Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग

लापरवाही शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग स्थाई सुशासन लाने का मूलमंत्र …


लापरवाही

शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग

स्थाई सुशासन लाने का मूलमंत्र भ्रष्टाचार और लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई रूपी बुलडोजर चलाना ज़रूरी – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर हर शासकीय कर्मचारी निजी इंप्लाई या अशासकीय संस्थाओं के कोड ऑफ कंडक्ट बने रहते हैं जो उनके संस्थान के अंतर्गत कार्य करने वाले उनके सदस्य कर्मचारी या एंपलाई के ऊपर उनके आचरण संबंधी नियमावली होती है और केंद्र, राज्य सरकारों के अनेक नियम,अधिनियम,सरकारी सेवक आचरण नियम नियमावली भी लागू होती है ताकि उनके द्वारा किए गए किसी भी गलत या नियमों के विरुद्ध आचरण पर शिकायत मिलने पर या स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही की जा सके।
साथियों बात अगर हम भारत की करें तो यहां केंद्र और राज्य कर्मचारियों के लिए शासकीय नियम अधिनियम सहित कुछ सहिंताए व अशासकीय संस्थाओं जैसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, वकीलों के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया, कंपनी सेक्रेट्री, इंजीनियर इत्यादि अनेक प्रोफेशनल के लिए कोड ऑफ कंडक्ट बने हैं जिनमें उनके सदस्यों के आचरण को लेकर या लापरवाही को लेकर सख्त कार्रवाई के नियम हैं। हालांकि हमारे यहां नियम अधिनियम कानून बहुत सख्त बने हुए हैं परंतु मेरा मानना है कि उनके क्रियान्वयन में इतनी सख़्ती नहीं दिखाई जाती खास करके शासकीय कर्मचारियों या किन्हीं कोड ऑफ कंडक्ट के अंतर्गत कार्रवाई अपेक्षाकृत सख़्त नहीं की जाती, इसलिए दिनांक 30 अक्टूबर 2022 को मोरबी गुजरात में हुई अत्यंत दुखदाई घटना जिसमें 135 से अधिक व्यक्ति हमने खोए हैं, से आम जनता दुखी व शुब्द है, जो टीवी चैनलों पर ग्राउंड रिपोर्टिंग के द्वारा दिखाया जा रहा है जिसमें स्थानीय निकाय और निजी क्षेत्र तथा शासकीय लापरवाही की अनेक बातें बताई जा रही है जिन पर केंद्र व राज्य शासन को स्वतः संज्ञान में लेना समय की मांग है कि ऐसी सख़्त कार्रवाई की जाए ताकि ऐसी घटना आगे ना हो। हालांकि माननीय पीएम महोदय ने तुरंत संज्ञान लेकर 31 अक्टूबर को हाई लेवल मीटिंग ली और 1 नवंबर 2022 को मोरबी जाकर घटनास्थल, अस्पताल में मरीजों से मिले और एसपी ऑफिस में हाई लेवल मीटिंग कर दिशा निर्देश दिए जिसका असर सारे देश में प्रशासन पर पड़ने की उम्मीद है कि शासकीय कार्यों में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी

