Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, poem

“लिहाफ़ ही मेरा छोटा है”-भावना ठाकर ‘भावु’

“लिहाफ़ ही मेरा छोटा है” दिल पर प्रताड़ना का पत्थर पड़ा है और मैं साँसें ढूँढ रही हूँ, अश्क नहीं …


“लिहाफ़ ही मेरा छोटा है”

"लिहाफ़ ही मेरा छोटा है"-भावना ठाकर 'भावु'

दिल पर प्रताड़ना का पत्थर पड़ा है और मैं साँसें ढूँढ रही हूँ, अश्क नहीं उभरते नैंन कंचे हो चले है..

उम्मीदों का बोझ लादे मन थक सा गया सपने समय मांगते है, सपने देखना ही छोड़ दिया,
संभावना न हो जिस पथ पर रोशनी की उस पर चलना ही क्यूँ..

ऋजु है मेरी सहनशीलता मैं चट्टान तो नहीं, हारी वारि हूँ जीत की आदी नहीं,
सहिष्णुता को सज़ा लाज़मी है..

बारूद के ढ़ेर पर बिठा दी गई हूँ एक तिली से कब चिंगारी उठेगी कब मैं ख़ाक़ हो जाऊँगी नहीं पता..

क्यूँकि इस रिश्ते की किंमत आसमान छू रही है, मेरे गरीब बाप में दहेज देने की हैसियत जो नहीं..

जीना रवायत है तन की
रैंगती हुई उम्र गुज़र रही है दो पाटन के बीच कौन साबुत बचा है,
निचोड़े हुए गन्ने के कूचों सी तमन्नाएं सूखी पड़ी है..

ज़िंदगी की हकीकत से मीलों दूर है मेरी ख़्वाहिशों की गाड़ी
अना हार गई, हौसले झुक गए वक्त की चुनौतियाँ ठहाके लगा रही है..

“भ्रम टूट गया की ज़िंदगी हसीन है”
हौसलों का वितान फटे हुए टाट से कैसे बनवाऊँ तुरपाई के धागे ही निर्माल्य ठहरे..

परचम कैसे लहराऊँ आज़ादी का
पैर की जूती हूँ मेरी शिखा उनकी मुठ्ठी में कैद है,
पैर कैसे फैलाए कोई लिहाफ़ ही जहाँ छोटा है..

बहरहाल बंदी हूँ इक्कीसवीं सदी की दहलीज़ दूर बड़ी दूर है मेरी आस का पंछी धीमे उड़ रहा..

आप मुझे कायर कह सकते हो माँ हूँ जो कुछ सहा ममता में मोहाँध होते सहा,
मुझे अबला न कहो..

उस दमनकारी सोच वाले दरिंदे को कोई गाली तो दो,
जो अर्धांगनी को इंसान नहीं चुटकी सिंदूर के बदले खरीदा हुआ गुलाम समझता है।
भावना ठाकर ‘भावु’ (बेंगलूरु, कर्नाटक)


Related Posts

शुक्रिया- नाचीज बीकानेरी

April 18, 2022

शुक्रिया शुक्रिया-ए-अल्लाह-शुक्रिया । तूने जो हमें इंसान बनाया ।। तेरी तारीफ कैसे करूँ । अल्फ़ाज़ देने वाला तू हैं ।।

हाल -ए-दिल- मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी

April 18, 2022

हाल -ए-दिल खुशियों के फूल सदा खिलते रहें ।इंसानियत के कदम भी बढाते रहें ।।जमाने के हर दौर से गुजर

श्रीराम-सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 18, 2022

श्रीराम चैत्र शुक्ल नवमी तिथि परश्रीराम धरा पर आए थेअवधपुरी में इस तिथि परखुशियों के बादल छाए थेपुरुषो में पुरुषोत्तम

नव वर्ष सुहानी- डॉ.इन्दु कुमारी

April 18, 2022

नव वर्ष सुहानी आम्र मंजरों से से लदे हुए फल फूलों से सजे हुएकली कुसुम मुस्कान भरे हैंकोयल सुर में

ईर्ष्या तू ना गई – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

ईर्ष्या तू ना गई देखकर लोगों की सुख-सुविधा जल रही तू खूब जलन सेअपनी दुख की चिंता नहीं हैदूसरों के

कर्म महान है – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

कर्म महान है बच्चे भगवान हैं शिक्षा हमारी आधार हैगुणवत्तापूर्ण है विकल्प शत प्रतिशत लागू करना शिक्षकों का है संकल्पऐसा

Leave a Comment