Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

सर्दी का मौसम-डॉ. माध्वी बोरसे

सर्दी का मौसम! दिसंबर के महीने से पड़ती, सबसे ठंडी रितु सर्दी,जैकेट, ऊनी कपड़े पहनते सब,ओले, तेज हवा और पड़ती …


सर्दी का मौसम!

सर्दी का मौसम-डॉ. माध्वी बोरसे
दिसंबर के महीने से पड़ती,

सबसे ठंडी रितु सर्दी,
जैकेट, ऊनी कपड़े पहनते सब,
ओले, तेज हवा और पड़ती है बर्फ!

सूर्य की गर्मी, लेने के लिए सब पिकनिक पर जाते,
रात को बोन फायर का आनंद उठाते,
गरम कॉफी, चाय, सूप का सेवन करते,
सर्दी में, पहाड़ी क्षेत्र, बहुत ही सुंदर दिखते!

अलग-अलग रंग के फल फूल खिलते,
सभी क्रिसमस और न्यू ईयर पर, सब से गले मिलते,
लोहड़ी और सकरात, सब मिलकर मनाते,
लंबी यात्रा एवं पर्यटन पर जाते!

लंबी रातें और छोटे दिन,
बर्फीले शहर में स्नो फाइटिंग,
आइस स्केटिंग और आइस-बाइकिंग,
कभी एक्सरसाइज तो कभी ट्रैकिंग!

चलो हम सभी मिलकर सर्दी का लुफ्त उठाएं,
सुंदर सी वादियों में, हम भी घूम आए,
जाने इस ऋतु की और विशेषताएं,
प्रकृति की सुंदरता में, हम भी ढल जाए!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं- जितेन्द्र ‘कबीर

December 22, 2021

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं साक्षात् भगवान का रूप मानतेहैं उसे,कुछ ही हैं लेकिन ऐसे,ज्यादातर ‘डाक्टर’ अंधे हुए पड़े हैंदवाई

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

चिंतन के क्षण- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

चिंतन के क्षण रोम रोम में बसी है यादें,बचा नहीं कुछ अपना है,तेरे मेरे अपने सारे सपने,बिखर गए सारे के

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 22, 2021

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी आजकल लोगों कोघर का काम करने के लिएईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,जमीन का

रूठे यार को मनाऊं कैसे-अंकुर सिंह

December 21, 2021

रूठे यार को मनाऊं कैसे रूठे को मैं कैसे मनाऊं, होती जिनसे बात नहीं,यादों में मैं उनके तड़पूउनको मेरा ख्याल

Leave a Comment