Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

संयुक्त परिवार में जिंदगी जीने का अनमोल लुत्फ़-किशन सनमुखदास भावनानी

संयुक्त परिवार में जिंदगी जीने का अनमोल लुत्फ़!!! विश्व प्रसिद्ध सदियों पुरानीं भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था के मूल्यों को बनाए …


संयुक्त परिवार में जिंदगी जीने का अनमोल लुत्फ़!!!

संयुक्त परिवार में जिंदगी जीने का अनमोल लुत्फ़-किशन सनमुखदास भावनानी

विश्व प्रसिद्ध सदियों पुरानीं भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था के मूल्यों को बनाए रखने की ज़वाबदारी युवाओं द्वारा उठाना ज़रूरी
संयुक्त परिवार एक खुशियों से महकता हुआ बाग है – युवाओं को इस बाग का माली बनने की ज़रूरत – एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक रूप से भारत अनेक क्षेत्रों में अनेक उपलब्धियों का एक गढ़ रहा है, जिसके मूल्यों का कद्र वैश्विक रूप से बहुत अधिक है। अनेक देशों के सैलानी भारत सिर्फ यह अनमोल क्षण महसूस करने और देखने आते हैं। इन खूबसूरत उपलब्धियों में से एक भारत में सदियों पुरानी संयुक्त परिवार व्यवस्था और प्रथा को देखकर बड़े-बड़े देश हैरान रह जाते हैं!!! साथियों संयुक्त परिवार तथा भारत में सदियों से है। पहले हर परिवार इसी व्यवस्था में ऐसे ही चलता था, परंतु समय का चक्र चलता गया और स्वस्थ, हरे भरे परिवार टूटते चले गए और आज पाश्चात्य संस्कृति के जकड़न ने युवाओं को अपने रंग में रंगने का बीड़ा उठा रखा है!!! परंतु उसके बावजूद आज भी भारत में लाखों परिवार हैं जो सदियों पुरानी इस प्रथा और व्यवस्था को बनाए रखने में कामयाब हुए हैं! अनेक परिवार तो आज 50 से 100 सदस्यों के रूप में एक साथ एक छत के नीचे आपसी तालमेल बनाकर रहते हैं और व्यवस्थाओं की चाबी आज भी उनके बड़े बुजुर्गों के पास है!!! वाह क्या बात है!!! साथियों जीवन जीने का सही लुत्फ उठाना है तो संयुक्त परिवार में मिलजुल कर प्रेम मोहब्बत से रहो!! फिर देखो जिंदगी जीने का मजा!!! साथियों बात अगर हम वर्तमान एक दशक की करें तो परिवार टूटने की संख्या अधिक हुई है। आज अधिकतम युवाओं की अभिलाषाएं बढ़ गई है। अधिकतम युवा बाहर रहकर अपने अवसरों को खोज़ना, अपनी जिंदगी अकेले जीना अधिक पसंद कर रहे है। हालांकि आज की व्यवस्था में जॉब भी बड़ी-बड़ी सिटीयों में ही मिलता है, इसलिए भी आज का माहौल संयुक्त परिवार व्यवस्था बनाए रखने में ढीला होते जा रहा है!! परंतु साथियों यह हमारी सदियों पुरानी धरोहर है इसे बनाए रखना आज के डिजिटल इंडिया युग में युवाओं की ज़वाबदारी बढ़ गई है!! आज 68 प्रतिशत देश की जनसंख्या युवा है। अब समय आ गया है कि युवाओं को संयुक्त परिवार व्यवस्था को संभालना होगा। उन्हें संयुक्त परिवार प्रथा की मिठास, गुणों, फायदों को अपने जीवन में उतारना होगा और आने वाली पीढ़ी के लिए एक अच्छा उदाहरण पेश करना होगा!!! साथियों संयुक्त परिवार प्रथा में माता-पिता बड़े बुजुर्गों की सेवा करने का जो अवसर प्राप्त होता है! वह किसी अन्य व्यवस्था में नहीं!!! साथियों मेरा मानना है कि जितने पुण्य हमें अपने माता-पिता बड़े बुजुर्गों की सेवा करने से प्राप्त होते हैं उतने शायद सव, हजार तीरथ धाम की यात्राएं करने पर भी प्राप्त नहीं होंगे!! क्योंकि मेरी नज़र में माता-पिता बड़े बुजुर्गों के तुल्य आध्यात्मिक व्यक्ति कोई नहीं!! इतना बड़ा स्थान और शक्ति रखते हैं माता-पिता बड़े बुजुर्ग और उनके साथ रहने का सौभाग्य हमें संयुक्त परिवार प्रथा में ही मिलता है!!! साथियों आज हम अगर संयुक्त परिवार में रहकर माता-पिता बड़े बुजुर्गों का ध्यान करेंगे तो हमारी अगली पीढ़ी भी इसी लाइन पर चलकर हमारा सम्मान करेगी। इसलिए ज़रूरी है कि आज के युवाओं को इस दिशा में अधिक ध्यान देना होगा और इन व्यवस्थाओं को टूटने से बचाना होगा तथा समायोजन की भावना, सामूहिक लोकाचार, अपनापन, प्रेमभाव बढ़ा कर रिश्तो में मज़बूती लानी होगी, आपस में सदाचार का समायोजन कर परिवार रूपी बाग का माली बनना होगा!!! हर सदस्य को व्यवस्थित कर इस बाग की रक्षा करना आज युवाओं का परम धर्म हो गया है। आज युवाओं को अपने भीतर भरपूर सहिष्णुता, विनर्मता, संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता, सहनशीलता जैसे गुणों की अति तात्कालिक ज़रूरत है क्योंकि यह संयुक्त परिवार प्रथा के मूल मंत्र हैं। साथियों बात अगर हम दिनांक 28 दिसंबर 2021 को एक कार्यक्रम में माननीय पीएम के संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार, व्यक्तिगत तौर पर पीएम ने छात्रों को अपने भीतर संवेदनशीलता, जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और रचनात्मकता को जिंदा बचाए रखने की सलाह दी और उन्हें जीवन के गैर -तकनीकी पहलुओं के प्रति संवेदनशील होने के लिए कहा। उन्होंने कहा, जब खुशी और दयालुता साझा करने की बात आए, तो कोई पासवर्ड न रखें और खुले दिल से जीवन का आनंद लें। साथियों बात अगर हम संयुक्त परिवार में भावी पीढ़ी के विकास की करें तो, संयुक्त परिवार में बच्चों के लिए सर्वाधिक सुरक्षित और उचित शारीरिक एवं चारित्रिक विकास का अवसर प्राप्त होता है। बच्चे की इच्छाओं और आवश्यकताओं का अधिक ध्यान रखा जा सकता है, उसे अन्य बच्चों के साथ खेलने का मौका मिलता है, माता पिता के साथ साथ अन्य परिजनों विशेष तौर पर दादा ,दादी का प्यार भी मिलता है, जबकि एकाकी परिवार में कभी कभी तो माता पिता का प्यार भी कम ही मिल पता है। यदि दोनों ही कामकाजी हैं। दादा, दादी से प्यार के साथ ज्ञान, अनुभव बहर्पूर मिलता है, उनके साथ खेलने , समय बिताने से मनोरंजन भी होता है उन्हें संस्कारवान बनाना, चरित्रवान बनाना, एवं हष्ट पुष्ट बनाने में अनेक परिजनों का सहयोग प्राप्त होता है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व प्रसिद्ध सदियों पुरानी भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था के मूल्यों को बनाए रखने की ज़वाबदारी युवाओं द्वारा उठाना ज़रूरी है तथा संयुक्त परिवार एक खुशियों से महकता हुआ बाग है। युवाओं को इस बाग का माली बनने की तात्कालिक ज़रूरत है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 ज़ारी | RBI annual report 2022-23 released

