Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Laxmi Dixit, lekh

श्राद्ध पक्ष और ऊर्जा-द्रव्यमान सिद्धांत -लक्ष्मी दीक्षित

श्राद्ध पक्ष और ऊर्जा-द्रव्यमान सिद्धांत श्राद्ध पक्ष और ऊर्जा-द्रव्यमान सिद्धांत -लक्ष्मी दीक्षित अश्विन मास की प्रतिपदा से अमावस तक रहने …


श्राद्ध पक्ष और ऊर्जा-द्रव्यमान सिद्धांत

श्राद्ध पक्ष और ऊर्जा-द्रव्यमान सिद्धांत -लक्ष्मी दीक्षित
श्राद्ध पक्ष और ऊर्जा-द्रव्यमान सिद्धांत -लक्ष्मी दीक्षित

अश्विन मास की प्रतिपदा से अमावस तक रहने वाले पखवाड़े को पितृपक्ष या श्राद्धपक्ष कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि हमारे पूर्वज जो पितृ बन गए हैं वो पितृ लोक से वर्ष में एक बार श्राद्ध पक्ष में अपने वंशजों से मिलने आते हैं और उनके निमित्त किए गए तर्पण और पिंडदान से ऊर्जा प्राप्त कर तृप्त होते हैं और हमें आशीर्वाद देकर जाते हैं।

पूर्व काल में यह सारे कर्मकांड ब्राह्मणों द्वारा बनाए गए थे जिसमें वो यज्ञ पुरोहित के रूप में अपना भाग भी रखते थे। इसीलिए इन सभी कर्मकांडों में ब्राह्मणों ने अपनी जगह सुनिश्चित कर ली क्योंकि यह उनकी आजीविका का साधन बन गया। वास्तव में स्थूल शरीर के छूटने के बाद सूक्ष्म शरीर में सूक्ष्म लोकों में जीव की जो यात्रा होती है वह उसके द्वारा जीवन काल में किए गए उसके सत्कर्मों पर निश्चित होती है। अगर कोई जीवात्मा अपने लौकिक जीवन में ज्यादा सत्कर्म करती है तो उसका सूक्ष्म शरीर उतना ही हल्का होता है, उस जीवात्मा की तुलना में जो अपने लौकिक जीवन काल में पाप कर्म या दोषपूर्ण कार्य करती रहती है और जिस जीवात्मा का शरीर जितना हल्का होता है वह उतने ही ऊपर के लोक में स्थान प्राप्त करती है।

वस्तुतः कर्म ही जीवात्मा को एनर्जी प्रोवाइड कराता है जैसा कि आइंस्टीन के द्रव्य-ऊर्जा का तुल्यता का सिद्धांत है। यदि ∆m (द्रव्यमान या मैटर हमारा भौतिक शरीर) जो पूर्णता उर्जा में बदल जाता है ∆E (हमारा सूक्ष्म शरीर या मॉलिक्युलर बॉडी) तो प्राप्त उर्जा ∆E= ∆mc2 जहां C प्रकाश की चाल है मतलब वह गति जो सूक्ष्म शरीर के पास होगी उच्च लोकों की यात्रा करने के लिए। और यह गति जीवन काल में किए गए उसके कर्मों से ही आती है तभी तो भगवत गीता में भी कहा गया है कि हमारे कर्म हजारों वर्षों बाद भी हमारा पीछा नहीं छोड़ते।

तर्पण, श्राद्ध आदि वो सत्कर्म हैं जो हम अपने लिए कर रहे हैं। इनसे उस जीवात्मा को कोई बल नहीं मिलता अपने सूक्ष्म जगत की यात्रा में जो अपना स्थूल शरीर छोड़ चुकी है। मंत्रोच्चार में बल होता है किंतु आज के समय में किसी पंडित के मंत्रोच्चार में इतना बल नहीं जो आपके अटके हुए पूर्वजों को उच्च लोक में पहुंचा दे। यह कार्य तो आपको ही करना होगा परमात्मा का ध्यान और माफी प्रार्थना द्वारा।

© लक्ष्मी दीक्षित

About author 

Laxmi Dixit
© लक्ष्मी दीक्षित

 लक्ष्मी दीक्षित
ग्वालियर, मध्यप्रदेश
लेखिका, आध्यात्मिक गाइड


Related Posts

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 147 वीं जयंती एकता दिवस पर विशेष/iron man sardar vallabhbhai patel 147 birth anniversary special

October 30, 2022

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 147 वीं जयंती एकता दिवस पर विशेष/iron man sardar vallabhbhai patel 147 birth anniversary

क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है?| Is abortion morally justified?

October 29, 2022

 क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है?|Is abortion morally justified? लैंगिक समानता के लिए गर्भपात का अधिकार महत्वपूर्ण है। अलग-अलग

हेट स्पीच| Hate speech

October 28, 2022

हेट स्पीच आओ हेट स्पीच, अनैतिक आचरण को जड़ से समाप्त करें आध्यात्मिकता, हेट स्पीच अनैतिक आचरण को दूर करने

भारतीय नोट पर मां लक्ष्मी गणेश/bhareey noto par ma lakshmi Ganesh

October 27, 2022

भारतीय नोट पर मां लक्ष्मी गणेश भारतीय मुद्रा पर मां लक्ष्मी गणेश के स्वरूप छापने के प्रस्तावित बयान पर शाब्दिक

समय का आगाज़ – ब्रिटेन में भारतवंशी का राज़(Rishi sunak)

October 26, 2022

समय को नतमस्तक समय का आगाज़ – ब्रिटेन में भारतवंशी का राज़ (Rishi sunak) भारतवंशी ब्रिटेन के 97 वें प्रधानमंत्री

हिंद का बेटा या दामाद-Rishi sunak

October 25, 2022

हिंद का बेटा या दामाद-Rishi sunak जिस ने सांसद पद की शपथ गीता पर हाथ रख ली तब से भारतीयों

Leave a Comment