Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

वो ख्यालात मोहब्बत के

 वो ख्यालात मोहब्बत के तेरे तसव्वुर ए ख्यालात में अकसर दिल खोता है एसा लगे चांदनी रात में चांद चांदनी …


 वो ख्यालात मोहब्बत के

Veena Advani
तेरे तसव्वुर ए ख्यालात में अकसर दिल खोता है

एसा लगे चांदनी रात में चांद चांदनी संग होता है।।

ख्वाबों ख्यालों में गुलज़ार सी तू लगती मुझको

तुझे जी भर के मैं देखूं यही एहसास दिल में होता है ।।

तेरे सुर्ख लबों कि लाली जब मेरे होठों को छुए

ख्यालों में ही सही पर दिल मेरा गुले गुलज़ार होता है।।

वो तेरा सिमट मेरी बांहों में अपना चेहरा छुपाना

तेरे चेहरे के कातिल तील पर दिल बाग-बाग होता है।।

यूं कज़्जरारी आंखों में मुझे देख तेरा पलकें झुकाना

तेरी झुके चेहरे को उठा लबों का टकराना बहार होता है।।

आज ख्यालो में ही सही तू मेरी जिंदगी है कहलाती

देख आंखों में गौर से मेरी तेरी तस्वीर का दीदार होता है।।

क्या उसे भी मेरी तरह मेरा ख्यालों आता होगा

क्या मेरी तरह उसका दिल भी बैचेन बेकरार होता है।।

तेरे तसव्वुर ए ख्यालात में अकसर दिल खोता है

एसा लगे चांदनी रात में चांद चांदनी संग होता है।।2।।

वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्


Related Posts

कविता – ख्वाब – सिद्धार्थ गोरखपुरी

May 9, 2022

 कविता – ख्वाब  ये ख्वाब न होते तो क्या होता? झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

PreviousNext

Leave a Comment