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लहरों के मध्य हम- जयश्री बिरमी

लहरों के मध्य हम लहर एक के बारे में देखें तो वह प्रारंभिक अवस्था थी जिस में बहुत ही बुरे …


लहरों के मध्य हम

लहरों के मध्य हम- जयश्री बिरमी
लहर एक के बारे में देखें तो वह प्रारंभिक अवस्था थी जिस में बहुत ही बुरे दिन हमने जेलें हैं ये विष्णुओं की वजह से ,दिन नहीं साल बोलेंगे तो ही सही रहेगा। जब पहले चीन में शुरुआत हुई तो वीडियो देख दिल तो दहल जाता था, किंतु ये नहीं सोचा था कि अपने देश या बोले तो दुनियां में भी ये इतना प्रभावी तरीके से फेल जायेगा।और जब आया तो ,पहली लहर जो मानसिक दबाव की ज्यादा थी क्योंकि उसवक्त जो वेरिएंट था वह उतना भी भयावह नहीं था जो दूसरी लहर वाला था।लेकिन बीमारी के लक्षणों से अपरिचित,दवाइयों या वेक्सीन का नहीं होना आदि से हम परेशान थे।अंधेरे में तीर चल रहे थे ,कोई कहता था मलेरिया की दवाई हाईडरोक्सी क्लोरोक्वीन असरदार हैं तो कुछ डॉक्टर्स पेट के कीड़े मरने वाली दवाइयां भी दे रहे थे।आयुर्वेद में भी शरीर की रोग प्रतिकरक शक्ति को बढ़ाने के लिए भांति भांति के चूर्ण और घर घर में काढ़े बन रहे थे।उतने ही व्हाट्स एप और दूसरे मध्यमों से वीडियो और मैसेज आ रहे थे।घर से निकलना मुश्किल हो गया था।सोचते थे कि दरवाजे के बाहर खड़ा कोविड बाहर निकलते ही अपने को लग जायेगा।इसलिए सब कुछ ही घर पर ऑर्डर कर के मंगवाया जाता था। तब विदेशों की अति विषम परिस्थितियों से अपने देश में काफी ठीकठाक था, दुनियां में अपने देश में हुए वायरस के कंट्रोल के चर्चे हो रहे थे।पाश्चात्य के देशों में रोगियों की संख्या और उससे मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि पूछो मत।देख सुन के प्रलय सा ही प्रतीत होता था।और एक समय आया कि लगा अपने देश में से तो नामोनिशान मिट गया हैं कोवीद का ।लेकिन दूसरी लहर तो पहले से भी ज्यादा खतरनाक साबित हुईं।लाखों में कैसिज थे और हजारों में मौत के आंकड़े पहुंच गए थे।अंतिम संस्कार करने के लिए लाइन लगी थी।उनको स्मशान या कब्रिस्तान में ले जाने के लिए कोई वाहन या सुविधा नहीं होने से लोग बाइक या रिक्शा या साइकिल का उपयोग करते दिखाए जा रहे थे,ये सब दिल को जकजोर के रख देता था।जिसने भी ये सब देखा सुना हैं वह आजीवन भूलेंगे नहीं ये प्रलयकारी दृश्यों को।

अभी भी दुनियां के कई देशों में ये कहर चल ही रहा हैं ये चिंता का विषय हैं। करोना के विषाणुं शरीर के डीएनए के साथ मिल नए नए वेरिएंट बनाते जा रहे हैं जैसे डेल्टा वायरस। ऐसे में कम फैले ऐसा करने की जरूरत होने की वजह से बिन लॉकडाउन के भी लोग घर में बंद हो गए। वहीं कोविड के नियमों तहत जरूरी,मास्क पहनना,बार बार हाथ धोना और दो गज की दूरी रखना जरूरी हैं।अब तो बहुत प्रकार की वेक्सीन उपलब्ध हैं जो कारगर भी हैं किंतु कब तक,अगर नए नए वेरिएंट्स निकलते गए गए और वेक्सीन ने काम करना कम कर दिया तो? ये भी बहुत बड़ा प्रश्न हैं।अपने देश में पिछले तीन महीनों से १०००० से भी कम केसेज आ रहे हैं लेकिन गफलत में रहने से दूसरी लहर सा हाल न हो ये खास जरूरी हैं।१२० करोड़ लोगों को लगी वैक्सीन एक सुरक्षा चक्र के समान हैं लेकिन दूसरे देशों में आए नए वेरिएंट्स उतनी असुरक्षा देती हैं।

जैसे दक्षिण अफ्रीका ,हांगकांग, बोत्सवाना के नए वेरिएंट्स अपने देश में आने वाले प्रवासियों से फैल वापिस से केहर बरपा सकते हैं। दुनियां में कुल २६ करोड़ केसेज हुए है जिनमें से ५२ लाख जीतने मृत्यु हुए जो रिकॉर्डेड से काफी ज्यादा भी हो सकता हैं।दक्षिण अफ्रीका का नया वेरिएंट डेल्टा, जो दूसरी लहर में केहर बारपा गया उससे भी ज्यादा खतरनाक हैं।इस वेरिएंट के उपर वैक्सीन का भी ज्यादा असर नहीं दिखाई देता हैं।इस वायरस के भी ३२ नए म्यूटेंट्स बन चुके हैं।ये वायरस जल्दी फैलता हैं और जानलेवा भी हैं।वैसे इसके अभी ज्यादा केसेज नहीं हैं लेकिन अगर फैला तो दुनियां के लिए खतरनाक परिस्थिति उत्पन्न होगी।

दूसरे देशों में फ़ैल रहे कॉविड के आंकड़े अपने देश के लिए बहुत बड़ी चेतावनी हैं दूसरी लहर में भी यही हुआ था ,काम केसेज की वजह से हुई लापरवाही ने देश को कहां पहुंचा दिया था? दुनियां में बदनाम करके रख दिया था।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी राज्यों को विदेशी प्रवासियों के बारे में सचेत कर दिया हैं।शेर बाजार भी दुनियां में बढ़ रहे करोना के केसेज की वजह से गिरावट का आना भी आर्थिक संकट की निशानी हैं। अब साउथ अफ्रीका से आया हैं नया ओमिक्रोन भी बहुत सारे म्यूटेशन होने की वजह से बहुत फैलता हैं।ये स्पाइक प्रोटींस ज्यादा होने की वजह से जल्दी फैलता हैं,अधिक संक्रमित करने वाला हैं।ये अधिक फैलने वाला वेरिएंट हैं जिसके कोई विशेष लक्षण नहीं देते हैं किंतु वह वैक्सीन लिए हुए लोगों को भी हो सकता हैं किंतु कितना घातक हैं इसके बारे में कुछ तय नहीं हो पाया हैं क्योंकि इस पर अभी ज्यादा रिसर्च नहीं हो पाई हैं। आज दुनियां के सभी देशों में प्रवेश कर चुका ये वेरिएंट के बारे में who भी चिंतित हैं और सभी प्रकार के करीना से बचने के लिए मापदंड को व्यवहार में लाने की सूचना दे चुका हैं।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


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