शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय के,
घर बेटी एक आई।
बाएं हाथ में कमल लाई।
इसलिए वृषारूढ़ा कहलाई।
शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय के, घर बेटी एक आई। दाएं हाथ में त्रिशूल,बाएं हाथ में कमल लाई। वृषभ है वाहन इसका,इसलिए …
November 7, 2021
आतिशबाजी जरूरी नहीं दीवाली – दशहरे जैसे त्यौहारों में धूम – धड़ाके को जरूरी मानना हो या फिर नववर्ष के
November 7, 2021
बेटा – बेटी एक समान आदर्शवाद दिखाने के लिए हमनें पाठ्य – पुस्तकों में अपनी लिखा दिया, “बेटा – बेटी
November 7, 2021
चुनौती से कम नहीं वक्त बीतता जाता है जैसे-जैसे कुंद पड़ती जाती है दांपत्य में धार नयेपन की, जिन नजरों
November 7, 2021
झूठा भ्रम रोक नहीं पाते जब तुम दुनिया के सब मजलूमों पर होने वाले ज़ुल्म-ओ-सितम तो फिर तुम्हारे ‘दुखहर्ता’ होने
November 7, 2021
एक व्यंग्य नशा सबका मनोरंजन करते अभिनेता पर अपने घर में समय न देते। धन तो खूब कमा लेते पर
November 7, 2021
प्यार भरा गीत एक प्यार का गीत सुना दो, बंसी की मधुर तान सुना दो। मोहन गोपियों संग राधा अकु