिखे बच्चे गलत मार्ग पर जा रहे हैं ?

January 16, 2022

 आखिर क्यों पढ़े-लिखे बच्चे गलत मार्ग पर जा रहे हैं ? हाल ही में आपने सुना होगा सोशल मीडिया पर

शिक्षा और ज्ञान न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज निर्माण की कुंजी है

January 16, 2022

शिक्षा और ज्ञान न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज निर्माण की कुंजी है ज्ञान को सीख़ने की इच्छा शक्ति और ज़िद्द नें

डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म की बल्ले-बल्ले

January 16, 2022

डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म की बल्ले-बल्ले!!! पांच राज्यों में चुनाव तारीखें घोषित – 7 चरणों की लड़ाई – कोरोना नें फ़ीका

Leave a Comment