Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा!!! युद्ध मानवता के लिए बहुत बड़ी त्रासदी, इसकी मानवीय और वित्तीय कीमत चुकानी पड़ेगी …


वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा!!!

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा!!!

युद्ध मानवता के लिए बहुत बड़ी त्रासदी, इसकी मानवीय और वित्तीय कीमत चुकानी पड़ेगी

किसी भी उच्च अर्थव्यवस्था वाले विकसित देश पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने से दुनिया पर इसके विपरीत आर्थिक प्रभावों को रोका नहीं जा सकता- एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सभी देशों को यूक्रेन-रूस के बिगड़ते संबंधों के चलते युद्ध का आगाज़ पहले से ही था तथा संयुक्तराष्ट्र, नाटो, ईयू इत्यादी संगठनों के हस्तक्षेप करने और युद्ध के तीसरे विश्वयुद्ध में परिवर्तित होने का कुछ हद तक अंदेशा भी इस क्षेत्र के विशेषज्ञों ने व्यक्त किया था!!! परंतु यूक्रेन-रूस युद्ध में युद्ध तो आज आठवें दिन भी शुरू है परंतु अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते नहीं दिख रहे है, जबकि यूक्रेन देश युद्ध में पूरी तरह से तबाह होते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है।
संयुक्त राष्ट् जनरल असेंबली (यूएनजीए) ने रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया है जिसमें 141 देशों ने पक्ष में 5 देशों ने विपक्ष और भारत सहित 35 देशों ने वोटिंग में भाग नहीं लिया हालांकि संयुक्त राष्ट्र, नाटो, ईयू द्वारा अनेक भयंकर प्रतिबंध रूस पर लगाने शुरू हैं जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर देखना शुरू हो गया है बड़ी मुश्किल से कोरोना महामारी और उसके ओमिक्रान वेरिएंट सहित अनेक वैरीअंटों से बड़ी मुश्किल से सभी देश पीछा छुड़ाने में कामयाब होने की राह पर थे और अपनी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने दीर्घकालीन रणनीतिक रोडमैप बनाना शुरू किया था कि यह नई मानवीय निर्मित मुसीबत आन पड़ी है जिससे अर्थव्यवस्था चौपट होने का अंदेशा गहरा गया है।
साथियों बात अगर आम युद्ध की करें तो यह मानवता के लिए बहुत बड़ी त्रासदी है, जिसमें मानवीय और वित्तीय कीमत चुकानी पड़ती है क्योंकि किसी भी उच्च अर्थव्यवस्था वाले विकसित देश पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने से दुनिया पर इसके विपरीत आर्थिक प्रभाव को रोका नहीं जा सकता जिसमें आर्थिक प्रतिबंध झेलने वाला देश भी शामिल हैl
साथियों बात अगर हम यूक्रेन-रूस युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत परिणामों की करें तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अनुसार, ईंधन के कीमतों में भारी इजाफा होने की संभावना है क्यों कि, रूस दुनिया में कच्चे तेल/गैस का प्रमुख निर्यातक है, अगर पश्चिमी देश रूसी निर्यात पर बडे़ आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं, तो इससे ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हो सकती है। विश्व बैंक के डब्लयूआईटीएस डाटाबेस के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन आधारित वस्तुओं का रूसी निर्यात में पचास फीसदी से अधिक हिस्सा है। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (यूएस-ईआईए) के आंकड़ों से पता चलता है कि रूस वैश्विक स्तरपर कच्चे तेल उत्पादन का कम से कम दसवां हिस्सा तैयार करता है, जो मध्य पूर्व में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) में कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग आधा है।
साथियों बात अगर हम कच्चे तेल की करें तो 2 मार्च 2022 को 2014 के बाद पहली बार कच्चे तेल की कीमतों ने 110 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार किया है, जो रूसी कार्रवाई का सीधा नतीजा हैं। यूरोपीय देश गैस के लिए काफी हद तक रूस पर निर्भर हैं, ऐसी आशंकाएं हैं कि इसके नतीजे लंबे समय तक दिख सकते हैं। उदाहरण के लिए, जर्मनी ने रूस के नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन की मंजूरी पर रोक लगा दी है। अब रूस-यूक्रेन संकट के कारण ना केवल ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी बल्कि इसका असर दूसरी कई चीजों पर भी पड़ेगा। रूस दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण गेहूं उत्पादक देशों में से एक भी है, जिससे खाने की चीजें भी महंगी हो जाएंगी, आज हम देखें तो रूसी रूबल की कीमत भी 30 फ़ीसदी गिर गई है और अमेरिका रूसी अरबपतियों पर कुछ प्रतिबंध लगाने की सोच रहा है।
साथियों बात अगर हम भारत में वर्तमान स्थिति की करें तो, बजट का पूरा गणित बिगड़ सकता है क्यों कि भारत के पांच राज्यों में हो रहे चुनावों के बीच तेल की कमीतों को लेकर पहले से ही हल्ला मचा हुआ है,अब रूस -यूक्रेन संकट ने इस मुश्किल को और बढ़ा दिया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नवंबर 2021 से स्थिर रखा गया है, जब भारत के कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल थी!!! इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया था कि अगले वित्त वर्ष में कच्चे तेल की कीमतें 70-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहेंगी,अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तरों पर भी बनी रहती हैं, तो ईंधन की कीमतों में 13 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि करनी होगी, जब तक कि सरकार यूनियन एक्साइज ड्यूटीको कम करने या पेट्रोलियम सब्सिडी बढ़ाने के लिए तैयार नहीं होती है। इन दोनों फैसलों से बड़े पैमाने पर बजट में हुई गणना गड़बड़ा सकती है। कीमतों में भारी वृद्धि से महंगाई बढ़ेगी, आर्थिक संकट बढ़ेगा और राजनीतिक असंतोष बढ़ने की भी संभावना है?? एक अकेली रोशनी की किरण या कहें उम्मीद, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो लगभग 630 बिलियन डॉलर (जनवरी 2021 के आंकड़ों के अनुसार) है।
साथियों बात अगर हम भारतीय अर्थव्यवस्था की करें तो बड़ी मुश्किल से कोरोना महामारी और ओमिक्रान वेरिएंट से निकलने की स्थिति में आकर हमने अनलॉक की तरफ बढ़ गए थे और अपने ड्रीम मिशन 2047, मिशन 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था मिशन नए भारत की ओर बढ़ रहे थे कि फिर एक नई मानव निर्मित मुसीबत इस युद्ध के रूप में आन पड़ी है!!! हालांकि भारत का इसमें रोल नहीं है परंतु अमेरिका के साथ आर्थिक और रूस साथ सामरिक हित हैं। परंतु प्रभाव तो वैश्विक स्तरपर होता ही है। दिनांक 2 मार्च 2022 को देर रात तक टीवी चैनलों पर जारी डिबेट में विशेषज्ञों ने राय प्रकट की, ऐसा ही या इससे बद्दतर स्थिति हुई तो क्रूड ऑयल 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, पेट्रोल डीजल 25 रुपए तक बढ़ सकते हैं, डॉलर के मुकाबले रुपया 80-85 तक जा सकता है, खान-पान तेल, खाद, एडिबल ऑयल, गैस, फ़र्टिलाइज़र की आपूर्ति में रुकावट आ सकती है, जिससे महंगाई दर तीव्रता से बढ़ने की संभावना है!!! जैसे -जैसे युद्ध के दिन आगे बढ़ेंगे हर दिन जेब पर असर पड़ेगा!! युद्ध का लंबा खींचना अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है। महत्वपूर्ण सेक्टरों पर विपरीत असर पड़ेगा क्योंकि भारत का यूक्रेन सहित अन्य देशों में फार्मा सहित अनेक वस्तुएं एक्सपोर्ट होती है और तेलीय पदार्थ आयात होते हैं जिसके विपरीत प्रभावसे भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, क्योंकि सरकार को दीर्घकालीन योजनाओं पर आवंटित राशि को इन क्षेत्रों पर पड़ने वाले विपरीत असर को कंपनसेट करने में खर्च करने होंगे।
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा,युद्ध मानवता के लिए बहुत बड़ी त्रासदी है, इसकी माननीय और वित्तीय कीमत चुकानी पड़ेगी!! किसी भी उच्च अर्थव्यवस्था वाले विकसित देश पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने से दुनिया पर इसके विपरीत आर्थिक प्रभावों को रोका नहीं जा सकता।

