Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Aalekh, kishan bhavnani, lekh

राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 25-26 अगस्त 2022 संपन्न

श्रमेव जयते 2047  राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 25-26 अगस्त 2022 संपन्न – श्रमिकों के कल्याण में मील का पत्थर साबित होगा  …


श्रमेव जयते 2047 

राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 25-26 अगस्त 2022 संपन्न – श्रमिकों के कल्याण में मील का पत्थर साबित होगा 

राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 25-26 अगस्त 2022 संपन्न

वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने उच्च गुणवत्ता वाला उच्च कार्यबल तैयार करना समय की मांग – एडवोकेट किशन भावनानी 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर हर देश अपने अपने स्तरपर आंतरिक वैश्विक या सामूहिक परिस्थितिकी जन्य विपत्तियों, परेशानियों से जूझकर कर अपने देश की निरंतरता बनाए रखने के लिए संघर्षत है। हाल में कोविड महामारी, यूक्रेन रूस युद्ध इत्यादि वैश्विक प्रैक्टिकल स्थितियों से उत्पन्न स्थिति, पड़ोसी मुल्कों से वाद-विवाद, अन्तर्राष्ट्रीय मंचों से सामंजस्य, विभिन्न ट्रिटियों का पालन सहित घरेलू अस्वस्थ माहौल भी हर देश के लिए चुनौती बने हुए हैं और इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक आवश्यक अस्त्र उस देश की सुदृढ़ अर्थव्यवस्था बनाए रखना होता है, जिसके लिए श्रम एक महत्वपूर्ण पहलू होता है। श्रम बिना सुदृढ अर्थव्यवस्था की कल्पना निराधार है, क्योंकि श्रम किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत पहिया होता है क्योंकि राष्ट्र के विकास में श्रमेव जयते की उतनी ही अहमियत है जितनी सत्यमेव जयते की और चूंकि भारत में 25 से 26 अगस्त 2022 तक राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें माननीय पीएम महोदय ने भी वर्चुअल संबोधित किया इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से श्रम पर चर्चा करेंगे। 
साथियों बात अगर हम 25-26 अगस्त 2022 तक दो दिन चले राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन की करें तो, केन्‍द्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय 25-26 अगस्त 2022 को तिरुपति,आंध्र प्रदेश में दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्‍मेलन विभिन्न महत्वपूर्ण श्रम संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सहकारी संघवाद की भावना से आयोजित किया गया था। यह केन्‍द्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर नीतियां बनाने और श्रमिकों के कल्याण के लिए योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में और तालमेल बनाने में मदद करेगा। इस सम्मेलन में अन्‍य मुद्दों के अलावा सामाजिक सुरक्षा को सार्वभौमिक बनाने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का समावेश करके उन्हें ई-श्रम पोर्टल के साथ एकीकृत करने संबंधी चार विषयगत सत्र संपन्न हुए, राज्य सरकारों द्वारा चलाए जा रहे ईएसआई अस्पतालों के माध्यम से चिकित्सा देखभाल में सुधार के लिए स्वास्थ्य से समृद्धि और पीएमजेएवाई से एकीकरण चार श्रम संहिताओं के तहत नियम तैयार करना और उनके कार्यान्वयन के तौर-तरीके, विजन श्रमेव जयते @ 2047 काम की ओर न्यायसंगत और समान परिस्थितियों पर ध्यान देने के साथ, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभीश्रमिकों कोसामाजिक सुरक्षा, काम पर लैंगिक समानता शामिल है। 
साथियों बात अगर हम श्रम के अर्थ को समझने की करें तो इसको तीन प्रकार से विभाजित किया जा सकता है(1)शारीरिक और मानसिक श्रम(2)कुशल और अकुशल श्रम (3)उत्पादक और अनुत्पादक श्रम।अर्थशास्त्र में,श्रम शब्द का व्यापक अर्थ है। इसका मतलब केवल मैनुअल श्रम नहीं है। इसमें मानसिक कार्य भी शामिल है।इस प्रकार यह मजदूरों इंजीनियरों, क्लर्कों, टाइपिस्टों, प्रबंधकों, पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी अधिकारियों, शिक्षकों, वकीलों, घरेलू नौकरों आदि के काम को स्वीकार करता है।सभी प्रकार के काम अर्थशास्त्र में श्रम के अंतर्गत आते हैं, बशर्ते कि यह पैसे के लिए किया जाए। लेकिन मानसिक श्रम जिसमें मस्तिष्क लगाया जाता है या शारीरिक थकान की तुलना में मानसिक थकान अधिक होती है,उदाहरण के लिए, अधिवक्ता, शिक्षक, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि का कार्य। जबकि अकुशल श्रम वह कार्य जिसमें विशेष ज्ञान, प्रशिक्षण या सीखने की आवश्यकता नहीं,उदाहरण के लिए; रिक्शा चालक, प्लेटफार्म पर सामान ढोने वाले कुली का काम अकुशल कहलाता है। एक कुशल श्रमिक का पारिश्रमिक सामान्य रूप से अकुशल श्रमिक की तुलना में अधिक होता है। 
