वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल /varno se shabdon ka bramjal
वर्णों से शब्दों का भ्रमजाल वर्णों के भ्रमजाल से बने शब्द देख कलम संग दुनिया भटक ही जाती है तिलस्मी …
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रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे
December 22, 2021
रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो
मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा
December 22, 2021
मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु
चिंतन के क्षण- डॉ हरे कृष्ण मिश्र
December 22, 2021
चिंतन के क्षण रोम रोम में बसी है यादें,बचा नहीं कुछ अपना है,तेरे मेरे अपने सारे सपने,बिखर गए सारे के
बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’
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रूठे यार को मनाऊं कैसे-अंकुर सिंह
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संवेदना- डॉ इंदु कुमारी
December 21, 2021
संवेदना मानव हम कहलाते हैं क्या हमने अंतस् मेंकभी झांककर देखा हैस्वार्थ में सदा जीते रहेपर पीड़ा कभी देखा हैअगर
