साहित्य मनुष्य के सोचने, महसूस करने और समझने की क्षमता को गहराई देता है। जब भावनाएँ शब्दों का सहारा लेती हैं, तब साहित्य एक ऐसी जीवंत अभिव्यक्ति बन जाता है जो पीढ़ियों तक मनुष्यता को दिशा प्रदान करती है। साहित्य केवल पढ़ा नहीं जाता, वह अनुभव किया जाता है—कभी वह संवेदना बनकर आँखों को नम करता है, तो कभी प्रेरणा बनकर हृदय में साहस भर देता है।
बाल साहित्य इसी साहित्यिक परंपरा की वह पावन धारा है, जो नन्हे हृदयों में मुस्कान, कल्पना और नैतिकता का संगम रचती है। बच्चों के लिए लिखे गए गीत, कहानियाँ और कविताएँ केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का आधार हैं। बाल साहित्य बच्चे के भीतर छिपी जिज्ञासा को पंख देता है और उसे संवेदनशील, सृजनशील और मानवतावादी दृष्टि प्रदान करता है।
प्रस्तुत संकलन “Quotes by Dr. Mulla Adam Ali” साहित्य और बाल साहित्य के महत्व को नए दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास है। इन उद्धरणों के माध्यम से शब्दों की शक्ति, कल्पना की उड़ान और साहित्यिक मूल्यों की अनुभूति कराना इसका उद्देश्य है। विश्वास है कि ये विचार पाठकों के मन में नई रोशनी जगाएँगे और साहित्य के प्रति प्रेम को और सुदृढ़ करेंगे।
“डॉ. मुल्ला आदम अली के अनमोल उद्धरण”
| 1. साहित्य केवल लिखा नहीं जाता, वह जीवित रहकर पीढ़ियों से संवाद करता है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 2. अच्छा साहित्य वह है जो पाठक को पढ़ने के बाद भी देर तक सोचने पर मजबूर कर दे। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 3. बाल साहित्य बच्चे के मन में छिपे इंद्रधनुषी सपनों को शब्द देता है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 4. जो बच्चे कहानियाँ सुनते हैं, वे जीवन में संवेदनाओं को समझना सीख जाते हैं। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 5. साहित्य मनुष्य के चरित्र का वह दर्पण है जिसमें उसका सच्चा स्वरूप दिखाई देता है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 6. बाल साहित्य नन्ही मुस्कानों के माध्यम से बड़े संस्कारों को जन्म देता है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 7. पुस्तकों के साथ समय बिताना स्वयं के बेहतर संस्करण से मिलने जैसा है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 8. कहानी केवल कथानक नहीं होती, वह मनुष्य और मनुष्यता के बीच पुल होती है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 9. साहित्य हृदय की भाषा है, जिसे हर संवेदनशील मन समझ लेता है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
| 10. बाल साहित्य मासूम मन को कल्पना और संस्कारों के सुंदर संगम से जोड़ता है। – डॉ. मुल्ला आदम अली
साहित्य और बाल साहित्य मानव जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्तंभ हैं। ये केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि विचार, संस्कार और संवेदनाओं के वाहक हैं। प्रस्तुत उद्धरण यह स्पष्ट करते हैं कि साहित्य व्यक्ति के भीतर छिपी संभावनाओं को जगाता है और बाल साहित्य नन्हें हृदयों में उज्जवल भविष्य के बीज बोता है।
डॉ. मुल्ला आदम अली के ये विचार हमें प्रेरित करते हैं कि हम साहित्य को केवल शब्दों में न ढूँढें, बल्कि जीवन के व्यवहार, मूल्यों और दृष्टिकोण में भी उतारें। साहित्य हमें इंसान से बेहतर इंसान बनने की राह दिखाता है, और बाल साहित्य आने वाली पीढ़ी को उजाले की ओर ले जाने वाला दीपक बनता है।
अंततः, यही संदेश उभरकर सामने आता है कि —
साहित्य जीवन की चेतना है और बाल साहित्य भविष्य की मुस्कान।