साथियों बात अगर हम श्रमिकों के प्रति नजरिए की करें तो, नजरिया अगर सम्‍मानजनक हो तो श्रम योगी बन जाते हैं ‘राष्‍ट्र योगी’ और ‘राष्‍ट्र निर्माता।’· हमें श्रमिकों की नजर से ही श्रम मुद्दों को देखना चाहिए। श्रमेव जयते पहल से विश्‍वास बढ़ेगा, युवाओं की काबिलियत बढ़ेगी और व्‍यवसाय करना आसान होगा। हमारा श्रमिक एक श्रमयोगी है। हमारी कितनी समस्‍याओं का समाधान, हमारी कितनी सारी आवश्‍यकताओं की पूर्ति एक श्रमयोगी के द्वारा होती है। इसलिए जब तक हम उसकी तरफ देखने का अपना दृष्टिकोण नहीं बदलते हैं, उसके प्रति हमारा भाव नहीं बदलता है, समाज में हम उसको प्रतिष्‍ठा नहीं दे सकते हैं।इसलिए शासन की व्‍यवस्‍थाओं में जिस तरह सेसमयानुकूल परिवर्तन की आवश्‍यकता है, काल बाह्य चीजों से मुक्ति की आवश्‍यकता होती है, नित्‍य नूतन प्राण के साथ प्रगति की राह निर्धारित करने की आवश्‍यकता होती है। उसी प्रकार से समाज जीवन में भी श्रम की प्रतिष्‍ठा, श्रमिक की प्रतिष्‍ठा, श्रमयोगी का गौरव, ये हम सबकी सामूहिक जिम्‍मेवारी भी है और व्‍यवस्‍थाओं में परिवर्तन करने कीआवश्‍यकता भी है।यह उस दिशा में एक प्रयास है। 
साथियों स्किल डेवलपमेंट भारत के लिए बहुत बड़ी एपोर्टचुनिटी है। पूरे विश्‍व को आज करोड़ों स्किल्ड लोगों की जरूरत है। दुनिया के वर्क फोर्स को प्रोवाइड करने का सामर्थ्‍य हमारे पास है। हमारे पास नौजवान हैं, लेकिन अगर वो स्किल्ड मैंन पॉवर नहीं होगा तो जगत में उसको कहीं स्‍थान नहीं मिलेगा और इसलिए हमें नई जनरेशन को इस प्रकार तैयार करना है, जो जॉब क्रिएटर हो, और दूसरी वो जनरेशन हो जो जॉब क्रिएटर नहीं बन सकती है लेकिन कम से कम लोग उसको जॉब के लिए ढूंढते आ जाएं, इतनी कैपेसिटी वाला वो नौजवान तैयार हों। उन बातों को ले करके अगर हम चलते हैं और इस प्रकार का एक स्किल्ड वर्क फोर्स जो पूरे विश्‍व की रेकुइरेमेंट है तैयार करते हैं तो, आने वाले दिनों में हम उस रेकुइरेमेंट को पूरा कर सकते हैं। श्रमेव जयते, हम सत्‍यमेव जयते से परिचित हैं। जितनी ताकत सत्‍यमेव जयते की है, उतनी ही ताकत राष्‍ट्र के विकास के लिए श्रमेव जयते की है। और इसलिए श्रम की प्रतिष्‍ठा कैसे बढ़े? दुर्भाग्‍य से हमारे देश में वाइट कॉलर जॉब , उसका बड़ा गौरव माना गया हैं। 
साथियों बात अगर हम वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने उच्च गुणवत्ता वाले उच्च कार्यबल की करें तो आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने दिनांक 13 अगस्त 2022 को जारी अपनी रिपोर्ट की तीसरी चुनौती में कहा है, तीसरी चुनौती एक उच्च गुणवत्ता वाली श्रम शक्ति का विकास करना है, भारत में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में गुणवत्ता और मात्रा दोनों के संदर्भ में श्रम का योगदान विकसित और साथ ही कई उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बहुत कम है। 83 प्रतिशत कार्यबल असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। जैसे-जैसे भारत एक विनिर्माण केंद्र और बिजलीघर निर्यातक के रूप में बदलता है, कार्यबल को समय के साथ विस्तार करना और अधिक कुशल बनना पड़ता है। सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि की गुणवत्ता के योगदान को मात्रा के बजाय बढ़ाने पर जोर दिया जानाचाहिए। भारत की कुल श्रम शक्ति में, रोजगार योग्यता (किसी विशेष नौकरी के लिए उपयुक्त कौशल) 50 प्रतिशत से कम है। इस बाधा को तोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण उत्तोलन कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है। विश्व बैंक, (विश्व विकास संकेतक) के अनुसार, भारत 2020 में महिला श्रम शक्ति भागीदारी दर के मामले में 187 देशों में 178वें स्थान पर है। यदि भारत अपने अवसरों का लाभ उठाता है और इस वार्ता के लिए उपलब्ध समय में मैंने जिन चुनौतियों का सामना किया है, उन पर विजय प्राप्त करता है, तो यह व्यापक रूप से माना जाता है कि भारत समय को झुकाएगा। इसलिए, मैंने पहले जिन क्रय शक्ति समता अनुमानों का उल्लेख किया था, उन्हें देखते हुए, यह कल्पना करना संभव है कि भारत अगले दशक में 11 प्रतिशत की विकास दर के साथ आगे बढ़ेगा। यदि यह हासिल कर लिया जाता है, तो भारत 2048 तक नहीं, बल्कि 2031 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भले ही यह इस गति को बनाए नहीं रखता है और 2040-50 में 4-5 प्रतिशत तक धीमा हो जाता है, यह बन जाएगा 2060 तक दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। 
साथियों बात अगर हम सम्मेलन में माननीय पीएम के वर्चुअल संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने बदलते परिदृश्य के अनुसार बदलाव की आवश्यकता को दोहराया। उन्होंने तेजी से निर्णय लेने और उन्हें तेजी से लागू करके चौथी औद्योगिक क्रांति का पूरा लाभ उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्‍लेटफॉर्म और गिग इकोनॉमी को ध्‍यान में रखते हुए पीएम ने काम के उभरते आयामों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में सही नीतियां और प्रयास भारत को वैश्विक को स्तर पर अग्रणी बनाने में मदद करेंगे। 
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि श्रमेव जयते 2047, राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 25-26 अगस्त 2022 को संपन्न हुआ जो श्रमिकों के कल्याण में मील का पत्थरसाबित होगा। वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने उच्च गुणवत्ता वाला उचित कार्य बल तैयार करना समय की मांग है। 

