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विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध | Vigyan yuddh banam dharm yuddha

विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध बाबा बनाम विज्ञान, कैसे निकलेगा समाधान! प्राचीन काल से भारतीय वेदों कतेबों में विज्ञान धर्म …


विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध

विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध | Vigyan yuddh banam dharm yuddha
बाबा बनाम विज्ञान, कैसे निकलेगा समाधान!

प्राचीन काल से भारतीय वेदों कतेबों में विज्ञान धर्म और आध्यात्मिकता समाए हुए हैं – विज्ञान गति व चरण देता है तो धर्म दिशा व दृष्टि देता है – एडवोकेट किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर जनमानस में यह माना गया है कि भारतीय संस्कृति,आध्यात्मिकता धर्म वेद कतेब आदि अनादि प्राचीन काल से ही हैं, हजारों वर्षों पूर्व से ही इनके संकेत मिलते रहे हैं,जो हमें उपलब्ध ग्रंथों से इसका आभास दिलाते हैं। हमारी पौराणिक मान्यताएं कथाएं हमारे पूर्वजों की विचारधारा इसका सटीक उदाहरण है। परंतु जैसे जैसे माननीय बौद्धिक क्षमता ने अपने चरण पसारकर उसमें गति प्रदान किए तो प्राचीन संस्कृति धर्म आध्यात्मिकता ने उसे दिशा व दृष्टि प्रदान कर आगे बढ़ाया, नतीजा यह निकल रहा है कि अब विज्ञान ही इन प्राचीन मान्यताओं कथाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है कि ऐसा कैसे हो सकता है? चूंकि पिछले कुछ दिनों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बाबा के चमत्कारों की चर्चा जोरों पर उठी है, जिसके दूरगामी परिणाम राजनीति से लेकर विज्ञान और धर्म युद्ध तक पहुंच गए हैं, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति से लेकर कथावाचकों और धार्मिक पदवी धर्म के बीच शाब्दिक बाण बहस डिबेट से चलकर अब बात रामचरितमानस पर भी जा चुकी है और आस्था को चोट पहुंचाने की एफआईआर तक दर्ज हो गई है। इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी कुछ लेखकों के विचारों के सहयोग से हम इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, विज्ञान युद्ध बनाम धर्म युद्ध, बाबा बनाम विज्ञान, कैसे मिलेगा समाधान!
साथियों बात अगर हम वर्तमान विज्ञान की करें तो, विज्ञान के साथ यदि विवेक नहीं होगा तो इससे विकास कम, विनाश ज्यादा होगा। विज्ञान गति देता है, पर धर्म दिशा देता है। विज्ञान चरण देता है, लेकिन धर्म दृष्टि देता है ताकि चरण को दिशा मिले, वरना आदमी भटक जाएगा। विज्ञान के द्वारा विकास हो, आवश्यक है, लेकिन उसके साथ अध्यात्म दृष्टि भी बहुत आवश्यक है। विज्ञान का दुरूपयोग पाप है। इसलिए विज्ञान अपने धर्म को और धर्म अपने विज्ञान को समझे। इसी प्रकार, पशुपालक दुधारू पशुओं को ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगा कर जबरन दूध निकालते हैं। मेडिकल साइंस ने इसे किसी अन्य कार्य के लिए बनाया, लेकिन इसका इस्तेमाल होने लगा दुधारू पशुओं पर। यह तो जबरदस्ती हुई ना? यह पशुओं पर अत्याचार नहीं तो क्या है? हम देख रहे हैं अल्ट्रासाउंड से पता चल जाता है कि मां के गर्भ में लड़का है या लड़की। कन्या को हम पैदा ही नहीं होने दे रहे हैं। उसे मां के गर्भ में ही खत्म कर डालते हैं। यह हुआ न विज्ञान का दुरूपयोग। क्या विज्ञान इसलिए है? हालांकि अब तो कानूनन इस पर रोक लगाई गई है कि भ्रूण हत्या न हो, नहीं तो मेल और फीमेल के उस अनुपात में इतनी गड़बड़ी हो जाएगी और अंत में उसका खमियाजा समाज को ही भोगना पड़ेगा।
साथियों बात अगर हम धर्म की करें तो, धर्म की यात्रा श्रद्घा और विश्वास पर आधारित है। लेकिन केवल मानने से काम नहीं चलेगा, मानने से तो आरंभ होता है। केवल मान्यताओं में ही हम रुक गए तो भी धर्म के क्षेत्र में हमारा कोई ज्यादा कल्याण होनेवाला नहीं है। पहले मानना पड़ता है, लेकिन फिर जानने की अनुभूति की यात्रा करनी है, क्योंकि ईश्वर अल्लाह केवल मान्यताओं का विषय नहीं बल्कि अनुभूति का विषय है। वास्तव में विज्ञान और धर्म एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों सत्य के खोजी हैं। फर्क इतना है विज्ञान का धर्म अधिभौतिक है, धर्म का सत्य अधिदैविक और अध्यात्म से संबंधित है। विज्ञान चलकर के मानता