Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

राधा की पीड़ा चल केशव बरसाना जाना,रूठ गयी जहां राधा रानी ,वृंदावन को भूल गयी है ,अपनों से भी रूठ …


राधा की पीड़ा

राधा की पीड़ा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

चल केशव बरसाना जाना,
रूठ गयी जहां राधा रानी ,
वृंदावन को भूल गयी है ,
अपनों से भी रूठ गई है ।।

क्या केशव सोचा है तूने ,
इच्छा थी यशोदा माई की ,
सगाई तेरी होनी तय थी ,
बोलो प्रणय कहां खोया है ।।

बंसीवट में स्वर गुंजित है ,
तुमसे दूर कहां राधा है ,
प्रणय तुम्हारा बहुत दृढ़ है,
तुम से आगे नाम जुड़ा है ।।

प्रणय कथा कितनी सुंदर है ,
मिलन अंत से दृढ़ बनी है,
तेरे मन की पीड़ा को कह ,
कौन प्रकट कर पाएगा ।।

राधा कृष्ण की प्रणय कथा,
जग वंदन करता आया है ,
आरती कुंज बिहारी की ,
राधा जिसकी अपनी थी ।।

युग युग से पीड़ा है मन में ,
अंतर्द्वंद हमारा भी है ,
चल बरसाना मिल आते हैं,
बहुत दिनों से मन कहता है ।।

जीवन में संघर्ष बड़ा है ,
मिलन हमारा अंत हुआ है,
पीड़ा मेरी दर्द भरी है ,
चल केशव तेरे पीछे मैं ।।

मुक्ति का अब द्वार खुला है ,
मुझको द्वारिका पाल मिला ,
प्रणय मार्ग पर चलना है ,
मिलन हमारा बहुत निकट है।।

मिलन कामना जीवन की है ,
दर्द भरा जीवन पाया है ,
जीवन दर्शन केशव का है ,
मेरे पास कुछ बचा कहां है ।।

राधा की पीड़ा को केशव ,
तुझको ही सहलाना होगा,
धरा धाम की तेरी राधिका,
तेरी प्रतीक्षा में होगी ।।

अपने चक्र सुदर्शन से कह ,
उसकी रक्षा करनी होगी ,
धरा धाम की राधा रानी,
कभी न तुमसे दूर रहेगी ।।

मौलिक रचना
डॉ हरे कृष्ण मिश्र
बोकारो स्टील सिटी
झारखंड ।


Related Posts

धारा के विपरीत

June 24, 2022

 धारा के विपरीत जितेन्द्र ‘कबीर’ शक्तिशाली का गुणगान करना फायदे का सौदा रहा है हमेशा से, यह जानते हुए भी

अस्तित्व इतिहास बनेगी

June 24, 2022

 अस्तित्व इतिहास बनेगी सुधीर श्रीवास्तव पृथ्वी दिवस की औपचारिकता न निभाइए भू संरक्षण करना है तो  धरातल पर कुछ करके

यही जीवन चक्र है

June 24, 2022

 यही जीवन चक्र है सुधीर श्रीवास्तव जीवन क्या है यह समझाने नहीं खुद समझने की जरूरत है, अदृश्य से जीवन

व्यंग्य धरती को मरने दो

June 24, 2022

 व्यंग्यधरती को मरने दो सुधीर श्रीवास्तव धरती उपज को रही तो खोने दो धरती मर रही है मरने दो। बहुत

जब तक है जिंदगी

June 24, 2022

 जब तक है जिंदगी सुधीर श्रीवास्तव जिंदगी जब तक है गतिमान रहती है, न ठहरती है,न विश्राम करती है। सुख

क्या लेकर आया है जो ले जायेगा

June 24, 2022

 क्या लेकर आया है जो ले जायेगा सुधीर श्रीवास्तव यह कैसी विडम्बना है कि हम सब जानते हैं मगर मानते

PreviousNext

Leave a Comment