Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

शिकायतें ना करें!

 शिकायतें ना करें! क्यों करें किसी से शिकायत, क्या स्वयं हे हम इसके लायक, खुद को आईने मैं झांके तो, …


 शिकायतें ना करें!

डॉ. माध्वी बोरसे!

क्यों करें किसी से शिकायत,

क्या स्वयं हे हम इसके लायक,

खुद को आईने मैं झांके तो,

हम स्वयं तो नहीं, अपनी जिंदगी के खलनायक?

किसी ने एक बार दर्द दिया,

उसे एहसास करके, उस दर्द को बार-बार लिया,

नफरत की आग में जल जल कर,

स्वयं के जख्म को ठीक क्यों नहीं किया?

शिकायतें शांति भंग कर देती है,

इंसान का सुख चैन छीन लेती है,

इसके साथ तो आत्मा,

तकलीफ में हरदम रहती है!

शिकवा, गिला बंद करो करना,

एक दिन तो सभी को है मरना,

चलो प्रेम से आगे बढ़ते हैं,

क्यों हर बात पर किसी से लड़ते रहना!

स्वयं को सुधारें,स्वयं को पहचाने,

स्वयं की अच्छाई और बुराइयों को जाने,

हमारे अलावा सब की गलतियों को नजरअंदाज करके,

स्वयं की गलतियों को भी माने!

किसी से कोई उम्मीद ना रखिए,

सिर्फ स्वयं की काबिलियत को परंखिए,

शांति और नम्रता से जीवन को बिताए,

जीवन में स्वयं को और सब को भी समझिए!

नकारात्मकता को दूर करें,

सकारात्मकता के साथ आगे बढ़े,

आज से गिला, शिकवा मिटाकर,

इंसानियत और जुनून के साथ हो जाते हैं खड़े!

डॉ. माध्वी बोरसे!

(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

पड़ाव

April 30, 2022

पड़ाव ढल रही थी सांझ सी उम्र की लाली भीगहरी होती जा रही थी समझदारी की लकीरेंबालों में भी शुरू

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता

April 30, 2022

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता स्वतंत्रता दिवस की अमृत जयंती स्वतंत्रता दिवस की

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी

April 30, 2022

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी हर प्रशासकीय पद की ज़वाबदेही व्यवहारिक रूप से ज़रूरी है कागजों में दर्ज ज़वाबदेही को

प्रेम की महक आ गई-कविता

April 30, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात प्रेम की महक आ गई महफिलों की चाहत थी,तन्हाई वो निभा गई, साथ था

जीवन तथ्य!

April 27, 2022

जीवन तथ्य! बिखरने के बाद भीनिखरना एक अदा है,बिछड़ने के बाद भी,हम स्वयं के सदा हैं! खुशी हो या गम,जीना

वाह क्या किस्मत पाई है!

April 27, 2022

 वाह क्या किस्मत पाई है! रात रात भर जाग के, की उसने मेहनत ,  जीते बहुत से पुरस्कार और परिश्रम

PreviousNext

Leave a Comment