Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

विश्व परिवार दिवस 15 मई 2022 पर विशेष

विश्व परिवार दिवस 15 मई 2022 पर विशेष परिवार से बड़ा कोई धन नहीं – पिता से बड़ा सलाहकार, मां …


विश्व परिवार दिवस 15 मई 2022 पर विशेष

एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

परिवार से बड़ा कोई धन नहीं – पिता से बड़ा सलाहकार, मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया, भाई से बड़ा भागीदार, और बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं है
परिवार की शांति विश्व शांति का आधार – आधुनिक डिजिटल युग में युवाओं में परिवार के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना ज़रूरी – किशन भावनानी

गोंदिया – विश्व परिवार दिवस पूरी दुनिया में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, क्योंकि एक अच्छा परिवार बच्चे के चरित्र निर्माण से लेकर व्यक्ति की सफ़लता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवार के बीच रहकर ही वह अच्छे बुरे आचरण में फ़र्क करने तथा अपने भविष्य को अच्छा बनाने के लिए प्रेरित होता है। साथियों परिवार को एकजुट रखने के लिए हर सदस्य को त्याग रूपी स्वभाव का आभूषण पहनना होगा! अपने से अधिक महत्व घर के दूसरे बड़े बुजुर्गों, सदस्यों को देना होगा मैं मैं का भाव हृदय से निकालकर, पहले आप,, की पवित्र वाणी को धारण करना होगा तभी हम परिवार को एकजुट रखने में सफल होंगे जो आज के समय की मांग है जिसको प्रेरित करने के लिए परिवारों को विघटन से बचाने, परिवारों को प्रभावित करने वाले आर्थिक जनसांख्यिकीय और सामाजिक प्रतिक्रियाओं के बारे में जानकारी देने के लिए 15 मई 1994 में सबसे पहले इंटरनेशनल फैमिली डे मनाया गया था तब से अब तक हर वर्ष की नई थींम के साथ यह दिवस मनाया जाता है जो इस वर्ष 2022 में 15 मई को बड़ी शिद्दत और धूमधाम से मना रहे हैं जिसकी थीम परिवार और शहरीकरण है।

साथियों बात अगर हम इस वर्ष 2022 की थीम परिवार और शहरीकरण की करें तो इसका मुख्य उद्देश्य टिकाऊ परिवार के लिए अनुकूल शहरी नीतियों के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना है। साथियों मेरा मानना है कि परिवार को विघटन से बचाने के लिए परिवार के हर एक सदस्य के अलावा शासन, प्रशासन और समाज की भी महत्वपूर्ण जवाबदारी होती है इसीलिए हर क्षेत्र को अपने अपने स्तर पर सबका परिवार एकजुट रहे इसकेलिए त्याग की भावना, प्रोत्साहन, प्रोत्साहित नीतियां, लाभकारी नियम और सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार प्रोत्साहन देकर जनजागृति फैलाना अति आवश्यक है।

साथियों बात अगर हम परिवार की करें तो, किसी भी सशक्त देश के निर्माण में परिवार एक आधारभूत संस्था की भांति होता है, जो अपने विकास कार्यक्रमों से दिनोंदिन प्रगति के नए सोपान तय करता है। कहने को तो प्राणी जगत में परिवार एक छोटी इकाई है लेकिन इसकी मज़बूती हमें हर बड़ी से बड़ी मुसीबत से बचाने में कारगर है। परिवार से इतर व्यक्ति का अस्तित्व नहीं है इसलिए परिवार के बिना अस्तित्व के कभी सोचा नहीं जा सकता। लोगों से परिवार बनता हैं और परिवार से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व बनता हैं।

साथियों परिवार का प्राथमिक कार्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है जो भोजन, आश्र्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और भावनात्मक समर्पण आदि लेकिन एक परिवार की भूमिका केवल इन कार्यों तक ही सीमित नहीं है वास्तव में यह नागरिक कक्षा का पहला स्कूल है जिसका बुनियादी मूल्य देशभक्ति, अखंडता, इमानदारी, सहिष्णुता, बंधुत्व और दया है।

साथियों बात अगर हम परिवार की खूबसूरती और उसके गुणों की करें तो, परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है और जिसके समस्त सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह एवं भाईचारा पूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण, आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-संपन्न एवं खुशहाल परिवार के गुण होते हैं। कोई भी व्यक्ति परिवार में ही जन्म लेता है, उसी से उसकी पहचान होती है और परिवार से ही अच्छे-बुरे लक्षण सीखता है। परिवार सभी लोगों को जोड़े रखता है और दुःख-सुख में सभी एक-दूसरे का साथ देते हैं।

साथियों बात अगर हम आधुनिक डिजिटल युग में युवाओं में परिवार के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने की करें तो, पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ने के कारण आधुनिक पीढ़ी का अपने बुजुर्गों व अभिभावकों के प्रति आदर कम होने लगा है। वृद्धावस्था में अधिकतर बीमार रहने वाले माता-पिता अब उन्हें बोझ लगने लगे हैं। वे अपने संस्कारों और मूल्यों से कटकर एकाकी जीवन को ही अपनी असली खुशी व आदर्श मान बैठे हैं। यदि संयुक्त परिवारों को समय रहते नहीं बचाया गया तो हमारी आने वाली पीढ़ी ज्ञान संपन्न होने के बाद भी दिशाहीन होकर विकृतियों में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर देगी। अनुभव का खजाना कहे जाने वाले बुजुर्गों की असली जगह वृद्धाश्राम नहीं बल्कि घर है। छत नहीं रहती, दहलीज नहीं रहती,दर-ओ-दीवार नहीं रहती, वो घर घर नहीं होता, जिसमें कोई बुजुर्ग नहीं होता।