June 1, 2023

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 ज़ारी आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट 22-23 में मज़बूत आर्थिक नीतियों, 500 रू के नकली नोट, फ्रॉड

मिल मजदूर : सिनेमा का ‘प्रेम’ और साहित्य का ‘चंद’ | Mill worker: ‘Prem’ of cinema and ‘Chand’ of literature

June 1, 2023

सुपरहिट मिल मजदूर : सिनेमा का ‘प्रेम’ और साहित्य का ‘चंद’ धनपतराय श्रीवास्तव की परेशानी 8 साल की उम्र से

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा डाटा जारी – जीडीपी रफ़्तार 7.2 फ़ीसदी की दर से बढ़ी | Data released by National Statistical Office (NSO)

June 1, 2023

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा डाटा जारी – जीडीपी रफ़्तार 7.2 फ़ीसदी की दर से बढ़ी भारत के विज़न 2047

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई 2023 पर विशेष

May 30, 2023

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 31 मई 2023 पर विशेष आओ तंबाकू का सेवन छोड़ने की प्रतिबद्धता का संकल्प करें तंबाकू

पीयूष गोयल ने लिखी दर्पण छवि में हाथ से लिखी १७ पुस्तकें |

May 30, 2023

पीयूष गोयल ने लिखी दर्पण छवि में हाथ से लिखी १७ पुस्तकें |17 hand written books written by Piyush Goyal

एक राज़ की बात बतलाता हूं| ek raaz ki bat batlata hun

May 30, 2023

भावनानी के व्यंग्यात्मक भाव एक राज़ की बात बतलाता हूं एक राज़ की बात बतलाता हूं डिजिटल युग का मैं

PreviousNext

Leave a Comment