Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

लोकतंत्र पर उल्लू हंसता- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

 लोकतंत्र पर उल्लू हंसता कोई चैनल खोल के देखो, बड़े-बड़े दिग्गज लगते हैं, मानो उनका ज्ञान आंकना, जनता को बहुत …


 लोकतंत्र पर उल्लू हंसता

लोकतंत्र पर उल्लू हंसता- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

कोई चैनल खोल के देखो,

बड़े-बड़े दिग्गज लगते हैं,

मानो उनका ज्ञान आंकना,

जनता को बहुत कठिन है ।।

कभी-कभी मैं भी सुनता हूं,

अल्पज्ञों में जोश है दिखता ,

विषय वस्तु का ज्ञान नहीं है,

वही बड़ा अधिवक्ता बनता  ।।

जनतंत्र का उद्घोषक बनता,

मनमर्जी से परिभाषा गढ़ता ,

दिन को हरदम रात बताता ,

सच्चा सेवक स्वयं बताता ।।

बड़े समीक्षक हर चैनल पर,

अपना अपना ज्ञान बांटता ,

कोई धर्म का गुरु बता कर,

बड़ा-बड़ा मौलाना बनता ।।

सत्य अहिंसा की परिभाषा,

देख सिखाता स्वयं हत्यारा

जीवों पर दया नहीं आती ,

वही अहिंसक बन बैठा है ।।

लोकतंत्र का दीमक जो है,

डाल का उल्लू सा दिखता है,

अर्थ तंत्र पर कुंडली लेकर,

फन फैलाए जो बैठा है ।।

हरिशंकर  परसाई की,

रचना याद बहुत आती है ,

भेढ़ भेड़ियों  की पहचान,

क्यों हमें  नहीं आ पाई है ।।

हर चैनल के वक्ता को,

आसानी से पहचाना है,

शब्द उगलते चबा चबाकर,

उनके शब्द नहीं हैं अपने ।।

कहां हमारी उठती उंगली,

किसका मूल्यांकन कर लूं,

पीड़ा अपनी कम नहीं होती,

लोकतंत्र पर मैं क्या बोलूं ???

लोकतंत्र में परिभाषाएं  !

लाज  लजाती भक्ता से,

डाल पर उल्लू बैठा बोले ,

तमसो मा ज्योतिर्गमय। ।।

मौलिक रचना
                 डॉ हरे कृष्ण मिश्र
                 बोकारो स्टील सिटी
                 झारखंड ।


Related Posts

मुहब्बत जालिम – डॉ इंदु कुमारी

January 15, 2022

मुहब्बत जालिम किसी की नहीं होती हैजालिम मुहब्बत ये हैबड़ी मगरुर होती हैबड़ी मशहूर होती है बाँधो चाहे पैरों में

फसलों के त्योहार – डॉ इंदु कुमारी

January 15, 2022

फसलों के त्योहार मकर संक्रांति हम मनाएं गुड़ तिल चावल चढ़ाएंदही चूड़ा गुड़ केला खाखिचड़ी के भोग लगाएंमिलकर खुशी हम

युवा शक्ति जागो रे- मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी “

January 15, 2022

“युवा शक्ति जागो रे” जागो- जागो , जागो रे जागो सेवा का हथियार हाथ में“मुझको नही तुझको “के नारे सेदुखियों

राजनीति भी अजीब है- सिद्धार्थ गोरखपुरी

January 15, 2022

 राजनीति भी अजीब  है कोई कह गया तो टिका रहा कोई कह के भी मुकर गया ये राजनीति भी बड़ी

मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा- R.S.meena Indian

January 15, 2022

कविता -मैं तेरा दांत तोड़ दूंगा मिल जाये गर रहबर ,हर बात छोड़ दूँगा । कह दूं सोहबतों से, मैं

शोषण- चन्दानीता रावत

January 15, 2022

शोषण जागो मानव के मन, जागोशोषण के विरूद्ध चुपी तोडो़समाज के काले विचारों सेरिश्ता तोडो़, दो जवाब मुड़ कर इनरुढ़िवादी

Leave a Comment