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Jitendra_Kabir, poem

सफेद आसमां- जितेन्द्र ‘कबीर’

सफेद आसमां कड़ाके की सर्दी मेंरजाई का मोह छोड़ पाओ अगरतो निकलो बाहर जराआंगन चौबारे तक, देखो ऊपर!आसमान बरसा रहा …


सफेद आसमां

सफेद आसमां- जितेन्द्र 'कबीर'
कड़ाके की सर्दी में
रजाई का मोह छोड़ पाओ अगर
तो निकलो बाहर जरा
आंगन चौबारे तक,

देखो ऊपर!
आसमान बरसा रहा है
रुई से झक सफेद बर्फ के फाहे,
दोनों बाहें फैलाकर
अपने अंदर बसा लो इस
अलौकिक दृश्य को,

निहारते जाओगे आसमान को
तो महसूस करोगे खुद को
धरती से आसमान की ओर
जाते हुए,
अपनी लघुता एवं क्षुद्रता को
नीचे धरती पर छोड़
ब्रह्माण्ड की लीला में
परम आनंद की अनुभूति
पाते हुए।

जितेन्द्र ‘कबीर’ 
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश 176314
संपर्क सूत्र – 7018558314


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