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

देश का बुरा सोचने वालों का देश की प्रगति में कितना योगदान?

July 29, 2022

 (देश का बुरा सोचने वालों का देश की प्रगति में कितना योगदान?) बयानबाज़ी करने में हर इंसान माहिर है, आज

आम इंसान की परेशानियां| Problems of common man

July 27, 2022

 “आम इंसान की परेशानियां” आज आम इंसान के हालातों पर रोटी कपड़ा और मकान फ़िल्म के गानें की चंद पंक्तियाँ

प्रथम नारी जासूस को नमन/pratham naari jasoos ko naman

July 26, 2022

 प्रथम नारी जासूस को नमन/pratham naari jasoos ko naman       २६ जुलाई को जिनकी पुण्य तिथि है ,उन

लैंगिक असमानता आख़िर कब तक|gender inequality

July 25, 2022

“लैंगिक असमानता आख़िर कब तक” “महिलाएं भूमि अधिग्रहण कानून को समझो और अपने हक और अधिकार के लिए आगे आओ”

पढ़ाई के लिए हाॅस्टल सही या घर/ padhai ke liye hostal sahi ya ghar

July 24, 2022

 “पढ़ाई के लिए हाॅस्टल सही या घर”/padhai ke liye hostal sahi ya ghar प्राचीन काल में बच्चों को गुरूकुलों में

स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye

July 23, 2022

 स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye  हम सभी को आम तौर

Leave a Comment