Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

व्यंग -तीन असंतुलित पहियों वाली गाड़ी – जयश्री विरमी

 व्यंग तीन असंतुलित पहियों वाली गाड़ी  बहुत दिनों बाद आज कुछ सोचते सोचते अच्छी नींद आ गई।जब नींद अच्छी हो …


 व्यंग तीन असंतुलित पहियों वाली गाड़ी 

व्यंग -तीन असंतुलित पहियों वाली गाड़ी  - जयश्री विरमी
बहुत दिनों बाद आज कुछ सोचते सोचते अच्छी नींद आ गई।जब नींद अच्छी हो तो सपने का आना तो तय ही हैं।सपने में ही सही करोना के डर से बाहर जाने से डरने वाली मैं बाहर जाने के लिए तैयार होने लगी।अच्छी जींस और टॉप पहन सड़क के किनारे सवारी की खोज में खड़ी हो गई।काफी देर इंतजार के बाद भी कोई सवारी नहीं मिलने पर जुंजलाके के घर की और वापस जाने की सोची तो देखा तो एक तीन पहिए वाली गाड़ी जिस पर उसके मालिक ने बड़े प्यार से नाम लिखवाया था– बड़ाराष्ट्र(बदराष्ट्र)  वह आके खड़ी हो गई ।मैं फटाफट चढ़ बैठी कि कहीं ओर कोई बुला लेगा तो मेरी सवारी छूट जायेगी।सामान्यत: तो सवारी कैसी है,कोई कील– शील तो नहीं निकला हुआ जो मेरे कपड़े फाड़ देगा,पुरानी तो नहीं हैं जो चलेगी तो बहुत झटके देगी इन ने से कुछ भी सोचे बगैर जल्दी से  बैठ ही गई।जब देखा मेरी जल्दबाजी का नतीजा तो गलती समझ में आ गई।ये गड्डी के तो तीनों पहियों का आकार प्रकार और डीलडॉल अलग अलग थे।गाड़ी चली तो ऐसे लग रहा था जैसे मेले में कोई बड़े से जुले में जुल रहे हो।कभी दाई और से उपर और बाईं ओर से नीचे, आगे वाला पहिया तो जाम ही था।उसकी हवा ही निकली हुई थी। मैंने गाड़ी चालक को पूछा कि ये आगे वाले पहिए को क्या हुआ हैं,तो वह कुछ सकपकता सा बोला कि वह पहिया बहुत पुराना हैं, समझों  कि ७५ साल हो गए हैं उसे।इसमें  हवा भरवाने का खूब प्रयत्न करने बावजूद हवा टिकती ही नहीं है।बस निकल ही जाती हैं,टायर पुराने हैं,उसका चक्के को भी जंग खा गया हैं पता नहीं कितने साल चलेगा ये।वैसे उसे ठीक करने इटली के कारीगर का सहारा लिया था लेकिन उसने तो उसको और खराब कर दिया।उसने पहले तो खुद ठीक करने की कोशिश की फिर  किसी विद्वान अर्थशास्त्री को दे कर ठीक करने की ठानी,किंतु ये अर्थशास्त्री बेचारा था तो चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाया।अब इस पहिए को अपने नादान नन्हे मुन्नों को सौंप रखा हैं उसको ठीक करने के लिए, लेकिन उन्होंने तो कभी गराज में काम ही नहीं किया हैं बिनानुभवी होने से संभालना तो क्या उल्टा खराब कर के रक्खा हैं।हर बार लगातार कोशिशों के बावजूद कुछ नहीं कर पाते हैं ये लोग। हां एक रास्ता हैं,उनके पास कुछ  बुजुर्ग करीगरों का हुजूम हैं जिनका इटली से कुछ लेना देना नहीं हैं उनसे मरम्मत करवाएं तो शायद ठीक हो जाएं।वैसे उनकी सलाह तो लेते रहते हैं लेकिन जिम्मा नहीं देते तो कैसे ये ठीक चलेगा ये समज से परे हैं।