है। विज्ञान पहले रिसर्च करेगा, क्योंकि उसमें मान्यताओं पर विश्वास नहीं किया जाता, वह तथ्यों का स्वीकार करता है इसलिए विज्ञान में रिसर्च की जाती है, अनुसंधान होता है और फिर जो तथ्य सामने आते हैं विज्ञान उसे स्वीकार करता है। इसलिए विज्ञान के क्षेत्र में कोई भी सत्य अंतिम सत्य नहीं है। हो सकता है इसके आगे कभी कुछ नया निकले। जब प्राचीन काल के विज्ञान पर गहन चर्चा की जाती है तो भारतीय जनमानस अपने दावे की पुष्टि के लिए प्राचीन ग्रंथों (वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि) के उपलब्धियों के उदाहरण प्रस्तुत किये जाते हैं, जैसे- राडार प्रणाली (रूपार्कण रहस्य), गौमूत्र को सोने में बदलने की तकनीक, मिसाइल तकनीक, कृष्ण विवर का सिद्धांत,सापेक्षता सिद्धांत एवं क्वांटम सिद्धांत, विमानों की भरमार, संजय द्वारा दूरस्थ स्थान पर घटित घटनाओं को देखने की तकनीक, समय विस्तारण सिद्धांत, अनिश्चितता का सिद्धांत, संजीवनी औषधि, कई सिर वाले लोग, भांति-भांति प्रकार के यंत्रोंपकरण आदि इत्यादि।
साथियों बात अगर हम कई दिनों से चल रहे बाबा बनाम विज्ञान विवाद की करें तो, बाबा का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है, एक धड़ा ऐसा है जो बाबा पर अंध विश्वास फैलाने का आरोप लगा रहा है तो दूसरी ओर एक धड़ा ऐसा है जो बाबा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। बयान बाजियों का दौर जारी है, बाबा के विरोध हैं तो समर्थक भी उतनी तादाद में हैं। धाम का कहीं समर्थन हो रहा है, तो कहीं उनका विरोध हो रहा है। देश के कुछ नेता और धर्मगुरु उनके समर्थन में खड़े हैं, वहीं कुछ नेताओं और धर्मगुरुओं द्वारा उनका विरोध किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब तक 46 करोड़ लोगों ने बाबा के समर्थन में पोस्ट किया है।वहीं बाबा को लेकर एक स्वामी ने उन्हें चैलेंज करते हुए कहा था कि अगर वो जोशीमठ में आई दरारों को ठीक कर दें तो मैं भी उनके लिए फूल बिछाऊंगा, जनता की भलाई के लिए अगर कोई चमत्कार होगा सब जय-जयकार करेंगे।चमत्कार को लेकर विवाद के बीच राजनीतिक दलों के नेता भी अपने बयान देने लगे हैं, कई नेता और संगठन इनका समर्थन कर चुके हैं, वहीं यूपी के एक नेता ने भी बाबा का समर्थन किया है। बता दें कि बाबा इस समय मीडिया की सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र के नागपुर की एक संस्था ने उन्हें चुनौती दी थी और उनपर चमत्कार के नाम पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था, उनपर जादू-टोना का भी आरोप है। आरोप लगाने वाली संस्था का नाम अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति है। इसके बाद तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है इसलिए उनकी व्हाई कैटेगरी की सुविधा को और बढ़ाया गया है। कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे एक नेता ने बाबा पर लग रहे आरोपों को लेकर कहा कि आरोप और प्रत्यारोप लगाना एक अलग विषय है, कोई भी संत या कोई कथावाचक आपस में बैर रखना नहीं सिखाता है। उन्होंने कहा, जो भी व्यासपीठ पर बैठता है वह ज्ञान और उपदेश ही देता है, अब उसे सुनने वालों के चश्मे की पावर अलग-अलग होती है कुछ लोग उसमें बुराई ढूंढते हैं तो कुछ लोग उससे सीख लेते हैं। बता दें कि इस बीच धर्मांतरण का मुद्दा भी गरमा गया है और विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। संत समाज और कई कथावाचक भी बाबा के समर्थन में उतर पड़े हैं। इस बीच एक टीवी चैनल पर माइंड रीडर की इसी तर्ज पर कलाकारी दिखाई जा रही है जो उपस्थितों के हाव-भाव उनके चेहरे से पढ़कर उन्हें उनके द्वारा कागज पर लिखी गई बातों को बिना देखे बता देता है।इसलिए इसका संबंध बाबा के माइंड रीडर होने से भी लगाया जा रहा है।

 
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विज्ञान युद्ध बनाम धार्मिक युद्ध, बाबा बनाम विज्ञान, कैसेनिकलेगा समाधान! प्राचीन काल से भारतीय वेदों कतेबों में विज्ञान धर्म और आध्यात्मिकता समाए हुए हैं। विज्ञान गति व चरण देता है तो धर्म दिशा व दृष्टि देता है।

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कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र 


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