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लोकसेवा मंत्र नैपाज़-किशन सनमुखदास भावनानी

लोकसेवा मंत्र नैपाज़ लोकसेवा में नैतिकता, पारदर्शिता और ज़वाबदेही का स्वतः संज्ञान ज़रूरी सरकारी क्षेत्र के बाहर नौकरी और व्यवसाय …


लोकसेवा मंत्र नैपाज़

लोकसेवा मंत्र नैपाज़-किशन सनमुखदास भावनानी
लोकसेवा में नैतिकता, पारदर्शिता और ज़वाबदेही का स्वतः संज्ञान ज़रूरी

सरकारी क्षेत्र के बाहर नौकरी और व्यवसाय करने युवाओं को स्वतःसंज्ञान लेकर समाज़ में जनजागरूकता पैदा करना ज़रूरी- एड किशन भावनानी

गोंदिया – भारत में अनेक बार अनेक प्रिंट मीडिया में हम विभिन्न राज्यों के लोकसेवा आयोग विभिन्न राज्यों के जिला स्तरपर चपरासी, पटवारी, बाबू से लेकर अनेक जिला कलेक्टर अधिकार क्षेत्र के पदों के लिए विज्ञप्ति, सूचना या विज्ञापन हम देखते हैं कि इतने पदों के लिए आवेदन आमंत्रित हैं।
साथियों बात अगर हम इसकी गहराई में जाकर भयावह स्थिति की करें तो इन छोटे बड़े पदों के अंदाजी सव पदों के लिए जब एक लाख के आसपास आवेदन व चयन प्रक्रिया के बारे में मीडिया में पढ़कर हैरानी होती है!!! यह बेरोजगारी है या सरकारी नौकरी की चाहत या फ़िर भविष्य सुरक्षित करने और किसी विकल्प की कमी इच्छाशक्ति की कमी? अपने आप पर आत्मविश्वास या फिर विश्वास की कमी या कोई अन्य कारण भी हो सकता है कि इतनी छोटी मात्रा में पदों के लिए इतने हाईलेवल मात्रा में आवेदन!!!
साथियों बात अगर हम इस बात के लिए सरकार द्वारा संज्ञान में लेने की करे तो जिस तरह से विभिन्न मंत्रालयों द्वारा अनेक वेबीनार, नए स्टार्टअप अवसरों के बारे में जागरूकता अभियान, मिशन 2047, नवाचार नवोन्मेष, डिजिटल इंडिया सहित अनेक योजनाओं की विस्तृत तैयारियों सहित वर्तमान में क्रियान्वयन की जा रही योजनाओं से तो यही आभास हो रहा है कि सरकार की मंशा अब सरकारी क्षेत्र के बाहर नौकरी और व्यवसाय करने के लिए युवाओं को स्वतःसंज्ञान लेने के लिए ख़ुद आगे आने और समाज में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रोत्साहन देने की योज़ना पर काम कर रही है!!!
साथियों बात अगर हम लोकसेवकों याने एक बाबू से लेकर सबसे बड़े अधिकारी की करें तो अब समय आ गया है कि उन्हें लोकसेवा में,,नैपाज़,,मंत्र का उपयोग तात्कालिक स्वतः संज्ञान लेकर करना होगा जिसे हम विस्तृत रूप में नैतिकता पारदर्शिता और ज़वाबदेही के रूप में कह सकते हैं।हालांकि नियमों, अधिनियम, कानूनों में यह तीनों मंत्र शामिल है। परंतु सबसे अधिक ज़रूरी इनका क्रियान्वयन करने की है जो लोकसेवकों द्वारा स्वतःसंज्ञान से क्रियान्वयन कर अधिक सफल बना सकते हैं क्योंकि हम सबको मालूम है कि किस तरह छोटी से छोटी लीकेजस में इनका उल्लंघन हो जाता है!!!
साथियों बात अगर हम दिनांक 13 जनवरी 2022 को केंद्रीय कार्मिक व पीएम कार्यालय मंत्री के संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने भी कहा कि सरकारी क्षेत्र के बाहर नौकरी और व्यवसाय के नए स्टार्ट-अप अवसरों के बारे में जनजागरूकता फैलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आजीविका से जुड़े स्थाई स्टार्ट-अप्‍स में नए भारत की तस्वीर बदलने की परिवर्तनकारी क्षमता है।
उन्होंने कहा कि हमारी नीति एक मजबूत एसटीआई, इकोसिस्‍टम के विकास के साथ ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में है जो देश में एक नया तालमेल बना सके। स्टार्ट-अप्‍स, विशेष रूप से ग्रामीण विकासोन्मुखी लोगों की मदद करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर की सराहना की, जो युवाओं को आय का बड़ा अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि भारत अब संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद सबसे ज्यादा यूनिकॉर्न स्टार्ट-अप्‍स वाला दुनिया का तीसरा देश है और जिस तरह से नवाचार संस्कृति देश के युवाओं की परिकल्पना में देखी जा रही है उससे उम्मीद है कि जल्द ही भारत शीर्ष स्थान पर होगा। उन्होंने बताया कि एक अरब डॉलर या उससे अधिक के मूल्यांकन वाले किसी भी स्टार्ट-अप को यूनिकॉर्न कहा जाता है।
एक अन्य कार्यक्रम में भी पीआईबी के अनुसार उन्होंने कहा कि, केंद्रीय सचिवालय में निर्णय लेने की दक्षता में सुधार, लंबित मामलों को कम करना, मंत्रालयों/विभागों के कामकाज को युक्तिसंगत बनाना, लोक सेवा में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही, प्रभावी कार्यकारी एजेंसियों का निर्माण, सरकार में सुधार के मूल सिद्धांत, राज्यों के शासन की बेंचमार्किंग 21वीं सदी के शासन में प्रबंधन की कार्य-प्रणाली, नागरिक केंद्रित शासन, राज्य सचिवालयों में सुधार, जिला कलेक्ट्रेट, शासन में प्रौद्योगिकी का उपयोग और उत्कृष्ट संस्थानों का निर्माण से संबंधित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा पीएम नें निर्देश दिया है कि भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग इस दशक के लिए समय-सीमा और मील के पत्थर के साथ दीर्घकालिक लक्ष्यों और संबंधित परिणामों को चिन्हित करने के लिए विजन इंडिया-2047 के लिए एक दस्तावेज तैयार करेंगे। शासन को लेकर परिकल्पित विजन इंडिया-2047 को प्राप्त करने के लिए आवश्यक संरचनात्मक और संस्थागत सुधारों का सुझाव देने के लिए, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने 15 जनवरी, 2022 को शाखा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वैज्ञानिक समुदाय के साथ एक बैठक बुलाई है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि लोकसेवा में नैतिकता, पारदर्शिता और ज़वाबदेही का स्वतःसंज्ञान लेना ज़रूरी है तथा सरकारी क्षेत्र के बाहर नौकरी और व्यवसाय करने युवाओं को स्वतःसंज्ञान लेकर समाज में जागरूकता पैदा करना तात्कालिक ज़रूरी है जिससे हम विज़न 2047 को उसके डेडलाइन से पहले प्राप्त कर सकते हैं।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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