Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव

 सहनशीलता कैसा जमाना आ गया है ज्यों ज्यों शिक्षा का स्तर बढ़ रहा हैहम विकास की ओर बढ़ रहे हैं,हमारी …


 सहनशीलता

सहनशीलता- सुधीर श्रीवास्तव

कैसा जमाना आ गया है

ज्यों ज्यों शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है
हम विकास की ओर बढ़ रहे हैं,
हमारी सहनशीलता दम तोड़ रही है

हमारी उन्नति की
ये कैसी कहानी कह रही है?

आज हम संभ्रांत हो गये हैं
सहनशीलता को बड़े शान से
अपने से दूर रख रहे हैं।
असभ्यता, उदंडता की नई
तहरीर लिख रहे हैं

तनिक सहनशक्ति के अभाव में
जोश में मदहोश होकर

मारपीट, हिंसा ही नहीं
हत्या और कत्लेआम तक कर रहे हैं,
जिसकी भारी कीमत भी
हम ही चुका रहे हैं।

हमसे लाख अच्छे तो हमारे पुरखे थे
हमारी नजरों में भले गँवार देहाती थे
पर सहनशीलता में
हमसे कोसों आगे थे,
कम से कम आपा तो नहीं खोते थे,
विचार करके ही आगे बढ़ते थे।

बड़े बड़े विवाद सहनशक्ति के दम पर
बैठे बैठे सुलझा देते थे
आपस में प्रेम भाव के साथ रहते थे।
अपने हों या पराये
बड़े बुजुर्गों से नजरें नहीं मिलाते थे,
उनका मान सम्मान करते थे

परिवार, खानदान की गरिमा का
पूरा ख्याल रखते थे,
सहनशीलता का साफा सदा
सिर पर बाँधकर रखते थे।

● सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

जीवन है तो जिए जाना- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 13, 2022

जीवन है तो जिए जाना बहुत तकलीफ़ देता है अपने किसी करीबी काइस दुनिया से असमय चले जाना, किसी हंसते

मान हैं मुझे तुम पर-जयश्री बिरमी

January 13, 2022

मान हैं मुझे तुम पर आन भी हैं तू मान भी हैं तूहिंदी तू हिंदुस्तान की जान हैं तूतेरी मीठे

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है?-जितेन्द्र ‘कबीर’

January 13, 2022

उनके संज्ञान में क्यों नहीं है? हर बार सामने आती हैंजांच एजेंसियों कीदेरी और लापरवाही की खबरेंबलात्कार,हत्या जैसे संगीन मामलों

परछाईं- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

परछाईं वक्त कितना भी बदल जायेहम कितने भी आधुनिक हो जायें, कितने भी गरीब या अमीर होंराजा या रंक हों

आज की द्रौपदी- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

आज की द्रौपदी एक तो द्रौपदी थी तबअनेक है आज भीक्यों बचा न पाए आज के कृष्णजब बिलखती हैं वहआज

हिन्दी बेचारी- डॉ. इन्दु कुमारी

January 13, 2022

हिन्दी बेचारी राष्ट्र है मेरे अपने घरभारती हूँ मैं कहलाती जनमानस की हूँ सदासरल अभिव्यक्ति मैं राजदुलारी जन सभा कीअवहेलना

Leave a Comment