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Dr_Madhvi_Borse, poem

वजह-बेवजह रूठना

वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के …


वजह-बेवजह रूठना।

वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,
छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,
क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,
शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के साथ हो हमारा उठना।

जीवन में बहुत से कार्य और कर्म है,
जिम्मेदारियों के साथ जी रहे हम हैं,
क्यों हर बात पर शिकायत जताए,
यह जिंदगी तो सिर्फ एक भ्रम है।

खफा ना रहे हर वक्त अपनों के साथ,
आक्रोश में ना करें हर वक्त बात,
हर एक से शिकवा गिला रखकर
क्यों बिगाड़े हर पल के हालात।

बार-बार नाराजगी जताना बंद करें,
स्वयं की मानसिक तनाव से थोड़ा लड़े,
हर वक्त लोग और हालात बुरे नहीं होते,
कभी-कभी हम होते हैं खुशहाली से परे।

स्वीकृति अपने जीवन में लाएं,
सभी को दिल खोलकर अपनाएं,
कभी कभी रूठना मनाना चलता है,
हर बात पर आंसू ना बहाए
और बात बात पर आवेश में ना आए।।

About author             

dr madhvi borse

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


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