Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

वीणा के सुर खामोश हो रहे

 वीणा के सुर खामोश हो रहे मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।। कभी मांगा न …


 वीणा के सुर खामोश हो रहे

वीणा के सुर खामोश हो रहे

मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।।

कभी मांगा न कुछ तुझसे  , फिर भी सज़ा मैंने तुझे क्यों न  दी।।

अपनी सांसों के  हर  बंधन में  तुझे समाए थे हम

हर बंधन तोड़े तूने ,  फिर भी तुझे अब तक भुला क्यों न  दी।।

शायद मेरी इस रूह ने ,तुझे अपनी रूह में  बसाया था

मेरी वफ़ा के काबिल तू न था , ये खुद को मैं समझा क्यों न दी।।

याद आते अब भी तेरे संग गुज़ारे वो हर एक हसीन पल

आज भी उम्मीद लगाए बैठी , हर उम्मीद एक तोड़  क्यों न दी।।

तेरे सिवा कोई भी मेरे दिल को भाता नहीं सुन मेरे हमनवां 

तेरी राह तकती आज भी , तूने लौट  दिल पर दस्तक क्यों न दी।।

सोचती हूं कभी तो याद मेरी भी  , तुझे सच  सताती होगी

वीणा के सुर के मोती खामोश न हो जाएं , तुमने आवाज़ क्यों न दी।।

मेरी तमन्नाओं के कातिल बता तूने हमें वफा क्यों न दी।।२।।

वीना आडवाणी तन्वी

दर्द ए शायरा

नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

नारी महिमा

February 24, 2022

नारी महिमा  चाँद की तरह शीतल है नारी।सूर्य की तरह तेजस्वी है नारी।।धरती की तरह धैर्यवान है नारी।सागर की तरह

बेटी

February 24, 2022

बेटी सावन में डाली का झूला है बेटी।उपवन में खिलता गुलाब है बेटी।उगते हुए सूर्य की लाली है बेटी।सन्ध्या में

गृहणी

February 24, 2022

गृहणी बहुत कड़वा है यह अनुभव, सोच और सच्चाई का।दोष किसका है यहां पर, केवल अपने आप का।सब को सुला

छत्रपति शिवजी महाराज

February 24, 2022

छत्रपति शिवजी महाराज छत्रपति शिवजी महाराजझुके नहीं मुगलों के आगे ,शौर्य- साहस के हैं प्रतीक।मराठा साम्राज्य की नींव बने जो,महान

Leave a Comment