साथियों बात अगर हम परिवार से बड़ा कोई धन नहीं इस बात की पुष्टि की करें तो मेरा मानना है कि इसका ताजा उदाहरण अभी कोविड-19 त्रासदी में पीड़ित परिवारों, जिनके परिवार के सदस्यों को महामारी ने निगल लिया उनसे बात करेंगे और जिनके परिवार इस त्रासदी में मृत्यु के कारण टूटे वो हमें दिल से बताएंगे कि परिवार क्या होता है!! उसका सुख क्या होता है!! क्योंकि इसका एक उदाहरण मैं भी हूं हमारा आज भी संयुक्त परिवार है परंतु मेरे माता-पिता और छोटी बहन की मृत्यु के कारण हमारे संयुक्त परिवार में हर पल उनकी कमी महसूस होती है उनकी कमी दिल को छू गई है जीवन नीरस लगने लगा है। यह है संयुक्त परिवार का सिदक जहां एक परिवार के एक मेंबर की कमी दिल को छू जाती है!!

साथियों बात अगर हम विश्व परिवार दिवस के इतिहास की करें तो, वर्ष 1989 के 8 दिसंबर को 44वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव परिवारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समुदायों के महत्व को उजागर करने के लिए इस दिन को संयुक्त राष्ट्र महासभा के तहत संकल्प ए/आरईएस/47/237 के साथ घोषित किया गया था। इसे पारित करके वर्ष 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष की घोषणा की। इसके पहले वर्ष 1993 में आयोजित न्यूयार्क विशेष बैठक में वर्ष 1994 से हर वर्ष के 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाने का फैसला किया गया था, ताकि विभिन्न देशों की सरकारें और जनता परिवार से जुड़े मामलों की समझ को उन्नत कर सकें, और परिवार के सामंजस्य, खुशहाली व प्रगति को मजबूत कर सकें। यह वार्षिक आयोजन परिवारों द्वारा समुदायों में निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देने का अवसर प्रदान करता है और उन मुद्दों को भी उठाता है जो परिवार को प्रभावित करते हैं। 25 सितंबर 2015 को,193 संयुक्तराष्ट्रके सदस्य राज्यों ने आधिकारिक तौर पर 17 लक्ष्यों के एक सेट के साथ सतत विकास लक्ष्यों को अपनाया, जिसका उद्देश्य गरीबी, असमानता, दुर्व्यवहार और रोकी जा सकने वाली मौतों का उन्मूलन, पर्यावरणीय गिरावट का मुकाबला करना और सभी के लिए समृद्धि की अवधि का उद्घाटन करना था। हर जगह। इन सभी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, परिवार और परिवार उन्मुख नीतियां और सेवाएं महत्वपूर्ण हैं।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व परिवार दिवस 15 मई 2022 विशेष दिवस है।परिवार से बड़ा कोई धन नहीं है पिता से बड़ा सलाहकार, मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया, भाई से बड़ा भागीदार और बहन से बड़ा कोई शुभचिंतक इस दुनिया में नहीं है।परिवार की शांति में विश्व शांति का आधार है।आधुनिक डिजिटल युद्ध में युवाओं में परिवार के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना जरूरी है।

हम जात पात धर्म नहीं मानते हैं

इंसान को सिर्फ इंसान ही मानते हैं

खून सब का लाल है इसको जानते हैं

वसुधैव कुटुम्बकम् की रीत मानते हैं

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

सुख-सुविधा का पागलपन रौंद रहा मनुष्यता

March 13, 2023

सुख-सुविधा का पागलपन रौंद रहा मनुष्यता आज के भागदौड़ भरे जीवन में अच्छे जीवन की एक संकीर्ण धारणा पर ध्यान

युवा शक्ति का दोहन-कौशल और शिक्षा

March 13, 2023

‘युवा शक्ति का दोहन-कौशल और शिक्षा’ युवाओं को सशक्त बनाने की कुंजी, कौशल विकास के साथ है, जब एक युवा

थम जाता संसार अगर ना होती बेटियां

March 13, 2023

भावनानी के भाव थम जाता संसार अगर ना होती बेटियां घर की जान होती है बेटियांपिता की आन बान शान

समय न ठहरा है कभी, रुके न इसके पाँव।

March 13, 2023

समय न ठहरा है कभी,रुके न इसके पाँव।संग समय के जो चले, पहुंचे अपने गाँव।। जब हम समय बर्बाद करते

हरे माधव सत्संगोउत्सव गोंदिया 18-19 मार्च 2023

March 13, 2023

।।हरे माधव दयाल की दया।। हरे माधव सत्संगोउत्सव गोंदिया 18-19 मार्च 2023 गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत आदि अनादि काल

ए बाबू! गर्मी के अलर्ट पर ध्यान दीजिएगा!

March 9, 2023

 ए बाबू! गर्मी के अलर्ट पर ध्यान दीजिएगा!  जलवायु परिवर्तन बनाम  अत्यधिक गर्मी की आपदाएं – पीएम ने उच्च स्तरीय

PreviousNext

Leave a Comment