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विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष

 विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष  बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा रूपी समस्याओं से छुटकारा सहित भविष्य के अवसर, अधिकार …


 विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष 

विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष

बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा रूपी समस्याओं से छुटकारा सहित भविष्य के अवसर, अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करनें जनसंख्या नियंत्रण ज़रूरी 

सभी संसाधनों में शक्तिशाली ताकत मानव संसाधन हैं,परंतु जनसंख्या वृद्धि राष्ट्र के हर क्षेत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं – जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर मंथन जरूरी – एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज उपलब्ध सभी संसाधनों में मानव संसाधन एक शक्तिशाली ताकत बनकर उभरा है क्योंकि यह मानव , की ही एक क्षमता का परिणाम है कि आज मानव चांद पर घर बनाने की ओर अग्रसर हो चला है!! एक नए डिजिटल युग के आगमन का सूचक भी मानव बौद्धिक क्षमता ही है और आधुनिक सुविधाओं से सारे विश्व को अनेक उपलब्धियों से साकार करने वाला भी मानव बुद्धिजीवी जीव ही है!! परंतु बड़े बुजुर्गों की कहावत है रजाई पानी में जितनी भीगेगी उतनी भारी होगी, अति का अंत सुनिश्चित है, किसी भी अवसर की अति होना हानिकारक होती है इत्यादि अनेक कहावतें मुहावरे हम सुनतेहैं जो जनसंख्या या मानवीय संसाधनों पर भी सटीक बैठते हैं। याने जनसंख्या वृद्धि दूसरे शब्दों में मानवीय संसाधनों में वृद्धि भी टकराव, हानि और विपरीत परिस्थितियों का घोतक बन सकती है और किसी भी राष्ट्र के हर क्षेत्र की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों की सीमा तो निश्चित होती है परंतु मानव निर्मित संसाधनों की भी सीमा निश्चित है यदि अति हो गई तो अंत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता इसलिए आज हम विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 के उपलक्ष्य में इस आर्टिकल के माध्यम से इसके दुष्परिणामों पर चर्चा करेंगे। 

साथियों बात अगर हमर विश्व जनसंख्या दिवस हर साल एक थींम के साथ मनाने की करें तो, जैसे कि कुल विश्व जनसंख्या 8 मिलियन का आंकड़ा पार करने वाली है, विश्व जनसंख्या दिवस 2022 का विषय है ‘8 बिलियन की दुनिया: सभी के लिए एक लचीले भविष्य की ओर- अवसरों का दोहन और सभी के लिए अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना। 

साथियों बात अगर हम जनसंख्या वृद्धि से प्राकृतिक और मानव निर्मित संसाधनों पर विपरीत प्रभावों याने समस्याओं की करें तो, पर्यावरण प्रदूषण, ओजोनपरत को हानि, पारितंत्रीय समस्या, ब्रम्हांडीय तापमान का बढना, प्राकृतिक संसाधनो का दोहन, स्वास्थ्य संबंधीं समस्याएं, गरीबी तथा बेकारी, नैतिक मूल्यो का पतन तथा अपराध में वृद्धि, कृषि भूमि पर अत्यधिक दबाव, प्राकृतिक संसाधनों का शोषण प्रति व्यक्ति कम आय, बेरोजगारी में वृद्धि, जीवन स्तर में गिरावट, पर्यावरण प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण। 