About author

Kishan sanmukh

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

देश में पुलिस सेवा को बेहतर बनाया जाए/desh me police seva ko behtar bnaya jaye

August 5, 2022

 देश में पुलिस सेवा को बेहतर बनाया जाए  आज देश में जिस तरह की आंतरिक और बाहरी चुनौतियों है, पुलिस

संयुक्त परिवार की महत्ता| importance of joint family

August 1, 2022

 “संयुक्त परिवार की महत्ता” “सुख दुःख में साथ निभाना, मिलकर हर जश्न मनाना, एक दूसरे पर नि:स्वार्थ प्यार लुटाना यही

देश को जलाने में मीडिया कितना जिम्मेदार’/desh ko jalane me media kitna jimmedar

July 30, 2022

‘देश को जलाने में मीडिया कितना जिम्मेदार’/desh ko jalane me media kitna jimmedar आज देश की दुर्दशा पर रामधारीसिंह दिनकरजी

देश का बुरा सोचने वालों का देश की प्रगति में कितना योगदान?

July 29, 2022

 (देश का बुरा सोचने वालों का देश की प्रगति में कितना योगदान?) बयानबाज़ी करने में हर इंसान माहिर है, आज

सुख दुख तो अतिथि हैं, |sukh dukh to atithi hai

July 28, 2022

 सुख दुख तो अतिथि हैं,  अनन्तानीह दुःखानि सुखं तृणलवोपमम्  नातः सुखेषु बध्नीयात् दृष्टिं दुःखानुबन्धिषु ॥ सुख दुख तो अतिथि हैं,

आम इंसान की परेशानियां| Problems of common man

July 27, 2022

 “आम इंसान की परेशानियां” आज आम इंसान के हालातों पर रोटी कपड़ा और मकान फ़िल्म के गानें की चंद पंक्तियाँ

Leave a Comment