Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

संवेदना- डॉ इंदु कुमारी

संवेदना मानव हम कहलाते हैं क्या हमने अंतस् मेंकभी झांककर देखा हैस्वार्थ में सदा जीते रहेपर पीड़ा कभी देखा हैअगर …


संवेदना

संवेदना- डॉ इंदु कुमारी
मानव हम कहलाते हैं

क्या हमने अंतस् में
कभी झांककर देखा है
स्वार्थ में सदा जीते रहे
पर पीड़ा कभी देखा है
अगर नहीं कैसा मानव
इस हक को खोया है

माँ बाप को जो थी पूँजी
वो बच्चों पर लुटाया है
दोनों जब बन गए बच्चे
सड़कों की राह दिखाया
दहेज खातिर घर बैठी

बेबसी के आँसूओं को
बहन बेटी को घूट- घूट
के पीते हमने देखा है
अगर नहीं ,कैसा मानव
संवेदनविहीन काया है

निज स्वारथ व्यर्थता में
मनुज तन गँवाया है
बगैर संवेदनशीलता के
मृत आत्मा कहलाया है।
अगर नहीं कैसा मानव
इस हक को भी खोया है।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

May 24, 2022

 “हर चेहरा कुछ कहता है” हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की

परम शक्ति!

May 17, 2022

परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने वाला वह,वही चला

सुरम्य एवं सहज जीवन!

May 17, 2022

सुरम्य एवं सहज जीवन! गुरुर में रास्ते धुंधले पड़ जाएंगे,खुद के अलावा किसी को कैसे देख पाएंगे,प्रेम और जुनून के

मार्मिक कविता – कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक़

May 17, 2022

मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से आंखें सभकी भर आई वो

धूप छांव

May 15, 2022

धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

May 14, 2022

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर

PreviousNext

Leave a Comment