तब मैंने पूछ ही लिया कि ये दाहिना पहिया हैं उसका क्या प्राब्लम हैं।तब चालक बोला कि बहनजी ये भी तो वही कंपनी के तहत बना हैं जिसे आगे वाले पहिए को बनाया था लेकिन उससे छोटा हैं किंतु उसे बनाने वाला भी काफी वयस्क और अशक्त हैं लेकिन वह  अपने को कमजोर मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं ।उसका भी हाल कुछ वैसा ही हैं,जो उस कंपनी से उसे बाहर ले आया वह भी तो सिर्फ अपने फायदे के लिए लाया था।उसमे हवा टिक तो जाती हैं किंतु समय समय पर फुस्स… से निकल जाती हैं।बेईमानी की जो हैं वह हवा ,तो टिकना तो मुश्किल हैं ही।उसके टायर तो नए ही  हैं किंतु चक्के में कुछ खराबी हैं ,उसे जंग तो नहीं लगा है अभी लेकिन कुछ  निम्न कक्षा का, कबाड़ वाला  समान  उपयोग में लेने की वजह से गुणवत्ता के हिसाब से कुछ कमियां तो हैं ही,और कुछ तो उसके  आसपास के लोगों से उल्टे पुल्टे प्रयोग करवाने से ये असंतुलित ही रहता हैं।हमेशा संतुलन की कमी की वजह से गड्डी को ठीक नहीं चलने दे रहा हैं।बस थोड़ा पंगेबाज होने से बदनाम होता रहता हैं ये। हां ईमानदारी में तो ये भी अपनी मातृ शाखा जैसा ही हैं।हमेशा ही कौभांडी सा हैं चलना तो हैं किंतु तरीके से नहीं,सभी कुछ दोनंबरी का चाहिए तो कैसे ठीक चलेगा ये भी प्रश्न हैं।जब मुड़के उस तरफ देखा तो टेढ़ा मुंह लिए वह बतरतीब ही चल रहा था। बायां पहिया तो कुछ ठीक ही लग रहा था तो मैंने भी पूछ ही लिया की इसका तो सब ठीक ही होगा न।लेकिन उसका भी वर्तमान और भविष्य के बारे में चिंतित ही लगा वह,बोला इसका उत्पति स्थान तो बेहतरीन हैं ,एक वफादार और असूलन पक्के बंदे ने बनाया था जो किसी भी प्रकार के प्रलोभन के लिए अपने असुलों को छोड़ ही नहीं सकता था लेकिन आजकल सब आयाराम गयाराम सा व्यवहार कर रहा हैं ये।इसका भी एक नादान नन्हाँमुन्ना हैं जो इसका संतुलन बिगाड़ ने को तैयार सा बैठा हैं।थोड़ी दगाबाजी भी हैं इसके चक्के में और टायर में बेईमानी और स्वार्थ की हवा भरी होने से ठीक से चल नहीं पा रहा हैं।किंतु अपने को संतुलित बता कर काम तो चला ही रहा हैं अपने नन्हे को छुपाकर।अपनी ताकत आजमाने का शौख है ।हालांकि कमजोर मनुष्य  ज्यादा जोर से चिल्लाएगा ये प्रचलित हैं जैसा हाल हैं इनका।”थोथा चना बाजे घना” देखें कब तक बजेगा ये,या तूती बंद करदेंगे उसके साथी ये मुश्किल सवाल हैं।उन तीन पहियों वाली गाड़ी से कहीं पहुंचना मुश्किल दिख रहा था तो मैंने चालक से रोकने के लिए बोला और नीचे उतर गई,ओह वो तो मैं अपने पलंग से उतर खड़ी थी और आंखों के सामने से राजकरण के कई धुरंधर चेहरे गुजरने लगे और मैं भी सोचने लगी ये तीन असंतुलित पहियों वाली गाड़ी कब तक,कहां तक चलेगी।कोई आकस्मिक अंत होगा या खुशहाल अंत होगा ये सभी प्रश्नों के साथ चाय का भगोना चूल्हे पर चढ़ाया और स्वप्न से बाहर आने की कोशिश करने लगी।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

अलविदा 2021-जयश्री बिरमी

December 27, 2021

अलविदा 2021 एक बुरे स्वप्न की समाप्ति सा लग रहा हैं इस वर्ष का समाप्त होना।और मन थोड़ा आहत भी

कौवों की जमात- जयश्री बिरमी

December 27, 2021

 कौवों की जमात  एक वीडियो देखा था,एक ताकतवर मुर्गा एक कौए पर  चढ़ बैठा था और उसको अपनी चोंच से 

हमारे पवित्र सोलह संस्कार- जयश्री बिरमी

December 27, 2021

हमारे पवित्र सोलह संस्कार हिंदू धर्म कोई व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं हैं,ये प्राचीन काल से आस्थाएं और ऋषि

विश्वविख्यात विलियम शेक्सपियर-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 23, 2021

विश्वविख्यात साहित्यकार विलियम शेक्सपियर विलियम शेक्सपियर यकीनन सभी समय के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक है। उन्होंने 38 नाटकों,

रिश्तों की कद्र- अनीता शर्मा

December 22, 2021

 एक चिन्तन!!   * रिश्तों की कद्र* मैंने पिछले दिनों फेसबुक पर एक फोटो देखी जिसमें पिछले साल किसी कार्यक्रम में

वजूद– ए– कुर्सी- जयश्री बिरमी

December 21, 2021

 वजूद– ए– कुर्सी चर्चे तो बहुत सुने हैं किस्सा–ए–कुर्सी के लेकिन भौतिकता से देखें तो कुर्सी एक तैयार सिंहासन हैं

Leave a Comment