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सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सटीक वैचारिक क्रांति लाना होगा!!!

सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सटीक वैचारिक क्रांति लाना होगा!!! युवाओं को हिंसा प्रवृत्ति,नशीले पदार्थों की लत जैसी विभिन्न सामाजिक बुराइयों …


सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सटीक वैचारिक क्रांति लाना होगा!!!

सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध सटीक वैचारिक क्रांति लाना होगा!!!
युवाओं को हिंसा प्रवृत्ति,नशीले पदार्थों की लत जैसी विभिन्न सामाजिक बुराइयों को रोकने शिक्षित करने बुद्धिजीवियों, मशहूर हस्तियों को आगे आने की ज़रूरत

हिंसा उत्पीड़न और नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ़ कानूनों के समानांतर युवाओं के वैचारिक परिवर्तन के कारगर उपायों पर रणनीतिक रोडमैप बनाना ज़रूरी-एड किशन भावनानी

गोंदिया- भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं, और भारत की जनसंख्या विश्व में दूसरे नंबर पर आतीहै और विशेषज्ञोंका अनुमान है कि 2050 तक भारत वैश्विक जनसंख्या के रिकॉर्ड तोड़ विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश होगा, साथियों, हम आई रिपोर्टों की माने तो 135 करोड़ जनसंख्या में 65 प्रतिशत युवा हैं, याने आज की स्थिति में भारत एक युवा राष्ट्र है।युवाओं की शक्ति भारत में सर्वाधिक उपलब्ध है जिसका संपूर्ण उपयोग कौछलता विकास कर विशाल कार्यबल को कार्यान्वित कर ले, तो भारत विश्व का अग्रणी देश और वही पुरानी सोनेकी चिड़िया का अपना रुतबा वापस ले सकता है!!! और मुझे पूरा विश्वास है वह दिन ज़रूर आएगा क्योंकि आकांक्षाएं, जिज्ञासा, एवं स्वप्न पालने, देखने से ही पूरे होने की संभावना रहती है!!जिसका जीता जागता उदाहरण हमने देखे कि कैसे 65 साल पुरानी टाटा की कंपनी एयर इंडिया उन्हें सर्वाधिक बिड लगाने से वापस उनकी झोली में आई और फिर एयर इंडिया के मालिक बन गए!! ठीक उसी प्रकार हमको युवाओं को और आगे बढ़ाने,उनका कौछल विकास पर ध्यान पूरी ताकत से लगाने और युवाओं में एक नया प्रचलन हिंसा प्रवृत्ति, लैंगिक उत्पीड़न, नशीले कार्यों की लत जैसी विभिन्न सामाजिक बुराइयों को लेकर बढ़ते ट्रेंड को रोकना होगा, क्योंकि जिस तेज़ी से यह सामाजिक बुराइयां युवाओं में बढ़ रही है उसी तेज़ी से भारत की विकास की गति डैमेज होगी, हमारा कार्यबल का स्तर घसरते जाएगा!!इसलिए हमें तात्कालिक प्राथमिकता से युवाओंको उपरोक्त सामाजिक बुराइयों के खिलाफ शिक्षित करने एक रणनीतिक रोडमैप बनाना होगा जिसमें शासन,प्रशासन सहित सामाजिक संस्थाओं,बुद्धिजीवियों,मशहूर हस्तियों को आगे आना होगा क्योंकि शासन द्वारा कानून बनाना, प्रशासन द्वारा उसका क्रियान्वयन करना और अदालतों द्वारा सजा देने तक कार्य सीमित नहीं रहना चाहिए।अब समय आ गया है कि सभी को तालमेल से अपनी अपनी जवाबदारी और कर्तव्यों को निभाते हुए एक जनजागरण अभियान, कार्यशालाएं और वेबनार आयोजित करने होंगे ताकि युवाओं को इस सामाजिक बुराइयों के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा सके।