Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Tamanna_Matlani

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत …


नन्हीं कड़ी में….
 आज की बात 
 लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया…
कविता

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी
लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया,
कुछ नए अनुभव जीवन के साथ जोड़ गया।
न थी कल्पना जिसकी ,ऐसी सौगात ये दे गया,
लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया।

अपनों का बेगानापन और बेगानों को अपना बना गया,
पल-पल याद वे आएंगे जिनको कोरोना काल लील गया,
कुछ ख्वाईशें पूरी कीं तो कुछ अधूरी छोड़ गया,
लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया।

साल के तीन सौ पैंसठ दिन न लौटकर आएंगे फिर ,
क्या-क्या भूलूं और क्या-क्या मैं याद रखूं,
अच्छी यादों के सहारे ही जिंदगी भर मैं जीती रहूं ,
लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया।

कुछ बातों को दिल में दफन किया ,
कुछ बातों को खुलकर कह दिया,
जिंदगी को कटी पतंग की तरह नील गगन में छोड़ दिया,
लो जिंदगी का एक और साल बीत गया।

कुछ उमंगे हुई जवां तो कुछ दम तोड़ गई,
दिल की कुछ बातें दिल में ही दबीं सी रह गईं,
पानी तो बहुत था पर प्यास अधूरी रह गई,
लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया।

आया है जो नव वर्ष लाएगा सौगात ऐसी,
होगी चारों ओर खुशियों की बौछार जैसी,
न रहेगी गमों की कोई परछाईं भी,
फिर कहेंगे हम ,अच्छा ही हुआ जो गत वर्ष बीत गया।

 तमन्ना मतलानी
गोंदिया(महाराष्ट्र)


Related Posts

Yadon ka sahara by hare Krishna Mishra

July 23, 2021

 यादों का सहारा अपराधी मैं तेरा हूं , सजा चाहे जो भी दो, नहीं शिकवा नहीं गिला, आंशू तो हमारे

tum mere ho kavita by Anita Sharma jhasi

July 23, 2021

 तुम मेरे हो कहाँ खो गये गिरधारी। मोर मुकुट,बंसीवाले। ग्वाले ,गोपियाँ सब रीझे, पर….तुम मेरे हो गिरधारी। कब से बाँट

Ganga kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

 गंगा तू कितनी निर्मल है,तू कितनी पावन है। अमृत की धारा है,कि पुण्य फल दाता है। कितनो के माँ पाप

beshumar pyar kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

  बेशुमार प्यार तुम को हम बतलाये कैसे, बेशुमार प्यार हम करते हैं। तुम बिन जीवन जीने का, स्वप्न में

avani kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

अवनी चहक रहे खग वृन्द सभी  झूम रही लतिका उपवन में। शीतल हवा बही सुखदाई अनुपम छटा मनोहर छाई। *

shrafat kavita by anita sharma jhasi

July 23, 2021

 शराफत शराफत से जीने का मजा कुछ और है यारों। नहीं पैसा नहीं गाड़ी पर इज्जत बेशुमार है। चेहरे पर

Leave a Comment