Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Gurudeen Verma, poem

वह देश हिंदुस्तान है | vah desh hindustan hai

शीर्षक – वह देश हिंदुस्तान है जहाँ मिलता है सम्मान सभी को,वह देश हिंदुस्तान है।आदर है जहाँ सभी धर्मों का, …


शीर्षक – वह देश हिंदुस्तान है

जहाँ मिलता है सम्मान सभी को,वह देश हिंदुस्तान है।
आदर है जहाँ सभी धर्मों का, वह देश हिंदुस्तान है।।
जहाँ मिलता है सम्मान—————-।।

खुद को कहता हूँ खुशनसीब, यहाँ पर जो मैंने जन्म लिया।
नहीं मुझको पराया समझा गया, सबने मुझको यहाँ प्यार दिया।।
जहाँ मिलती है सबको शरण, वह देश हिंदुस्तान है।
आदर है जहाँ सभी धर्मों का, वह देश हिंदुस्तान है।।
जहाँ मिलता है सम्मान—————–।।

हिंदू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई, इस भूमि पर आबाद है।
अपनी इच्छा से ईश पूजा को, यहाँ सभी आज़ाद है।।
भाईचारा जहाँ है धर्मों में, वह देश हिंदुस्तान है।
आदर है जहाँ सभी धर्मों का, वह देश हिंदुस्तान है।।
जहाँ मिलता है सम्मान—————-।।

जहाँ देवी समझकर नारी को, इज्जत से पूजा जाता है।
नहीं भेदभाव नर-नारी में, ऐसा यहाँ देखा जाता है।।
जो कहलाता है विश्वगुरु, वह देश हिंदुस्तान है।
आदर है जहाँ सभी धर्मों का, वह देश हिंदुस्तान है।।
जहाँ मिलता है सम्मान—————–।।

About author 

Gurudeen verma
शिक्षक एवं साहित्यकार-

गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)


Related Posts

धारा के विपरीत

June 24, 2022

 धारा के विपरीत जितेन्द्र ‘कबीर’ शक्तिशाली का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी

अस्तित्व इतिहास बनेगी

June 24, 2022

 अस्तित्व इतिहास बनेगी सुधीर श्रीवास्तव पृथ्वी दिवस की औपचारिकता न निभाइए भू संरक्षण करना है तो  धरातल पर कुछ करके

यही जीवन चक्र है

June 24, 2022

 यही जीवन चक्र है सुधीर श्रीवास्तव जीवन क्या है यह समझाने नहीं खुद समझने की जरूरत है, अदृश्य से जीवन

व्यंग्य धरती को मरने दो

June 24, 2022

 व्यंग्यधरती को मरने दो सुधीर श्रीवास्तव धरती उपज को रही तो खोने दो धरती मर रही है मरने दो। बहुत

जब तक है जिंदगी

June 24, 2022

 जब तक है जिंदगी सुधीर श्रीवास्तव जिंदगी जब तक है गतिमान रहती है, न ठहरती है,न विश्राम करती है। सुख

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

June 24, 2022

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते

PreviousNext

Leave a Comment