Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

सामुदायिक सेवा अनिवार्य बनाना ज़रूरी-किशन सनमुखदास भावनानी

युवाओं और स्कूल विद्यार्थियों के लिए सामुदायिक सेवा अनिवार्य बनाना ज़रूरी सेवा भाव हर भारतीय की बुनियादी विरासत में से …


युवाओं और स्कूल विद्यार्थियों के लिए सामुदायिक सेवा अनिवार्य बनाना ज़रूरी

सामुदायिक सेवा अनिवार्य बनाना ज़रूरी-किशन सनमुखदास भावनानी

सेवा भाव हर भारतीय की बुनियादी विरासत में से एक है, इसके लिए बच्चों को कम आयु से ही प्रेरित करना जरूरी – एड किशन भावनानी गोंदिया 

 भारत की मिट्टी में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति, उसकी पीढ़ी, पीढ़ियों, उसके पूर्वजों में भारतीय संस्कृति, प्रथा और सेवा भाव की बुनियादी विरासत की अमिट छाप देखने को ज़रूर मिलेगी!!
भारतीय चाहे वह भारत में रहता हो या विश्व के किसी भी देश में रहता हो यदि उसकी किसी पीढ़ी या पूर्वजों का संबंध भारतीय मिट्टी में पैदा होने से रहा हो तो उनमें नम्रता और सेवा भाव का गुण ज़ ज़रूर दिखेगा!!!
साथियों बात अगर हम सेवा भाव, सामूहिक सेवा की करें तो वर्तमान बदलते परिवेश और पाश्चात्य संस्कृति के हमले को देखते हुए हमें अत्यंत सतर्क होकर अपने भारतीय संस्कृति, विरासत, सेवा भाव, सामूहिक सेवा को बरकरार रखना है।
साथियों बात अगर हम इसे संरक्षित रखने की करें तो इसके लिए घर के बड़े बुजुर्गों,अभिभावकों शिक्षकों, शिक्षा संस्थाओं, शिक्षा मंत्रालय सभी को सहभागी होकर आपस में तालमेल से सामुदायिक सेवा रूपी यज्ञ में अपनी आहुति देना होगा!!! ताकि हम अपनी अगली पीढ़ी में यह सेवा भाव बरकरार रख सके।
साथियों बात अगर हम इस सेवा भाव, संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित करने की करें तो हमें अपने बच्चों को उनके बचपन काल से ही उन्हें सामुदायिक सेवा भाव के लिए प्रेरित करना होगा ताकि भारतीय संस्कृति की बुनियादी विरासत उनके बचपन से ही कंठस्थ हो सके और बड़े होकर अपनी खुशबू हर उस जगह फैलाएं जहां भी किस्मत उन्हें लेकर जाए!!!
जिसका जीता जागता उदाहरण विदेशों में लाखों हमारे प्रवासी भारतीय, मूल भारतीय हैं जो भारतीय संस्कृति, सेवा भाव की बुनियादी विरासत की खुशबू चारों तरफ फैला रहे हैं। जिससे भारत की प्रतिष्ठा को चार चांद लग गए हैं।
साथियों बात अगर हम शिक्षकों और शिक्षा संस्थाओं की करें तो फिलहाल अभी तो कोरोना ओमिक्रान वेरिएंट की त्रासदी चल रही है और स्कूलों को फ़िर से बंद किया जा रहा है या बंद करने के कगार पर हैं, परंतु शिक्षक और शिक्षण संस्थाओं को इस बात को रेखांकित करना चाहिए कि विद्यार्थियों को शुरू के क्लासेस से ही सामुदायिक सेवा का पाठ पढ़ाना और उन्हें व्यावहारिक रूप से सामुदायिक सेवा कराना अनिवार्य करना चाहिए और उस पर मार्को या ग्रेड का अवार्ड निश्चित करना चाहिए।
साथियों बात अगर हम प्रसिद्ध बौद्धिक व्यक्तियों और उच्च क्षमता प्राप्त मूल भारतीयों की करें तो आज अनेक वैश्विक बड़ी-बड़ी कंपनियों में सीईओ हैं!!! अमेरिका के उपराष्ट्रपति, स्पेस क्षेत्र में भारी सफलता सहित अनेक क्षेत्रों में जिनका नाम वैश्विक पटल पर आया है। हालांकि पूर्ण विकसित देशों से उनका नाम जुड़ा, परंतु है तो वह मूल भारतीय ही!!! उनकी भारतीय संस्कृति, सामुदायिक सेवा, मूल सेवा भाव, विनम्रता!!! इतनी भारी सफलता के बावजूद भी झलकती है!! यह है मूल भारतीय संस्कृति की बुनियादी विरासत!!! इसलिए हमें तत्काल इसे रेखांकित कर इस पर उचित कदम उठाने की जरूरत है।
साथियों बात अगर हम दिनांक 3 जनवरी 2022 को माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा एक कार्यक्रम में संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी कहा है कि युवाओं को कम आयु से ही सेवा भाव के लिए प्रेरित करना अत्‍यंत आवश्‍यक है।
उन्‍होंने स्‍कूलों से स्थिति सामान्‍य होने पर विद्यार्थियों के लिए सामुदायिक सेवा को अनिवार्य बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा है कि युवाओं को कम आयु से ही सेवा भाव के लिए प्रेरित करना अत्‍यंत आवश्‍यक है। उन्‍होंने स्‍कूलों से स्थिति सामान्‍य होने पर विद्यार्थियों के लिए सामुदायिक सेवा को अनिवार्य बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्‍येक भारतीय के रक्‍त में धर्मनिरपेक्षता है और पूरे विश्‍व में अपनी संस्‍कृति और विरासत के लिए देश का सम्‍मान किया जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने भारतीय मूल्‍य प्रणाली को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
युवाओं से भारतीय सांस्‍कृतिक मूल्‍यों को अपनाने, संरक्षित तथा प्रोत्‍साहित करने का आग्रह करते हुए उन्‍होंने दूसरों के साथ साझा करने और एक दूसरे की देखभाल करने के भारत के दर्शन के महत्‍व पर प्रकाश डाला।
उन्‍होंने कहा कि दूसरों के लिए जीने से व्‍यक्ति को न केवल संतोष मिलता है, बल्कि व्‍यक्ति के नेक कार्यों के लिए लोग उसे लंबे समय तक याद रखते हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि युवाओं और स्कूल विद्यार्थियों के लिए सामुदायिक सेवा अनिवार्य करना जरूरी है तथा सेवा भाव हर भारतीय की बुनियादी विरासत में से एक है, इसके लिए बच्चों को कम आयु से ही प्रेरित करना ज़रूरी है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

