वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल /varno se shabdon ka bramjal
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल वर्णों के भ्रमजाल से बने शब्द देख कलम संग दुनिया भटक ही जाती है तिलस्मी …
Related Posts
Pran priye kavya by salil saroj
September 22, 2021
प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय 1
Madhur sangeet bina ka by Dr. H.K. Mishra
September 22, 2021
मधुर संगीत वीणा का तेरी वीणा की मधुर ध्वनि, मां सदा भाव भर देती है, अंधकार भरे अंतर उर में,
Aabhasi bediyaan by Jitendra Kabir
September 22, 2021
आभासी बेड़ियां पिंजरे का पंछी उससे बाहर निकलकर भी उड़ान भरने में हिचकिचाता है बहुत बार, वो दर-असल कैद है
Harj kya hai by Jitendra Kabir
September 22, 2021
हर्ज क्या है? भाषण से पेट भरने की कला सीख ली है हमनें, रोटी को गाली देनें की हिमाकत करने
Bura man kar mat baitho by Jitendra Kabir
September 22, 2021
बुरा मनाकर मत बैठो उस समय भले ही बुरा लगे जब हमारे बुजुर्ग डांट देते हैं हमें गुस्से में आकर,
Prem pathik by Jitendra Kabir
September 22, 2021
प्रेम पथिक एक प्रेम बचपन में हुआ था पुस्तकों से, जब भी खोला उन्हें पहुंच गया रहस्य,रोमांच, अहसास और कल्पना
