शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय के,
घर बेटी एक आई।
बाएं हाथ में कमल लाई।
इसलिए वृषारूढ़ा कहलाई।
शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय के, घर बेटी एक आई। दाएं हाथ में त्रिशूल,बाएं हाथ में कमल लाई। वृषभ है वाहन इसका,इसलिए …
June 23, 2021
कविता आज धरती का दुख देख-देख। अम्बर का धीरज टूट गया। भीग गयी अंखिया अम्बर की। बरस गये अश्रु बादल
June 23, 2021
बाल श्रमिक दिवस परकविता कितनी मजबूर जिन्दगी , मासूम उम्र में मेहनत करते। कचरा बीनने को मजबूर , कितने मैले
June 23, 2021
अनुबंध परंपरागत अनुबंध हमारा, कब टूटेगा था ज्ञात नहीं , सहज सरल जीवन जिया है हमको है अभिमान नहीं। ।।
June 23, 2021
सावन की बूँद सावन की रिमझिम बूँदें जब , झरतीं नील गगन से । शस्य रूप अवलोकित होता , वसुधा
June 23, 2021
वो जमाना आज जब अपनेपिताजी की उस जमाने कीबातें याद आती हैं,तो सिर शर्म से झुक जाता है।माँ बाप और
June 23, 2021
कविता-हैवानियत कमजोर जानकर किसी को क्युं सताते हैं लोग, मासूम दिलों पे पत्थरों की बौछार क्युं चलाते हैं लोग, कभी