Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

सफर – अनीता शर्मा

 सफर जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर….. डगर मुश्किल भरी है। सफर तो चुनौतियों भरा है मगर…… बढ़ते जाना बाधाओं …


 सफर

सफर - अनीता शर्मा

जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर…..

डगर मुश्किल भरी है।

सफर तो चुनौतियों भरा है मगर……

बढ़ते जाना बाधाओं से टकराकर।

मंजिल की राह का सफर

कब आसान होता है ?

एक और उम्मीद भर देती है……..चाह

भर देती है नयी उमंग से।

जीवन बढ़ता जाता है अपने नये नये सफर पर।

जीवन चलायमान है अपने अंतिम पड़ाव की ओर।

—–अनिता शर्मा
 सुधा नर्सिग होम झाँसी
—–मौलिक रचना


Related Posts

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

रक्त की बूँद!!!!

June 23, 2022

 रक्त की बूँद!!!! अनिता शर्मा रक्त की हर बूंद कीमती,रक्तदान जरूरी है।कीमती हर जान रक्त से,रक्त दान जरूरी है। समय-समय

“श्रृंगार रस”

June 22, 2022

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

PreviousNext

Leave a Comment