Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

रिटायरमेंट के बाद क्या

 “रिटायरमेंट के बाद क्या” ज़िंदगी का रस है बेहद मीठा पी लो जल्दी-जल्दी, समय कम है और उम्र की सुराही …


 “रिटायरमेंट के बाद क्या”

सौम्य नज़रों से देखो

ज़िंदगी का रस है बेहद मीठा पी लो जल्दी-जल्दी, समय कम है और उम्र की सुराही लबालब है, छलकने से पहले जी लो जल्दी-जल्दी।

उम्र के एक पड़ाव के बाद हमें मुठ्ठी को खोल देनी चाहिए अपने हिस्से के लम्हों को पकड़ने के लिए, और पचास साठ साल तक ज़िंदगी से जूझते, जद्दोजहद में बिताए लम्हों को आज़ाद करने के लिए। कोई कहता है कि हम रिटायर हो गए अब हमें क्या करें, बिना काम के बोर हो रहे है, डिप्रेशन आ गया है। 

मैं कहूँगी अब तक जो किया वही नहीं करना चाहिए। पचास साठ साल तक परिवार वहन के लिए काम ही तो किया है, क्या अब मन नहीं करता कि खुद के लिए जिया जाए। 

स्वीकार कर लो समय अब कम है, खुद के साथ बिता लो, खुद से मिलने का वक्त है। स्टेशन पर खड़े रहो ट्रेन कभी भी आ सकती है। पर…पर स्टेशन पर एक वेइटिंग रूम भी होता है जहाँ बैठकर वो सब करो जो अब तक नहीं किया। सुबह की शुरुआत लंबी साँस भरते पाँच मिनट ॐ के साथ बिताने पर पूरा दिन तरोताज़ा बितेगा। फिर थोड़ा वाॅकिंग शोकिंग हो जाए। उसके बाद पति-पत्नी बालकनी में झूले पर बैठकर पारिवारिक चर्चा करते गर्मा गर्म चाय नास्ते का मज़ा उठाईये। समय कहाँ बितेगा पता ही नहीं चलेगा। फिर नहा धोकर पूजा पाठ करने से मन को शांति मिलती है और ईश्वर के करीब रहने का मौका भी। और थोड़ा टीवी सिवी देखो, घर में पोते पौतियां है तो उसके साथ खेलो। हो गई दोपहर, अब पूरे परिवार के साथ बैठकर लज्ज़तदार लंच का आनंद लीजिए फिर घर में ही थोड़ा टहल लीजिए। आ रही है ना अब नींद? सुस्ताय लो धंटा भर। अब उठिए भी चार बज गए। टीवी पर मैच वेच आ रही है तो देखो देश दुनिया की ख़बरें देखो। बज गए पाँच। चाय-वाय की आदत है तो लगा लो दो घूँट। फिर हो जाओ मेडिटेशन के लिए तैयार। आधा धंटा काफ़ी है मानों खुद से मिल लिया हो ऐसा अहसास होगा।

लिखने-विखने का शौक़ रखते हो तो थोड़ा लिखो डायरी लिखो या शायरी लिखो मन हल्का हो जाएगा। फिर निकल जाओ यार दोस्तों से मिलने, पार्क में थोड़ा जोगिंग कर लो, लो बज गए शाम के सात। घर जाओ हाथ मुँह धोकर फ्रेश हो जाओ आहा…डिनर की खुशबू आ रही है फिर देर किस बात की अपनों के साथ बैठकर भोजन का लुत्फ़ उठाओ। तृप्त होकर देखो सिरियल- विरियल बज गए ना दस। अब तो आँखें बोझिल हो रही है, थोड़ा ईश्वर स्मरण कर लो, मोबाइल खोलो और पुराने गीत, गज़ल और सुरीले संगीत के संग सपनो की सैर पर निकल जाओ। कहाँ मुश्किल है समय बिताना कहो।

हर इंसान को उपर वाले ने कोई न कोई हुनर दिया है उस हुनर को ढूँढिए और विकसित कीजिए। ज़िंदगी में कई बार हम सोचते है कि अगर समय मिले तो ये करना है वो करना है, तो समझो यही समय कुछ नया करने के लिए बेहतर है। कुछ कर दिखाने की और मशहूर होने की कोई उम्र नहीं होती, जब आँखें खुले तब सवेरा। तो बस इसी तरह रिटायरमेंट को एन्जॉय कीजिए नांकि अब कुछ काम नहीं रहा कहकर अवसाद से घिर जाओ। कुछ-कुछ समय पर परिवार के साथ या दोस्तों के साथ पिकनिक पर या बाहर कहीं घूमने का प्रोग्राम बना लो। यात्रा पर निकल जाओ। महिलाएं किटी पार्टीस कर सकती है, या फ़िल्म वगैरह का आयोजन कर लो। आपका सही समय ही अब शुरू होता है। ज़िंदगी एक ही बार मिलती है अच्छे से जी कर बिताईये। 60 के बाद टिकट तो कट ही चुकी होती है, कोई नहीं जानता ट्रेन कब आएगी। पर सामान तैयार रखो जहां जाना है वहाँ जितने की जरूरत है उतना ही।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु


Related Posts

भ्रष्टाचार की शून्य सहिष्णुता-किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

नए भारत, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना में भ्रष्टाचार की शून्य सहिष्णुता, पारदर्शी व्यवस्था तथा नागरिकों की मुख्य सहभागिता की प्रतिबद्धता

कागज के शेर-जयश्री बिरमी

December 20, 2021

कागज के शेर एकबार फिर कागजी जलजला आया हैं और पाकिस्तान ने एक नक्शा अपने सोशल मीडिया में दिखाया हैं

ओमिक्रान वेरिएंट – एतिहात बरतना -किशन सनमुखदास भावनानी

December 19, 2021

ओमिक्रान वेरिएंट – एतिहात बरतना और बूस्टर डोज़ का तात्कालिक संज्ञान लेना ज़रूरी ब्रिटेन और अमेरिका में छाए ओमिक्रान वेरिएंट

शिक्षा एक अलग जीवन का प्रवेश द्वार है-किशन सनमुखदास भावनानी

December 19, 2021

शिक्षा एक अलग जीवन का प्रवेश द्वार है! बच्चों के जीवन के शुरुआती वर्षों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आगे चलकर बच्चों

प्रेम में सब कुछ चलता हैं(व्यंग)-जयश्री बिरमी

December 19, 2021

प्रेम में सब कुछ चलता हैं (व्यंग) पुरानी फिल्में देख कई दृश्यों का हम मजाक उड़ाते थे।हीरो ने दौड़ती गड्डी

हमारी अंतरात्मा ही हमारी सच्ची मित्र है.-तमन्ना मतलानी

December 18, 2021

नन्हीं कड़ी में…आज की बात हमारी अंतरात्मा ही हमारी सच्ची मित्र है… संसार में आया हुआ प्रत्येक व्यक्ति सांसारिक मोह-माया

Leave a Comment