Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Priyanka_saurabh

सबके पास उजाले हो| sabke pas ujale ho

सबके पास उजाले हो मानवता का संदेश फैलाते,मस्जिद और शिवाले हो ।नीर प्रेम का भरा हो सब में,ऐसे सब के …


सबके पास उजाले हो

मानवता का संदेश फैलाते,
मस्जिद और शिवाले हो ।
नीर प्रेम का भरा हो सब में,
ऐसे सब के प्याले हो ।।

होली जैसे रंग हो बिखरे,
दीपों की बारात सजी हो,
अंधियारे का नाम ना हो,
सबके पास उजाले हो ।।

हो श्रद्धा और विश्वास सभी में,
नैतिक मूल्य पाले हो ।
संस्कृति का करे सब पूजन,
संस्कारों के रखवाले हो ।।

चौराहें न लुटे अस्मत,
दु:शासन न फिर बढ़ पाए,
भूख, गरीबी, आतंक मिटे,
न देश में धंधे काले हो ।।

सच्चाई को मिले आजादी,
लगे झूठ पर ताले हो ।
तन को कपड़ा, सिर को साया,
सबके पास निवाले हो ।।

दर्द किसी को छू न पाए,
न किसी आंख से आंसू आए,
झोंपडिय़ों के आंगन में भी,
खुशियों की फैली डाले हो ।।

‘जिए और जीने दे’ सब
न चलते बरछी भाले हो ।
हर दिल में हो भाईचारा
नाग न पलते काले हो ।।

नगमों-सा हो जाए जीवन,
फूलों से भर जाए आंगन,
सुख ही सुख मिले सभी को,
एक दूजे को संभाले हो ।।

(प्रियंका सौरभ के काव्य संग्रह ‘दीमक लगे गुलाब’ से।)

About author 

प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

facebook – https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/

twitter- https://twitter.com/pari_saurabh



Related Posts

वजह-बेवजह रूठना

August 25, 2022

वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के

कविता -शहर

August 22, 2022

शहर गांवों के सपने  संभाल लेता है शहर  हो जाओ दूर कितना भी पास बुला लेता है शहर । गांवों

कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ?

August 22, 2022

कमी कानून में है या गलतियां कपड़ों में ? आपने पहले भी स्त्रियों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न तथा

कमीशन का खेल: दवा कंपनी और डॉक्टरों के बीच की सांठगांठ

August 22, 2022

कमीशन का खेल: दवा कंपनी और डॉक्टरों के बीच की सांठगांठ दवा के फुटकर-थोक विक्रेता, डॉक्टरों और कंपनियों का ऐसा

बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा

August 22, 2022

बेरोजगारी में नंबर वन हरियाणा: युवाओं के साथ खेलती सरकार, क्यों नहीं हो रही भर्तियां? अगर सरकार की मंशा ही

कविता -बुजुर्ग

August 21, 2022

बुजुर्ग घर का मानबुजुर्गों का सम्मानजीवन ज्ञान।। दादा की यादउनका आशीर्वादहम आबाद।। दादी सुकूनघर की शान रहीदुर्भाव नहीं।। है मात-पिताहमारे

PreviousNext

Leave a Comment