Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, poem

“श्रृंगार रस”

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों …


 “श्रृंगार रस”

वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों में होता है…

वो टकराती साँसों के आवागमन से उठते सूर सा संगीत कहाँ पाओगे, जब प्रणय के आगाज़ पर मौन ठहर जाता है…

मिलन के तलबगार चार लबों की उत्कंठा से छलकती व्यंजनाओं का आलाप किसी मंत्र की रिदम से कम नहीं होता है…

वामिक की आगोश की गर्मी में पिघलते पसीजते जिस्मों की सुगंध सुमन, कपूर या लोबान का पर्याय ही तो होती है…

माशुका की नाजुक कलाई से खेलते आशिकों की आँखों से बहता नूर उस ईश के अर्श की चौखट से बहती नेमतों का राज़ है..

उम्र के साथ उन्नति करते प्रणय का लालित्य किसी कलात्मक छवि का ठाट होता है, अद्दल अजंता की मूरत का प्रमाण होता है…

चरम की गहराई का आगम सिसकती साँसों से उठता है जब तब धंटियों से ताल मिलाती आरती अज़ान की याद दिलाता है… 

वो लम्हें हाँ वो लम्हें दो दिलों की इबादत का उन्मादित अंजाम होता है, एक दूसरे की पनाह में जब अपना-अपना खुदा होता है।

भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगुलूरु)


Related Posts

अवैध रिश्ते| Awaidh rishte

December 10, 2022

अवैध रिश्ते रिश्तों के दरमियानकुछ दगाबाज पलते जो अपनों को ही अंधेरे में रख हर वक्त छलते।। अवैध रिश्ते कहां

कमज़ोर तू मां | kamjor tu maa

December 10, 2022

कमज़ोर तू मां मेरा बेटा बोला मां कमज़ोर मां तू कहलाईअपने हक पर तू हक ना जताईतेरे लिखे शब्द में

व्यंग्य कविता–मैं भ्रष्टाचारी कहलाता हूं| Mai bhrastachari kehlata hun

December 10, 2022

 यह  कविता भ्रष्टाचार पर व्यंग्यात्मक कुटिल कटाक्ष है।जिसका परिणाम बच्चों बीवी मां सहित परिवार की बीमारी से निकलता है।जिसका संज्ञान

अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है| absent rahta hun par haziri lagti hai

December 10, 2022

यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय ऑफिस में कर्मचारी ड्यूटी पर होकर भी राउंड के बहाने कैसे घूमते फिरते, बाहरगांव जाते, ऑफिस

व्यंग्य कविता-अभी-अभी भ्रष्टाचार केस में सस्पेंड हुआ हूं| abhi abhi bhrastachar case me suspend hua hun

December 10, 2022

 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार में सस्पेंड होने के बाद फ़िर हरे गुलाबी के दम पर वापिस पदासीन होने और मिलीभगत

व्यंग्य कविता-नियमों कानूनों की धौंस बताता हूं niyamo kanoono ki dhaus batata hun

December 10, 2022

यह  व्यंग्यात्मक कविता हर शासकीय कार्यालय में लटकाने, भटकाने और माल चटकाने की प्रथा पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष पर आधारित है 

PreviousNext

Leave a Comment