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व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं| I mere pas time nahi

व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं मेरे पास पचासों काम रहते है तुम्हारे समान खाली हूं क्या मैं बहुत बिजी रहता …


व्यंग्य कविता-मेरे पास टाइम नहीं

मेरे पास पचासों काम रहते है
तुम्हारे समान खाली हूं क्या
मैं बहुत बिजी रहता हूं
मेरे पास टाइम नहीं

सिर्फ चार घंटे मित्रों से बतियाता हूं
सिर्फ दो घंटे धूप में बैठता हूं
सिर्फ दो घंटे नावेल पढ़ता हूं
मेरे पास टाइम नहीं है

संस्थाओं का काम अपने मतलब से करता हूं
स्वार्थी मतलबी बिजी आदमी हूं
कोई मुझसे बात करने आया तो छोड़ता नहीं
मेरे पास टाइम नहीं

लोगों की बेकार की बातें ध्यान से सुनता हूं
मोहल्ले कॉलोनी के दो-चार चक्कर काटता हूं
टाइम कैसे कटे सोचता हूं पर दिखावा करता हूं
मेरे पास टाइम नहीं

साथियों को अगर खाली हूं यह बताता हूं
दस काम फोकट में निकालते हैं
बिना फीस या मुनाफा दिए चले जाते हैं इसलिए
मेरे पास टाइम नहीं

हकीकत है काम एक पैसे का नहीं पर फुर्सत
भी एक मिनट की नहीं दिखावा ऐसा करता हूं
बिजी बताने से प्रतिष्ठा बढ़ती है इसलिए
मेरे पास टाइम नहीं

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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