Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

लघुकथा-उपकार | Laghukatha- upkar

लघुकथा-उपकार रमाशंकर की कार जैसे हो सोसायटी के गेट में घुसी, गार्ड ने उन्हें रोक कर कहा, “साहब, यह महाशय …


लघुकथा-उपकार

रमाशंकर की कार जैसे हो सोसायटी के गेट में घुसी, गार्ड ने उन्हें रोक कर कहा, “साहब, यह महाशय आपके नाम और पते की चिट्ठी ले कर न जाने कब से भटक रहे हैं।”
रमाशंकर ने चिट्ठी ले कर देखा, नाम और पता तो उन्हीं का था, पर जब उन्होंने चिट्ठी लाने वाले की ओर देखा तो उसे पहचान नहीं पाए। चिट्ठी एक बहुत थके से बुजुर्ग ले कर आए थे। उनके साथ बीमार सा एक लड़का भी था। उन्हें देख कर रमाशंकर को तरस आ गया। शायद बहुत देर से वे घर तलाश रहे थे। उन्हें अपने घर ला कर कहा, “पहले तो आप बैठ जाइए।” इसके बाद नंकर को आवाज लगाई, “रामू इन्हें पानी ला कर दो।”
पानी पी कर बुजुर्ग ने थोड़ी राहत महसूस की तो रमाशंकर ने पूछा, “अब बताइए किससे मिलना है?”
“तुम्हारे बाबा देवकुमार जी ने भेजा है। बहुत दयालु हैं वह। मेरे इस बच्चे की हालत बहुत खराब है। गांव में इलाज नहीं हो पा रहा था। किसी सरकारी अस्पताल में इसे भर्ती करवा दो बेटा, जान बच जाए इसकी। एकलौता बच्चा है।” इतना कहते कहते बुजुर्ग का गला रुंध गया।
रमाशंकर ने उन्हें गेस्टरूम में ठहराया। पत्नी से कह कर खाने का इंतजाम कराया। अगले दिन फैमिली डाक्टर को बुलाकर सारी जांच करवा कर इलाज शुरू करवा दिया। बुजुर्ग कहते रहे कि किसी सरकारी अस्पताल में करवा कर दो, पर रमाशंकर ने उसकी एक नहीं सुनी। बच्चे का पूरा इलाज अच्छी तरह करवा दिया।
बच्चे के ठीक होने पर बुजुर्ग गांव जाने लगे तो रमाशंकर को तमाम दुआएं दीं। रमाशंकर ने दिलासा देते हुए एक चिट्ठी दे कर कहा, “इसे पिताजी को दे दीजिएगा।”
गांव पहुंच कर देवकुमारजी को वह चिठ्ठी दे कर बुजुर्ग बहुत तारीफ करने लगा, ” आप का बेटा तो देवता है। कितना ध्यान रखा हमारा। अपने घर में रख कर इलाज करवाया।”
देवकुमार चिटठी पढ़ कर दंग रह गए। उसमें लिखा था, “अब आप का बेटा इस पते पर नहीं रहता। कुछ समय पहले ही मैं यहां रहने आया हूं। पर मुझे भी आप अपना ही बेटा समझें। इनसे कुछ मत कहिएगा। आपकी वजह से मुझे इन अतिथि देवता से जितना आशीर्वाद और दुआएं मिली हैं, उस उपकार के लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा।-आपका रमाशंकर।”
देवकुमार सोचने लगे, आज भी दुनिया में इस तरह के लोग हैं क्या?

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)
मो-8368681336


Related Posts

Parivartit swaroop by Kanchan Sukla

October 1, 2021

 परिवर्तित स्वरूप सोलह साल, कक्षा नौ की छात्रा लवलीन को, कमरे में रोता देख मम्मी ने, तुरंत वहाँ जाना उचित

Rishton ki dhundh story by Jayshree birmi

September 22, 2021

 रिश्तों की धुंध जब नियति को पता चला कि आज उसका पति कोई और स्त्री के साथ देखा गया हैं

Aap ke liye laghukatha by Sudhir Srivastava

September 21, 2021

 लघुकथा आपके लिए            रीमा ससुराल से विदा होकर पहली बार मायके आयी।मांँ बाप भाई बहन

Chot laghukatha by Akanksha Rai

September 15, 2021

 चोट प्रोफेसर राय को उनकी कृति ‘स्त्री:तेरी कहानी’ के लिए आज सम्मानित किया जाना था।प्रोफेसर कालोनी से लगभग सभी उनके

Nadan se dosti kahani by jayshree birmi

September 12, 2021

 नादान से दोस्ती एक बहुत शक्तिशाली राजा था,बहुत बड़े राज्य का राजा होने की वजह से आसपास के राज्यों में

Zindagi tukdon me by jayshree birmi

September 12, 2021

 जिंदगी टुकड़ों में एक बार मेरा एक दोस्त मिला,वह जज था उदास सा दिख रहा था। काफी देर इधर उधर

Leave a Comment