Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

शान_ए–वतन- जयश्री बिरमी

सादर समर्पित उन्हे जो चले गए शान_ए–वतन ऐसा नहीं कि तुम लौट कर ना आओ तुम बिन तो हमारी सीमाएं …


सादर समर्पित उन्हे जो चले गए शान_ए–वतन

शान_ए–वतन- जयश्री बिरमी
ऐसा नहीं कि तुम लौट कर ना आओ
तुम बिन तो हमारी सीमाएं नंगी हो जायेगी
ना ही बचपन पनपेगा ना ही जवानी खिलखिलाएगी
रौंद देंगे इंसानियत के दुश्मन
एक दिन इस दरवेश को
जिसने लड़ी अनेकों लड़ाइयां
पाने को अपने ही देश को
लड़े थे नर और नारियां भी
छोड़ के सारे रिश्ते नाते ऐश और आराम को
कोई भटका जंगल जंगल तो
किसी ने छोड़ी राजगद्दी 
ना छूटी तो वह लत थी जिसे कहते हैं आज़ादी
कोई जुला फांसी पर तो किसी ने जेली गोली
तुम भी तो इस देश के वीर हो
महावीर हो तुम
आज चले भी गए तो भूलेंगे ना हम
पर फिर एकबार आओगे जरूर तुम लौटकर
हां हां आओगे जरूर तुम
बिन तुम तो मां भारती की सुनी हो जायेगी गोद
अलविदा शब्द नहीं जो तुमको बोला जायेगा
आना जरूर शान–ए– वतन
सूना न छोड़ जाना तुम
पहले वतन तुम्हे याद करेगा
लौट कर फिर से आना तुम
लड़े तुम साहस के साथ गद्दारों से
क्यों नहीं लड़ पाते हैं हम ?
अपने ही घरमें
छुपे हुए गद्दारों से

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष

April 27, 2022

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर,(14 अप्रैल ) विशेष एक महान नायक! समानता का अधिकार दिलाया,ज्ञान का प्रकाश चमकाया,किया संघर्ष मानवता के अधिकार

स्वयं को पहचाने!

April 27, 2022

स्वयं को पहचाने! चलो आज स्वयं को पहचाने,अपनी कमजोरियों को जाने,जग की आलोचना बहुत की,अब खुद को भी दे, थोड़े

जीवन में द्वंद का समापन!

April 27, 2022

जीवन में द्वंद का समापन! कभी पाऊं खुद को अनजान,तो कभी महान,कभी अज्ञानी, तो कभी ज्ञानी,मुझ में हे अच्छाई या

मोहब्बत का मरहम़ लगा

April 27, 2022

 मोहब्बत का मरहम़ लगा फ़रेब दिया तूने चाहे , रूह में मेरी तू ही समाता है ये दिल तो कायल

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा

April 27, 2022

जो जैसा करेगा , वैसा भरेगा दुनिया का दस्तूर हे ये जो जैसा करेगा वैसा भरेगाआज हसे दुनिया चाहे कल

वीणा के सुर खामोश हो रहे

April 27, 2022

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न

PreviousNext

Leave a Comment