साथियों बात अगर हम शासकीय कार्यों में लापरवाही, आम जनता से दुर्व्यवहार पर कार्रवाई की करें तो हम अक्सर देखते हैं कि हमारे देश में सामान्यत: सरकारी कर्मचारियों को कत्र्तव्य पालन में लापरवाही बरतने का दोषी पाए जाने पर निलंबित ही किया जाता है परंतु ज्यादातर मामलों में वे निलंबन रद्द करवा कर बहाल हो जाने में सफल हो जाते हैं।निलंबन के दौरान उन्हें आधा वेतन मिलता रहता है और बहाल हो जाने पर निलंबन की अवधि का बकाया आधा वेतन भी मिल जाता है जिस कारण उन्हें दंडित करने का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है और इसी बहाने वे छुट्टियां भी मना लेते हैं सो अलग। लिहाजा लापरवाह कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई में तेजी लाई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों की तत्काल जांच करके दोष सिद्ध होने पर उन्हें बर्खास्त ही किया जाना चाहिए। तभी दूसरों को नसीहत मिलेगी।
सभी राज्यों के सभी विभागों में ऐसी कार्रवाइयां शुरू करने की तुरंत जरूरत है। इससे सरकारी कामकाज सुधरने से देश तरक्की करेगा, कर्मचारियों में दंड और नौकरी से निकाले जाने के भय से उनके कामकाज में सुधार होने तथा भ्रष्टाचार समाप्त होने से लोगों को भारी राहत मिलेगी। साथियों बात अगर हम शासकीय कार्यों संबंधी मेरी व्यथा की करें तो, आमतौर पर सरकारी कार्यालय में जाने से हम कतराते हैं और सोचते हैं कि सरकारी/सार्वजनिक कर्मचारी हमसे दुर्व्यवहार करेगा परंतु आम नागरिक को यह नहीं मालूम कि सरकारी कर्मचारी हमसेदुर्व्यवहार नहीं कर सकते। भारतीय दंड संहिता की धारा 166 के अनुसार, सरकारी कर्मचारी जो दूसरे को चोट पहुंचाने के इरादे से कानून का उल्लंघन करता है, उसे कारावास या जुर्माना या दोनों की अवधि के साथ दंडित किया जा सकता है। यदि कोई सरकारी कर्मचारी हमको हिट करता है या अपमान करता है, तो आईपीसी का यह प्रावधान लागू हो सकता है। आईपीसी के 22 वें अध्याय में अपमान के अपराध के लिए कारावास की सजा या जुर्माना या जुर्माना भी शामिल है। यह अपराध आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 के अनुसार एक जटिल अपराध है। इसके लिए सर्वप्रथम सार्वजनिक कर्मचारी के कार्यका संज्ञान दर्ज करके पास के पुलिस स्टेशन पर रिपोर्ट करना है। एफआईआर दर्ज करके, कानूनी कार्रवाई का पहला कदम शुरू किया जाता है।
साथियों बात अगर हम नियमों और उन परिस्थितियों की करें जिनमें शासकीय कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। सामान्य नियम (1) प्रत्येक सरकारी कर्मचारी सभी समयों में, परम सत्यनिष्ठा तथा कर्तव्य परायणता से कार्य नहीं करता तो। ( 2 ) प्रत्येक सरकारी कर्मचारी, सभी समयों पर, व्यवहार तथा आचरण को विनियमित करने वाले विशिष्ट या अन्तनिर्हित शासकीय आदेशों के अनुसार आचरण नहीं करेगा तो। या फ़िर 1) जब किसी कर्मचारी द्वारा, अपने किसी कृत्य द्वारा, पद से जुड़ी साख, सत्यनिष्ठा, सद्भाव एवं कर्तव्य के प्रति निष्ठा को हानि पहुंचाई जाती है। 2)जब किसी कर्मचारी के विरुद्ध,कर्तव्यनिर्वहन के दौरान,लापरवाही एवं कदाचार के प्रथमदृष्टया तत्व मौजूद होते हैं।3) जब किसी शासकीय कर्मचारी द्वारा, ऐसा कार्य किया जाता है, जो उसके लिए अनुपयुक्त हों।4) जब किसी शासकीय कर्मचारी द्वारा, किसी विधिक शक्ति के क्रियान्वयन हेतु अधिरोपित शर्त को विलोपित किया गया हो या असावधानी पूर्वक कार्य किया गया हो।5) जब किसी शासकीय कर्मचारी द्वारा, भ्रष्ट उद्देश्य से प्रेरित होकर कार्य किया गया हो। इसी विषय पर आधारित एक केस की अपील में, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अनुशासनात्मक प्राधिकरण के पास सेवान‌िवृत्त‌ि के बाद भी प्रतिवादी पर बर्खास्तगी/ बड़ा जुर्माना लगाने का अधिकार है, क्योंकि कर्मचारी के सेवा में रहते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी। जसवंत सिंह गिल के फैसले को पलटते हुए, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम राम लाल भास्कर में (2011) 10 SCC 249 में तीन जजों की बेंच के फैसले का जिक्र किया और कहा-
“कई सेवा लाभ जांच के परिणाम पर निर्भर करते हैं, जैसे कि उस अवधि के संबंध में, जब तक जांच लंबित रही। यह सार्वजनिक नीति के खिलाफ होगा कि वह किसी कर्मचारी को विभिन्न सेवा लाभों को प्राप्त करने के बाद, जिनका कि वह हकदार नहीं होगा, बिना सजा के जाने की अनुमति दे और सेवानिवृत्त‌ि की उम्र उसके बचाव में नहीं आ सकती है और यह सजा से मुक्ति के बराबर होगा। नियमों के तहत प्रदान की गई कानूनी कल्पना के कारण, इसे उसी तरीके से पूरा किया जा सकता है जैसे कि कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सेवा में बना रहे, और उसे उचित सजा दी जा सकती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि लापरवाही, शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग है। स्थाई सुशासन लाने का मूलमंत्र भ्रष्टाचार और लापरवाही करने वालों पर सख़्त कार्रवाई रूपी बुलडोजर चलाना ज़रूरी है।

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

Lekh jeena jaruri ya jinda rahna by sudhir Srivastava

July 23, 2021

 लेखजीना जरूरी या जिंदा रहना        शीर्षक देखकर चौंक गये न आप भी, थोड़ा स्वाभाविक भी है और

Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news

July 21, 2021

 Ram mandir Ayodhya | Ram mandir news  इस आर्टिकल मे हम जानेंगे विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर से जुड़ी खबरों के

umra aur zindagi ka fark by bhavnani gondiya

July 18, 2021

उम्र और जिंदगी का फर्क – जो अपनों के साथ बीती वो जिंदगी, जो अपनों के बिना बीती वो उम्र

mata pita aur bujurgo ki seva by bhavnani gondiya

July 18, 2021

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं – एड किशन भावनानी गोंदिया  वैश्विक रूप से

Hindi kavita me aam aadmi

July 18, 2021

हिंदी कविता में आम आदमी हिंदी कविता ने बहुधर्मिता की विसात पर हमेशा ही अपनी ज़मीन इख्तियार की है। इस

Aakhir bahan bhi ma hoti hai by Ashvini kumar

July 11, 2021

आखिर बहन भी माँ होती है ।  बात तब की है जब पिता जी का अंटिफिसर का आपरेशन हुआ था।बी.एच.यू.के

Leave a Comment