Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत- सुधीर श्रीवास्तव

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत नमन करता देश तुमको गर्व तुम पर देश को है,नम हैं आँखें भले हमारीविश्वास है कि …


श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत

श्रद्धांजलि जनरल विपिन रावत- सुधीर श्रीवास्तव
नमन करता देश तुमको

गर्व तुम पर देश को है,
नम हैं आँखें भले हमारी
विश्वास है कि तुम जिंदा हो।

देश का कण कण याद कर रहा
शेर को अपने पुकार रहा है,
तुम मर ही नहीं सकते हो
तुम मरकर भी जिंदा हो।

देखो भारत माँ का आँचल
मेरे लाल कह पुकार रही ,
रुठ गया क्यों तू बेटा माँ से
करुण क्रंदन गान कर रही।

दुश्मनों के मन का खौफ भी
चीख चीखकर यही कह रहा,
विपिन तुम्हारे नाम की दहशत से
दुश्मन अब भी है काँप रहा।

तुमनें दुनिया छोड़ दिया है
विश्वास नहीं हम सबको है,
डर बता रहा राष्ट्रद्रोहियों का
तुम मरे कहाँ तुम जिंदा हो।

मरकर भी तुम हो मरे नहीं
हम सबके दिलों में जिंदा हो,
जो मरा वो रावत विपिन था
जनरल रावत भारत की साँसों में

घुलकर आज भी जिंदा हो।
है गर्व हमें तुम पर हमको
विश्वास हमें अब भी इतना
भारत माता के सपूत तुम

माँ का आँचल छोड़ भला
तुम आखिर कहाँ जा सकते हो।
कोई कुछ भी कहता ही रहे
कोई कैसे विश्वास करेगा,

दुश्मन कुचक्र करने से पहले,
जनरल विपिन रावत का नाम
जेहन में उसके बसा रहेगा।
श्रद्धांजलि देते हम सब हैं

पर याद सदा ही आओगे,
एक दिन जिंदा होने का सबूत.
जनरल तुम देने खुद ही आओगे।
रची बसी आत्मा तुम्हारी
भारत के जब कण कण में
तब भला बताओ जनरल जी
आखिर दूर कब तक रह पाओगे।

भारत की सेना में तुम तो रचे बसे हो
हर सैनिक की अब भी तुम ढाल बने हो
लुकाछिपी का खेल खेलकर आओगे
अपनी वर्दी के बिना भला रह पाओगे?

 सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
© मौलिक, स्वरचित


Related Posts

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

PreviousNext

Leave a Comment