Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

लेखक और वक्ता समाज का आईना

“लेखक और वक्ता समाज का आईना” एक लेखक और वक्ता समाज का आईना होते है। समाज के हर मुद्दों पर …


“लेखक और वक्ता समाज का आईना”

लेखक और वक्ता समाज का आईना

एक लेखक और वक्ता समाज का आईना होते है। समाज के हर मुद्दों पर लिखन-बोलना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। पर आजकल के कुछ लेखक और वक्ता बिकाऊ सामान जैसे बन गए है। समाज को सही राह दिखाना और असत्य को कुरेद कर सत्य तक पहुँचना और सत्य को उसके असली स्वरूप में प्रजा के सामने रखना उनका धर्म है पर आज पैसों की खनकार पर नाचते नज़र आ रहे है।
लेखक की कलम और वक्ता की वाणी जब किसीकी गुलाम बन जाती है तब अपना मूल रुप और कलात्मक अभिव्यक्ति खो देते है। चाहे सरकार हो, चाहे कोई राजनीतिक पार्टी हो या कोई भी मुद्दा हो, एक तरफ़ा समीक्षा लोगों के दिमाग में उस मुद्दे के प्रति नकारात्मक ग्रंथी को जन्म देती है।
आज हमारे देश में यही हो रहा है, टीवी पर न्यूज़ चैनल से लेकर कुछ पत्रकार और प्रमुख पार्टियों के सदस्य चाटुकारिता और पक्ष-विपक्ष की गुलामी करते ही नज़र आ रहे है। खुद भी भीतर जानते होते है कि जो मुँह से उगल रहा है वह सही नहीं है। किसी व्यक्ति विशेष को अच्छा दिखाने की होड़ में या अपनी पार्टी की छवि को बेदाग दिखाने के लिए देशद्रोह कहाँ का न्याय है। चाहे संबित पात्रा हो या असदुद्दीन ओवैसी या रविश कुमार ये जब भी मुँह खोलते है ऐसा लगता है देश के दो हिस्से करने के लिए ही बैठे है।
कई पत्रकार अपना असली मकसद भूलकर सच को झूठ का लिबास पहनाकर कवर स्टोरी बना लेते है। पर ये लोग नहीं जानते उनकी ये नीति देश को तोड़ने का काम कर रही है। सरकार की गलती पर पर्दा डालना, या किसी पार्टी की तरफ़ अपने मानसिक  झुकाव की वजह से विपक्ष पर बिना मतलब तानें कसना प्रजा के दिमाग में ज़हर घोलने का काम करता है। 
लेखक और वक्ता एक समाज सेवक होते है। लेखन में सत्य का प्रमाण भी उतना ही जरूरी है जितनी वाणी में सरस्वती।  आपका लिखा पढ़ कर अगर दो लोगों के विचार भी बदलते है तो लिखना सार्थक होगा। सत्य के साथ खड़े रहकर अपनी कलम को वाचा देना एक लेखक को महान बनाता है। या आप एक वक्ता है तो अपनी भाषा पर लगाम कसते समाज में जागरूकता लाने वाले भाषणों से अपनी शख़्सीयत को सम्मानित कीजिए, मुनाफ़ाखोरों को, भ्रष्टाचारीयों को और गद्दारों को बेनकाब करके देश के प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए, नांकि ज़हर उगल कर धर्मांधता फैलाते, या सरकार के विरुद्ध बिना सोचे समझे कुछ भी बोलकर वैमनस्य फैलाए।
प्रजातंत्र देश में हर तरह की मानसिकता वाले लोग होते है, और कुछ लोग टीवी पर भाषण दे रहे वक्ताओं को सही समझकर अपनी सोच को परे रखकर अनुसरण करते रहते है। जिसकी वजह से जातिवाद और धर्मांधता फैलती है दंगे होते है और देश में अशांति और अराजकता फैलती है। लेखक और वक्ताओं को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए और अपनी छवि के साथ देश की छवि को भी अपनी कलम और वाणी की सुंदरता से उभारना चाहिए।

About author

bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

Related Posts

मगरमच्छ के आंसू- जयश्री बिरमी

January 15, 2022

 मगरमच्छ के आंसू वो दौर था जब अफगानिस्तान में तालिबानों  का अफगान फौज को हरा कर कब्जा कर लिया था

विश्व हिंदी दिवस- सुधीर श्रीवास्तव

January 13, 2022

 विश्व हिंदी दिवस  हिंदी की लोकप्रियता को लेकर समूचे विश्व में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है।

सम्मान का बोझ- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

 सम्मान का बोझ  कहीं पढ़ा था की लड़कियों का आत्मसम्मान बढ़ाओ शादी की उम्र नहीं,सही बात हैं,लड़कियों को सम्मान मिलना

ली उबासी और निगली मक्खी- जयश्री बिरमी

January 13, 2022

 ली उबासी और निगली मक्खी खूब चर्चा में हैं मुख्य मंत्री चन्नी का पराक्रम, कांड तो शायद कह सकते इसे।जो

अपना हाथ जगगन्नाथ-जयश्री बिर्मी

January 7, 2022

अपना हाथ जगगन्नाथ बचपन में ही कही पढ़ी या सुनी थी,ये स्वश्रय का जीता जागता प्रमाण ही समझो।एक ईख का

सब कुछ आर्टिफिशियल!!!-किशन सनमुखदास भावनानी

January 6, 2022

सब कुछ आर्टिफिशियल!!! वर्तमान प्रौद्योगिकी युग में मानवीय बुद्धि सब कुछ आर्टिफिशियल बनाने के चक्कर में है!!! प्राकृतिक मौलिकता और

Leave a Comment