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संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030 दुनिया के सभी लोगों के लिए 2030 तक एक बेहतर और अधिक टिकाऊ भविष्य …


संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030
दुनिया के सभी लोगों के लिए 2030 तक एक बेहतर और अधिक टिकाऊ भविष्य प्राप्त करने का खाका

कोविड-19 और यूक्रेन-रूस महायुद्ध से बढ़ती तीसरे विश्वयुद्ध की संभावना को यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 पर प्रभाव को रेखांकित करना ज़रूरी – एड किशन भावनानी

गोंदिया – संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय पूर्ण बैठक में भारत सहित 193 देशों ने सितंबर 2015 में संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030 को स्वीकार किया गया और 1 जनवरी 2016 से इन लक्ष्यों को लागू किया गया इसमें विशेष रूप से 17 लक्षों तथा विकास के 3 पहलू अर्थात सामाजिक समावेश आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को व्यापक रूप से समाहित करना है।
साथियों बात अगर हम यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 में गतिरोध की करें तो पिछले 2 वर्षों से कोविड-19, प्राकृतिक आपदाओं और वर्तमान में जारी यूक्रेन-रूस महायुद्ध से बढ़ती तीसरे विश्वयुद्ध की संभावनाओं से न सिर्फ आर्थिक विकास बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेश में भी विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना से मुकाबला करना पड़ सकता है क्योंकि उपरोक्त तीनों प्रतिरोधों से संपूर्ण वैश्विक स्तरपर अर्थव्यवस्था अस्त-व्यस्त, बेरोजगारी बढ़ना, सामाजिक असंतोष उठने की संभावना का अंदेशा होने से हर देश की सरकारें इन प्रतिरोधों की गैप भरने में जुट गई है तो यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 पर आंशिक असर पड़ना स्वाभाविक है। इसलिए सभी सदस्य देशों द्वारा इसे रेखांकित करते हुए अपनी योजनाओं, रणनीतियों के वर्तमान परिस्थितियों के अनुकूल अपडेट करने की रणनीति रोडमैप बनाने की तात्कालिक जरूरत है ताकि महासभा द्वारा रेखांकित 17 लक्ष्यों को अपने डेडलाइन पर सफलता से पूर्ण करने में सक्षम हो सकें।
साथियों बात अगर हम गतिरोध से निपटने की करें तो वैश्विक स्तर पर कोविड-19 पर सभी देशों ने मिलकर लड़ाई लड़ी और सफलता के अंजाम की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं जो सफलता के संकेत हैं परंतु यूक्रेन-रूस महायुद्ध के बढ़ते चरणों और दिनों से स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। 23 मार्च 2022 को नाटो द्वारा यूक्रेन को परमाणु अटैक विरोधी हथियार देने के बयान, रूस द्वारा गैस की बिक्री अब डालर की अपेक्षा रूबल में करने के लिए 7 दिन का समय देने, नाटो द्वारा रूस पर वैश्विक प्रतिबंधों का विस्तार करने जैसे अहम मुद्दों से केवल रूस पर ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तरपर इसका विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता जिसका अप्रत्यक्ष रूप से यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