साथियों बात अगर हम किसी भी देश की वर्तमान स्थिति के आकलन की करें तो, वह वहां की आर्थिक विकास और जनसंख्या के ही हिसाब से तय किया जाता है। यह दोनों एक राष्ट्र के विकास के सबसे बड़े कारक होते हैं। भारत जैसे देश में जनसंख्या वृद्धि एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। भले ही हम विश्व के सबसे ज्यादा युवा वाला देश होने का दावा करते हैं पर सच यही है कि अब हमारे देश की जनसंख्या यहां की आर्थिक स्थिति को काफी नुकसान पहुंचा रही हैं। जनसंख्या किसी भी देश के विकास के लिए सबसे बड़ा अवरोध पैदा कर सकती है।2011 के जनगणना के आंकड़ों के लिहाज से देखें तो हमारे देश की जनसंख्या 121.27 करोड़ हो गई है यानी कि 2001 की जनसंख्या में लगभग 17.7 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है। यह इजाफा भारत जैसे विकासशील देश के समक्ष कई समस्याओं और चुनौतियों को भी जन्म देता है। जनसंख्या वृद्धि ने हमारे देश के समक्ष बेरोजगारी, खाद्य समस्या, कुपोषण, प्रति व्यक्ति आय, गरीबी, मकानों की कमी, महंगाई, कृषि विकास में बाधा, बचत एवं पूंजी में कमी, शहरी क्षेत्रों में घनत्व जैसी ढेर सारी समस्याओं को उत्पन्न कर चुका है। हम इन समस्याओं से निपटने की लगातार कोशिश तो कर रहे हैं पर समाधान बहुत कम निकल कर सामने आ रहे हैं।

साथियों बात अगर हम जनसंख्या वृद्धि में भारत की स्थिति की करें तो, लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अकेले भारत की जनसंख्या लगभग एक अरब 35 करोड़ के आसपास है जो कि विश्व की जनसंख्या का 17. 50 है। चीन भारत से अत्यधिक बड़ा होने के बावजूद विश्व में उसे देश की जनसंख्या 18.1 प्रतिशत के आसपास है। इतना ही नहीं जनसंख्या विस्फोट की वजह से भ्रष्टाचार, चोरी, अनैतिकता और अराजकता तथा अपराध में भी काफी इजाफा हुआ है। आजादी के समय हमारे देश की जनसंख्या लगभग 35 करोड़ के आसपास थी जो आज 4 गुना ज्यादा बढ़ चुकी है। इस जनसंख्या वृद्धि के लिए कई अनेक कारण जिम्मेदार हैं जैसे कि परिवार नियोजन के कमजोर तरीकें, शिक्षा, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव, अंधविश्वास तथा विकासन्मुखी सोच की कमी है। 

साथियों बात अगर हम जनसंख्यिकीय पारिस्थितिकी तंत्र के लाभों और दोषियों के आंकलन की करें तो, हालांकि हम इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते हैं कि किसी भी राष्ट्र के विकास में जनसंख्या की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है और सभी संसाधनों में सर्वाधिक शक्तिशाली एवं सबसे महत्वपूर्ण जो ताकत होती है वह मानव संसाधन की ही होती है। लेकिन अतिशय जनसंख्या वृद्धि कहीं ना कहीं एक राष्ट्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है। हमें उन उपायों पर सोचना होगा जिससे कि इस जनसंख्या विस्फोट से बचा जा सके। परिवार नियोजन, जागरूकता, विवाह की न्यूनतम आयु में वृद्धि करना, शिक्षा और सेक्स शिक्षा पर जोर देने के अलावा लोगों को राष्ट्र और समाज के प्रति उसके कार्यों का आभास दिलाना भी होगा।

साथियों बात अगर हम इस दिवस को मनाने के इतिहास की करें तो 11 जुलाई 1947 को ग्लोबल जनसंख्या 5 अरब हो चुकी थी,इसी बात पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने बढ़ती जनसंख्या पर चिंता प्रकट की। इसके बाद 11 जुलाई 1989 को संयुक्त राष्ट्र में बढ़ती जनसंख्या को काबू करने और परिवार नियोजन को लेकर लोगों में जागरुकता लाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके साथ ही पहली बार वर्ल्ड पॉपुलेशन डे मनाया गया था। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरणका अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यह विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई 2022 पर विशेष है। बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा रूपी समस्याओं से छुटकारा सहित भविष्य के अवसर, अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करने जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। सभी संसाधनों से शक्तिशाली ताकत मानव संसाधन है परंतु जनसंख्या वृद्धि राष्ट्र के हर क्षेत्र की सेहत के लिए ठीक नहीं है इसलिए जनसंख्या नियंत्रण उपायों पर मंथन ज़रूरी है। 

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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