Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

लघुकथा-सजी हुई पुस्तकें

लघुकथा-सजी हुई पुस्तकें बाॅस के एयरकंडीशन आफिस में घुसते ही तिवारी के चेहरे पर पसीना आ गया। डेस्क पर पड़ी …


लघुकथा-सजी हुई पुस्तकें

लघुकथा-सजी हुई पुस्तकें

बाॅस के एयरकंडीशन आफिस में घुसते ही तिवारी के चेहरे पर पसीना आ गया। डेस्क पर पड़ी लगभग 10 लाख के नोट और बाॅस की रहस्यमय मुस्कान उसकी समझ में नहीं आई। 75 साल की उम्र में भी गजब की फुर्ती रखने वाले उसके बाॅस उसके आदर्श थे। आज तक आफिस में बाॅस द्वारा दिए गए वक्तव्य और मन माॅटिवेशन का महासागर था।
जैसे ही तिवारी केबिन के अंदर पहुंचे, उन्हें बैठने का इनारा करते हुए उन्होंने तुरंत बोलना शुरू कर दिया, “तिवारीजी, मेरी बात हो गई है, अन्य तीन मंजिल बनवाने की परमीशन मिल जाएगी। तुम भरोसे वाले आदमी हो। यह रुपया ले जाओ। रात 9 बजे होली डे इन में तुम्हारे नाम से टेबल बुक कराई है। श्रीवास्तवजी तुम्हें वहां मिलेंगे। बस, तुम्हें यह बैग उन्हें देकर उनके साथ खाना खाना है और चले आना है। इसी बहाने फाइवस्टार में खाना खा आओगे।” अंतिम वाक्य बाॅस ने आंख मार कर कहा था।
“पर सर यह तो रिश्वत है। हम ने आलरेडी दो मंजिल बना ली है।” तिवारी की प्रामाणिक आत्मा को यह अच्छा नहीं लगा। तिवारी को यह कहते सुन कर देवता जैसे बाॅस का उसे एक नया ही स्वरूप देखने को मिला।
“अरे आजकल के लड़कों को बिजनेस चलाने की समझ ही नहीं है। मुझे किसी दूसरे को भेजना पड़ेगा और एक बात याद रखना तिवारी कि यह बात बाहर गई तो तुम्हारी खैर नहीं। इस फील्ड में मेरी प्रामाणिकता की कसमें खाई जाती हैं और इसे उसी तरह कायम रखने के लिए मैं किसी हद तक जा सकता हूं। आशा है कि तुम समझ गए होगे और अब तुम जा सकते हो।”
गुस्से में तिवारी को जाने का इशारा कर के बाॅस किसी को फोन करने लगे। केबिन से बाहर निकलते हुए तिवारी को बाॅस के पीछे रखी एक सुंदर शेल्फ में कुछ किताबें दिखाई दीं। जिनके नाम थे- सत्य के प्रयोग, कर्म के सिद्धांत, प्रामाणिकता का पथ। तिवारी बाॅस के नए स्वरूप को देख कर बाहर निकल रहा था तो बाॅस की केबिन के बाहर बैठी सेक्रेटरी किसी से फोन पर कह रही थी कि धार्मिक और चिंतन करने वाली किताबें अभी तक नहीं आई हैं, उन्हे जल्दी भेजो। बाॅस के पीछे रखी शेल्फ में अच्छी-अच्छी किताबें होना जरूरी है। आने वाला आदमी शेल्फ में रखी किताबें देख कर मनुष्य की पर्सनालिटी जज करता है।”
तिवारी परिणाम की परवाह किए बिना थाने की ओर चल पड़ा। क्योंकि जो किताबें बाॅस ने दिखाने के लिए रखी थीं, उन सभी किताबों को वह पढ़ और समझ चुका था।

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)


Related Posts

आलम आरा : पहली बोलती फिल्म की खो गई आवाज

May 4, 2023

 आलम आरा : पहली बोलती फिल्म की खो गई आवाज भारत की सांस्कृतिक परंपरा में इतिहास को संभाल कर रखने

लघुकथा-अनोखा मिलन | laghukatha -Anokha milan

April 26, 2023

लघुकथा-अनोखा मिलन बेटी के एडमिशन के लिए स्कूल आई मधुलिका एक बड़े से हाॅल में पड़ी कुर्सियों में एक किनारे

लघुकथा–सच्चा प्रेम | saccha prem

April 26, 2023

 लघुकथा–सच्चा प्रेम  राजीव ने न जाने कितनी बार उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था, पर हर बार नियति ने

बालकथा-दोस्त हों तो ऐसे | dost ho to aise

April 26, 2023

बालकथा-दोस्त हों तो ऐसे धानपुर गांव में प्राइमरी स्कूल तो था, पर हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं था। इसलिए आगे की

हाय क्या चीज है जवानी भी

April 19, 2023

हाय क्या चीज है जवानी भी एक गजल है: रात भी नींद भी कहानी भी…यह गजल है रघुपति सहाय, जो

लघुकथा:नाराज मित्र | Short Story: Angry Friends

April 19, 2023

लघुकथा:नाराज मित्र राकेश सिन्हा बहुत कम बोलने वालों में थे। अंतर्मुखी स्वभाव के कारण वह लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं

PreviousNext

Leave a Comment