साथियों बात अगर हम यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 के लक्ष्यों की करें तो इसमें मुख्य से 17 लक्ष्यो को रेखांकित किया गया है जो निम्न हैं – (1) गरीबी नहीं , (2) शून्य भूख , (3) अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण , (4) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा , (5) लैंगिक समानता , (6) स्वच्छ पानी और स्वच्छता , (7) सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा , (8) सभ्य कार्य और आर्थिक विकास , (9) उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा , (10) असमानता में कमी , (11) सतत शहर और समुदाय , (12) जिम्मेदार खपत और उत्पादन , (13) जलवायु कार्रवाई , (14) पानी के नीचे जीवन , (15) भूमि पर जीवन , (16)शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं , (17) लक्ष्यों के लिए भागीदारी । सतत विकास को प्राप्त करने के लिए, तीन क्षेत्रों को एक साथ आने की आवश्यकता है, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय क्षेत्र सभी गंभीर रूप से महत्वपूर्ण और अन्योन्याश्रित हैं। प्रगति के लिए तीनों क्षेत्रों में बहु-विषयक और अंतर अनुशासनात्मक अनुसंधान की आवश्यकता होगी। यह तब मुश्किल साबित होता है जब प्रमुख सरकारें इसका समर्थन करने में विफल रहती हैं।
साथियों बात अगर हम यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 में भारत की करें तो, हम पृथ्वी को माता मानते है और सतत विकास सदैव हमारेदर्शन और विचारधारा का मूल सिद्धांत रहा है। सततः विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनेक मोर्चों पर कार्य करते हुए हमें महात्मा गांधी की याद आती है, जिन्होंने हमें चेतावनी दी थी कि धरती प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं को तो पूरा कर सकती है, पर प्रत्येक व्यक्ति के लालच को नहीं। भारत लंबे अरसे से सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है और इसके मूलभूत सिद्धांतों को अपनी विभिन्न विकास नीतियों में शामिल करता आ रहा है। हाल के विश्वव्यापी कोविड-19 महामारी, आर्थिक संकटके बावजूद विकास की अच्छी दर बनाए रखने में हम सफल रहे हैं।
भारत के विकास संबंधी अनेक लक्ष्यों को सतत विकास लक्ष्यों में शामिल किया गया है। हमारी सरकार द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे अनेक कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप हैं, जिनमें मेक इन इंडिया,स्वच्छ भारत अभियान बेटी बचाओ-बेटी पढाओ, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, पीएम आवास योजना ग्रामीण और शहरी दोनों, पीएम ग्राम सड़क योजना, डिजिटल इंडिया, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, स्किल इंडिया और पीएम कृषि सिंचाई योजना सहित अनेक योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा अधिक बजट आवंटनों से बुनियादी सुविधाओं के विकास और गरीबी समाप्त करने से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
साथियों बात अगर हम यूएन में स्थाई सदस्य की करें तो उन्होंने भी गत वर्ष कह था कि लक्ष्यों को टुकड़ों में बांटना और उप राष्ट्रीय तथा स्थानीय स्तरोंपर कार्यान्वयन ही एकमात्र तरीका है जिससे एसडीजी लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्थानीयकरण से प्रांतीय तथा स्थानीय स्तरों पर सरकार को सशक्त बनाकर स्थानीय चुनौतियों का स्थानीय समाधान तलाशने में भी मदद मिलती है। एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। स्थानीयकरण के लिए सभी परिस्थितियों के लिहाज से कोई एक बात उचित नहीं है, बल्कि हम अनुभव साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे से सीख सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी से कार्रवाई के दशक को बाधित करने का खतरा है। उन्होंने कहा, हमें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी देश खासतौर से कमजोर देश 2030 एसडीजी एजेंडा हासिल करने के अपने लक्ष्य पर कायम रह सकें।तथ्यों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहयोग लिया गया है।
साथियों बात अगर हम माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा दिनांक 23 मार्च 2022 को एक कार्यक्रम में संबोधन की करें तो उन्होंने भी, 17 लक्ष्यों वाले सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र एजेंडा-2030 की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 2021 में सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में भारत का स्थान 120वां था। उन्होंने विभिन्न सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में गरीबी तथा निरक्षरता जैसी चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता पर बल देते हुए सिविल सोसाइटी तथा शैक्षणिक संस्थाओं सहित सभी हितधारकों से संयुक्त प्रयास करने को कहा है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030, दुनिया के सभी लोगों के लिए 2030 तक एक बेहतर और अधिक टिकाऊ भविष्य प्राप्त करने का खाका है। कोविड-19 और यूक्रेन-रूस महायुद्ध से बढ़ती तीसरे विश्वयुद्ध की संभावना को यूएन सतत विकास लक्ष्य 2030 पर प्रभाव को रेखांकित करना तात्कालिक ज़रूरी हैं।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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