चलो अब मुखर हो जाएँ

September 17, 2022

“चलो अब मुखर हो जाएँ” ये कैसे समाज में जी रहे है हम जब भी सोचते है हमारे आस-पास हो

कविता-भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन लाना हैं

September 17, 2022

कविता-भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन लाना हैं सरकारों को ऐसी नीतियां बनाना हैं भ्रष्टाचार को रोककर सुशासन को आखरी छोर तक

शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) का 22 वां शिखर सम्मेलन 15-16 सितंबर 2022 पर विशेष

September 17, 2022

शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) का 22 वां शिखर सम्मेलन 15-16 सितंबर 2022 पर विशेष मज़बूत भारत की बुलंद तस्वीर वैश्विक

राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 2022 पर विशेष

September 13, 2022

राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 2022 पर विशेष Pic credit -freepik.com आओ हिंदी भाषा को व्यापक संचार का माध्यम बनाएं

हिंदी के मुकाबले अंग्रेजी बोलते समय इतनी पॉलिश क्यों दिखाई देती है?

September 13, 2022

हिंदी के मुकाबले अंग्रेजी बोलते समय इतनी पॉलिश क्यों दिखाई देती है? Pic credit -freepik.com भारत ने स्थानीय भाषाओं में

मनुष्य में अनमोल गुणों का भंडार

September 13, 2022

मनुष्य में अनमोल गुणों का भंडार चुप रहना और माफ करना दो अनमोल हीरे – चुप रहने से बड़ा कोई

Leave a Comment