Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

साहित्यकार महान

 साहित्यकार महान शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार लेखक है रोक ना …


 साहित्यकार महान

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल

इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार

लेखक है रोक ना पाए गहन जज़्बात कलाम

लिख देता दिल में होता जो यही गहन विज्ञान

कहां सोचता फल कि इच्छा यही उसका ज्ञान

हर मुद्दे पर कलम चला खींचे सबका ध्यान

जिसका ध्यान न हो उसे भी दिलाए ये संज्ञान 

निकाले शब्द एसे-एसे चुभे जैसे तीर कमान।।

शब्द संजो कर प्रेम से करे श्रृंगार रसपान

शब्द संजोए द्वेष से जबब रौद्र रुप करे ना विश्राम

हर रुप , रस , रंग को संजोता साहित्यकार महान।।

वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

ईर्ष्या तू ना गई – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

ईर्ष्या तू ना गई देखकर लोगों की सुख-सुविधा जल रही तू खूब जलन सेअपनी दुख की चिंता नहीं हैदूसरों के

कर्म महान है – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

कर्म महान है बच्चे भगवान हैं शिक्षा हमारी आधार हैगुणवत्तापूर्ण है विकल्प शत प्रतिशत लागू करना शिक्षकों का है संकल्पऐसा

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

Leave a Comment