Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

सनातन धर्म और प्रकृति- जयश्री बिरमी

 सनातन धर्म और प्रकृति अगर हम कोई तेहवार मना रहें हैं तो पक्की बात हैं कि हम प्रकृति के साथ …


 सनातन धर्म और प्रकृति

सनातन धर्म और प्रकृति
अगर हम कोई तेहवार मना रहें हैं तो पक्की बात हैं कि हम प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ कोई पर्व ही मना रहे हैं।हम सार्वत्रिक रूप से कुदरत से जुड़े हुए हैं। आंग्ल तारीखों के पहले ही महीने में आने वाला ये पर्व हैं और वह हैं लोहड़ी और संक्रांत। लोहड़ी और संक्रांत  को देखें तो थैंक्सगिविंग जैसा हैं। अाजके दिन सूर्यनायरायण की पूजा कर उन्हे धन्यवाद दिया जाता हैं।आज के दिन सूर्यनारायण अपने दक्षिणायन पथ से धीरे धीरे उत्तरायण पथ की और आते हैं और ऋतु को बदलते हैं।दक्षिण से सूर्यनारायण की जो कोमल किरने हैं वह उत्तर की और आते आते तीव्र हो जाने से ग्रीष्म ऋतु आती हैं।

 आज के दिन गायों को चारा डाला जाता हैं,गरीबों को भी दान दिया जाता हैं और सब से ज्यादा महत्व गुप्त दान का रहता हैं।किसी भी धर्म के पर्व कुदरत के साथ कोई खास मेल नहीं रखते,जैसे क्रिसमस में तो बर्फ से ढकी उनकी दुनियां में क्रिसमस ट्री सजाया जाता हैं ,ये उत्सव मनाते जरूर हैं किंतु  कुदरत के कोई भी करिश्मा नहीं हैं उसमे।हमारी फसलें भी कटती हैं और जो नई फसल के स्वागत में लोहड़ी जला कर उसमे  भून के खाया जाता हैं वह धन जो अभी अभी पका हैं।दूसरे उस फसल को प्राप्त करने की भी खुशी मनाके उसका स्वागत भी किया जाता हैं।गौ माता जिसे कामधेनु कहा जाता हैं उसकी भी पूजा कर तिल गुड़ खिलाया जाता हैं।सीजन के फल,अमरूद,गन्ना बेर आदि का भी लुफ्त उठाया जाता हैं।और मौसम के अनुरूप गुड,तिल,मुहफली आदि से बनी गजक,चिक्की आदि भी खाया जाता हैं।गुजरात में तो सर्दियों में मिलती सभी सब्जियां को एक साथ मिलके उंधयूं बनाया जाता हैं जो अत्यंत ही स्वादिष्ट होता हैं,साथ में पूड़ी ,जलेबी भी खाई जाती हैं।

पवन देव को कैसे भूले? पतंगे ले कर छत पर जा के खूब पतंग बाजी शुरू हो जाती हैं। पतंगबाजी  की तैयारी तो दो दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं।खरीद ने के बाद किन्या ( पतंग को डोर से जोड़ने के लिए एक मजबूत सूत्र) बांध के पतंगों को तैयार करके रख लेते हैं।और कोई तो धागे की चरखी को पकड़ता हैं तो कोई पतंग को आसमान पर चढ़ता हैं।और इस पतंगबाजी में पेच लड़ाने का मजा ही अलग होता हैं।किसी की भी पतंग काटने से ” काइपो छे” की  चिल्काहट की आवाजें गूंजती हैं।वैसे गुजरात में तो बासी उतरायण भी मानते हैं और ये दोनों दिनकी कार्यालय में और समाचार पत्रों की भी छुट्टी होती हैं।

     सर्दियों के दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं जो २५ दिसंबर से दिन बड़ा होना शुरू हो जाता हैं लेकिन उत्तरायण में सूर्य के आने से दिन और रात धीरे धीरे सही अनुपात में आ जाते हैं।

सब से बड़ी यह हैं कि ये दिन अपने देश के सभी राज्यों में अलग अलग नाम से भी मनाया जाता हैं लेकिन महत्व सभी राज्यों में समान ही हैं।पंजाब में तो अगला दिन लोहड़ी और फिर दूसरा दिन संक्रांति का मनाते हैं,गुजरात और महाराष्ट्र में आमतौर पे एक सा महत्व हैं, हां महाराष्ट्र में जल्दी कुमकुम का आयोजन कर महिलाएं सुहाग के लिए कामनाएं करती हैं।दक्षिण भारत में मकर विल्लाकू और पोंगल मनाते हैं और पूर्व भारत में बिहू मनाया जाता हैं और कश्मीर और जम्मू में मकर संक्रांति मानते हैं।एक सोचने वाली बात ये हैं कि अपने सभी त्यौहार सदियों से मनाए जाते हैं और पूरे देश में ही मनाएं जाते हैं,लेकिन उनका व्याप कैसे हुआ? किसे एक से त्यौहारों को इतने बड़े इलाके में प्रचार ,प्रसार हुआ होगा? या कोई ऐसा दूरसंचार का माध्यम होगा ?उसका जवाब शायद हमे नहीं मिले लेकिन ये सभी त्यौहारों का महत्व प्रकृति से जुड़ा हुआ हैं ये बात सच हैं।

 वैसे ही दीपावली,होली और कई व्रत उत्सव पूरे देश में एक ही दिन मनाएं जाते हैं।

” Ours is a nation where nature has been revered and worshiped”

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

Super quick for special vs slow for common

August 10, 2023

 24 घंटे बनाम 72 घंटे ख़ास के लिए जबरदस्त फुर्ती बनाम आम के लिए सुस्ती   सुनिए जी ! आगे से

आम आदमी की आह – दर्द-ए-टमाटर

August 10, 2023

आम आदमी की आह – दर्द-ए-टमाटर टमाटर की महंगाई – राजभवन में टमाटर के इस्तेमाल पर राज्यपाल ने रोक लगाई

सिंधी सेवादारी मंडल के प्रणेता को सैल्यूट – 21वीं पुण्यतिथि

August 10, 2023

चिट्ठी न कोई संदेश ना जाने कौनसा देश जहां तुम चले गए सिंधी सेवादारी मंडल के प्रणेता को सैल्यूट –

अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव 2024 – रेस में भारतीय मूल के तीन दावेदार

July 31, 2023

भारतीय मूल की तैयारी – ब्रिटेन के बाद अमेरिका की बारी – राष्ट्रपति का ताज़ पहनने की बेकरारी अमेरिका राष्ट्रपति

मेरी माटी-मेरा देश, मन की बात या उपदेश

July 31, 2023

मेरी माटी-मेरा देश, मन की बात या उपदेश मेरी माटी-मेरा देश, मन की बात या उपदेश सोचिये क्या हमारे देश

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ

July 31, 2023

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ –   राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ 29-30 जुलाई 2023 दो दिवसीय

PreviousNext

Leave a Comment