उनके जीवन, परिवार तथा उन्नति पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव का आईना उनके सामने दिखाया जा सके जिससे उन्हें इसका आभास हो और समय रहते अपने को परिवार और देश को भी इसमें होने वाली हानियों को बचाया जा सके। साथियों बात अगर हम उपरोक्त तरह की सामाजिक बुराइयों की करेंतो इसमें समाज का महत्वपूर्ण उत्तरदाईत्व, कर्तव्य निभाने का समय आ गया है। इन बुराइयों से ग्रस्त व्यक्ति समाज में बहुत कम संख्या में होते हैं,उनके कारण समाज दूषित होता है जैसे बड़े बुजुर्गों ने कहा है एक खराब आम घड़े में रखें पूरे अच्छे आमों को भी खराब करते हैं, उसी तर्ज पर हमें एक खराब आम रूपी व्यक्ति को घड़े रूपी समाज से बाहर कर उसे सीख देनी होगी, जिससे अन्य युवाओं को भी सीख मिलेगी…. साथियों बात अगर पूरी शिद्दत से भारत की सभी संस्थाएं इन सामाजिक बुराइयों को हराने के लिए कमर कस ने की करें, तो मजाल नहीं कि, यह सामाजिक बुराइयां भारत में मुंह उठा सकें।साथियों बात अगर हम इस तरह की घटनाओं में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की करें तो आज जरूरत है ऐसी घटना आगे ना हो इस पर सकारात्मक मंथन करने की ना कि सामाजिक माहौल बिगाड़ने, टांग खींच करने आरोप प्रत्यारोप करने की बजाय जरूरत है समाधान की!! जिसको सभी को मिलकर तालमेल से प्राप्त करना है। साथियों बात अगर हम वर्तमान डिजिटल युग में मोबाइल फोन और विभिन्न अश्लील और हिंसक प्रवृत्ति, लैंगिक उत्पीड़न और नशाखोरी को बल प्रदान करने वाली अवैध इलेक्ट्रॉनिक साइटों की करें तो इस पर भी शासन- प्रशासन को तात्कालिक संज्ञान लेने की जरूरत है क्योंकि इन सामाजिक बुराइयों को इन साइटों से भी भारी प्रोत्साहन मिलता है, और हमारे युवा साथियों को इन डिजिटल उपकरणों की लत से भी बचना चाहिए क्योंकि उपरोक्त सामाजिक बुराइयों को बढ़ाने में ऐसी डिजिटल लत का भी सहयोग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता साथियों बात अगर हम पीआईबी के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति की एक कार्यक्रम के दौरान बातचीत की करें तो उन्होंने भी,, विभिन्न क्षेत्रों में मशहूर हस्तियों से युवाओं को लैंगिक उत्पीड़न और नशीले पदार्थों की लत जैसी विभिन्न सामाजिक बुराइयों को लेकर शिक्षित करने के बारे में नेतृत्व करनेका आग्रह किया।उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवाओं को जलवायु परिवर्तन के विपरीत प्रभावों और प्रकृति व जल निकायों की रक्षा करने की जरूरत के बारे में भी बताया जाना चाहिए।पर्वतारोही के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि बच्चों और युवा वयस्कों को डिजिटल उपकरणों के लगातार उपयोग व इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा,यह रचनात्मकता और मौलिक सोच को खत्म कर देगा।आज मोबाइल फोन जैसे डिजिटल उपकरणों की लत से बचने की आवश्‍यकता के बारे में युवाओं के बीच जागरूकता पैदा करने का आह्वाहन किया।अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि युवाओं को हिंसा प्रवृत्ति, लैंगिक उत्पीड़न, नशीले पदार्थों की लत जैसी विभिन्न सामाजिक बुराइयों को लेकर शिक्षित करने बुद्धिजीवियों, मशहूर हस्तियों को आगे आने की जरूरत है तथा उनका उत्पीड़न और नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ कानूनों के समानांतर युवाओं के वैचारिक परिवर्तन के कारगर उपायों पर रणनीतिक रोडमैप बनाना समय की प्राथमिक तात्कालिक मांग है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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