Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र ‘कबीर’

श्रेष्ठता के मानक यह गवारा नहीं समाज कोकि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन औरमेहनत के आधार पर कोई इंसानसमाज में उच्चतम …


श्रेष्ठता के मानक

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र 'कबीर'
यह गवारा नहीं समाज को
कि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन और
मेहनत के आधार पर कोई इंसान
समाज में उच्चतम स्थान पर पहुंच जाए
इसलिए..
उसने जाति के आधार पर
श्रेष्ठता के मानक बनाए,
उसने धर्म के आधार पर
श्रेष्ठता के मानक बनाए,
उसने शारीरिक बनावट, रूप-रंग के आधार पर
श्रेष्ठता के मानक बनाए,
उसने धन-दौलत, सम्पत्ति के आधार पर
श्रेष्ठता के मानक बनाए,
काम-धंधे के आधार पर
श्रेष्ठता के मानक बनाए,
गांव-शहर, रहन-सहन, रीति-रिवाज
और भाषा के आधार पर श्रेष्ठता के मानक बनाए,
यहां तक कि लड़का-लड़की, स्त्री-पुरुष के
आधार पर भी श्रेष्ठता के मानक बनाए,
जब इतने सारे तरीकों से कोई समाज
इंसान – इंसान में भेदभाव अपनाए
तब वो समाज किस तरह से एकजुट होकर
किसी राष्ट्र की उन्नति में सहायक हो पाए
जब इतने सारे तरीकों से किसी समाज में
प्रतिभावान व्यक्ति के साथ अन्याय किया जाए
तब कौन सी महान विरासत की बात
वो समाज दुनिया के सामने कर पाए।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment